बिना सैलरी ज्यादा काम करने को मजबूर हैं भारतीय कर्मचारी, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Kaushiki | Sept 06, 2026, 13:00 IST
Corporate Work Culture
एडीपी की पीपल एट वर्क 2026' रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। भारत में 24% कर्मचारी हर हफ्ते 16 घंटे से ज्यादा बिना सैलरी के काम करते हैं। इस वजह से कर्मचारियों में तनाव, थकावट और नई नौकरी तलाशने की इच्छा काफी तेजी से बढ़ रही है।
Corporate Work Culture: आज के समय में कॉर्पोरेट वर्क कल्चर काफी तेजी से बदल रहा है। ऑफिस में काम का टारगेट और प्रेशर हर दिन बढ़ता जा रहा है। इसी बीच एक ग्लोबल रिसर्च रिपोर्ट में बहुत हैरान करने वाला खुलासा हुआ है।
भारत में लाखों कर्मचारी हर दिन बिना किसी एक्स्ट्रा पैसे के काम कर रहे हैं। वे ऑफिस की शिफ्ट खत्म होने के बाद भी लगातार काम करते रहते हैं। वर्क-लाइफ बैलेंस पूरी तरह से खत्म होता दिख रहा है।
एडीपी (ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग) की नई रिपोर्ट ने हर किसी को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट का नाम People at Work 2026: A Global Workforce View है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय वर्कफोर्स पर काम का कितना भारी बोझ है।
लोग अपने कीमती घंटे कंपनी को बिना किसी एक्स्ट्रा पैसे के दे रहे हैं। आइए इस पूरी रिपोर्ट को समझें। हम जानेंगे कि वर्कप्लेस पर बिना पैसे के काम कराने का ये ट्रेंड क्यों बढ़ रहा है। इसके साथ ही ये भी जानेंगे कि इसका एम्प्लाइज की लाइफ और हेल्थ पर क्या असर पड़ रहा है।
![People at Work 2026]()
ADP की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्थिति काफी गंभीर नजर आती है। भारत में करीब 24% कर्मचारी हर हफ्ते 16 घंटे से ज्यादा बिना पैसे के काम करते हैं।इसका सीधा मतलब है कि वे हर दिन औसतन दो घंटे से ज्यादा ओवरटाइम करते हैं।
लेकिन इसके बदले उन्हें कंपनी से कोई अतिरिक्त सैलरी या बोनस नहीं मिलता है। इसके अलावा 40% कर्मचारी हर हफ्ते 6 से 15 घंटे बिना सैलरी के काम करते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि देश के अधिकतर लोग ओवरटाइम का शिकार हो रहे हैं।
अगर हम पूरी दुनिया के आंकड़ों से तुलना करें तो भारत की स्थिति ज्यादा खराब है। दुनिया भर में केवल 12% लोग ही हफ्ते में 16 घंटे से ज्यादा अनपेड काम करते हैं।
वहां 62% कर्मचारी हफ्ते में केवल पांच घंटे तक ही बिना पैसे के काम करते हैं। इस तुलना से साफ है कि भारतीय वर्कप्लेस पर ओवरटाइम का कल्चर ज्यादा हावी है।
अक्सर ऐसा माना जाता है कि ज्यादा देर काम करने से आउटपुट बहुत अच्छा आता है। लेकिन रिपोर्ट में इस सोच को पूरी तरह से गलत साबित किया गया है।
ज्यादा घंटे बिना पैसों के काम करने से वर्क क्वालिटी अच्छी नहीं होती है। बल्कि इससे कर्मचारियों के मन में काम के प्रति निराशा और झुंझलाहट पैदा होती है। जो लोग ज्यादा देर तक अनपेड काम करते हैं उनकी प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है।
वे अपनी पूरी क्षमता और स्किल्स का इस्तेमाल काम में नहीं कर पाते हैं। उनमें हर समय थकान, सिरदर्द और मेंटल स्ट्रेस बना रहता है। इस वजह से वे अपने काम से मानसिक रूप से पूरी तरह कटने लगते हैं।
वे काम को केवल एक मजबूरी मानकर खत्म करने की कोशिश करते हैं। इससे कंपनी के ओवरऑल परफॉरमेंस पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ता है।
यह समस्या सिर्फ ऑफिस जाकर काम करने वाले एम्प्लाइज तक सीमित नहीं है। घर से काम करने वाले यानी रिमोट वर्कर्स का हाल भी काफी बुरा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि रिमोट वर्क में अनपेड ओवरटाइम की संभावना ज्यादा होती है। घर पर काम करते समय लॉग-ऑफ करने का कोई तय समय नहीं होता है।
बॉस और सीनियर्स किसी भी समय काम का मैसेज या ईमेल भेज देते हैं। रिमोट वर्कर्स को देर रात तक लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना पड़ता है। कंपनी और ऑफिस में नए आए युवा कर्मचारी भी इसका शिकार सबसे ज्यादा बनते हैं।
करियर में आगे बढ़ने और जॉब बचाने के चक्कर में वे मना नहीं कर पाते। युवा कर्मचारी बिना कोई शिकायत किए घंटों अनपेड काम करते रहते हैं। लेकिन धीरे-धीरे ये आदत उनकी मेंटल हेल्थ को पूरी तरह नुकसान पहुंचाती है।
ज्यादा घंटे अनपेड काम करने से कर्मचारियों में बर्नआउट तेजी से बढ़ रहा है। बर्नआउट का मतलब है कि इंसान मेंटली और फिजिकली पूरी तरह थक जाता है।
रिपोर्ट में देखा गया कि ऐसे एम्प्लाइज में जॉब छोड़ने का विचार ज्यादा आता है। वे हर समय नई जॉब सर्च करने और स्विच करने की योजना बनाते रहते हैं। उन्हें अपने प्रेजेंट काम में कोई फ्यूचर या ग्रोथ नजर नहीं आती है।
हालांकि वे शुरुआत में अपने काम को लेकर काफी ज्यादा सीरियस रहते हैं। लेकिन लंबे समय तक तारीफ और सही सैलरी न मिलने से उनका भरोसा टूट जाता है।
वे जल्द से जल्द उस वर्क कल्चर से बाहर निकलने का रास्ता खोजते हैं। इस तरह अनपेड ओवरटाइम से कंपनियों में एम्प्लॉई एट्रिशन रेट यानी नौकरी छोड़ने की दर बढ़ती है। unpaid work
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब कंपनियों को अपना माइंडसेट बदलना होगा। वर्कप्लेस पर एम्प्लॉई वेलबीइंग और वर्क-लाइफ बैलेंस को प्रॉयोरिटी देना बहुत जरूरी है।
कर्मचारियों (corporate employees) को उनके हर एक घंटे के काम का सही मुआवजा मिलना चाहिए। ओवरटाइम (overtime) के लिए सख्त नियम और पॉलिसी बनाई जानी चाहिए ताकि शोषण न हो। कंपनियों को ये समझना होगा कि खुशहाल कर्मचारी ही कंपनी को आगे ले जाते हैं।
कॉर्पोरेट सेक्टर (corporate sector) मेंबिना सैलरी के काम कराने से केवल शॉर्ट टर्म में ही फायदा दिखता है। लॉन्ग टर्म में कंपनी के ब्रांड इमेज और प्रोडक्टिविटी दोनों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए टाइम पर लॉग-ऑफ और फेयर पे स्केल लागू होना बेहद जरूरी है।
Reference:
ADP People at Work 2026 Report Article
ये खबरें भी पढ़ें...
PGI-D Report: भोपाल, इंदौर, जबलपुर सब फिसड्डी, सीधी ने बचाई सरकारी शिक्षा व्यवस्था की लाज
PGI-D Report: छत्तीसगढ़ में कोई जिला टॉप ग्रेड नहीं, रायगढ़ नंबर-1, सुकमा सबसे पीछे
MP NFHS Report: एमपी में महिलाओं के पास बैंक खाते पर मोबाइल नहीं
NHFS Report 2026: एमपी मैरिटल वायलेंस के आकड़ों में सुधार पर जमीनी हकीकत डरावनी
भारत में लाखों कर्मचारी हर दिन बिना किसी एक्स्ट्रा पैसे के काम कर रहे हैं। वे ऑफिस की शिफ्ट खत्म होने के बाद भी लगातार काम करते रहते हैं। वर्क-लाइफ बैलेंस पूरी तरह से खत्म होता दिख रहा है।
एडीपी (ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग) की नई रिपोर्ट ने हर किसी को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट का नाम People at Work 2026: A Global Workforce View है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय वर्कफोर्स पर काम का कितना भारी बोझ है।
लोग अपने कीमती घंटे कंपनी को बिना किसी एक्स्ट्रा पैसे के दे रहे हैं। आइए इस पूरी रिपोर्ट को समझें। हम जानेंगे कि वर्कप्लेस पर बिना पैसे के काम कराने का ये ट्रेंड क्यों बढ़ रहा है। इसके साथ ही ये भी जानेंगे कि इसका एम्प्लाइज की लाइफ और हेल्थ पर क्या असर पड़ रहा है।
People at Work 2026
एडीपी रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
लेकिन इसके बदले उन्हें कंपनी से कोई अतिरिक्त सैलरी या बोनस नहीं मिलता है। इसके अलावा 40% कर्मचारी हर हफ्ते 6 से 15 घंटे बिना सैलरी के काम करते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि देश के अधिकतर लोग ओवरटाइम का शिकार हो रहे हैं।
अगर हम पूरी दुनिया के आंकड़ों से तुलना करें तो भारत की स्थिति ज्यादा खराब है। दुनिया भर में केवल 12% लोग ही हफ्ते में 16 घंटे से ज्यादा अनपेड काम करते हैं।
वहां 62% कर्मचारी हफ्ते में केवल पांच घंटे तक ही बिना पैसे के काम करते हैं। इस तुलना से साफ है कि भारतीय वर्कप्लेस पर ओवरटाइम का कल्चर ज्यादा हावी है।
ज्यादा काम का मतलब बेहतर काम नहीं
ज्यादा घंटे बिना पैसों के काम करने से वर्क क्वालिटी अच्छी नहीं होती है। बल्कि इससे कर्मचारियों के मन में काम के प्रति निराशा और झुंझलाहट पैदा होती है। जो लोग ज्यादा देर तक अनपेड काम करते हैं उनकी प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है।
वे अपनी पूरी क्षमता और स्किल्स का इस्तेमाल काम में नहीं कर पाते हैं। उनमें हर समय थकान, सिरदर्द और मेंटल स्ट्रेस बना रहता है। इस वजह से वे अपने काम से मानसिक रूप से पूरी तरह कटने लगते हैं।
वे काम को केवल एक मजबूरी मानकर खत्म करने की कोशिश करते हैं। इससे कंपनी के ओवरऑल परफॉरमेंस पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ता है।
युवाओं और रिमोट वर्कर्स का बुरा हाल
बॉस और सीनियर्स किसी भी समय काम का मैसेज या ईमेल भेज देते हैं। रिमोट वर्कर्स को देर रात तक लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना पड़ता है। कंपनी और ऑफिस में नए आए युवा कर्मचारी भी इसका शिकार सबसे ज्यादा बनते हैं।
करियर में आगे बढ़ने और जॉब बचाने के चक्कर में वे मना नहीं कर पाते। युवा कर्मचारी बिना कोई शिकायत किए घंटों अनपेड काम करते रहते हैं। लेकिन धीरे-धीरे ये आदत उनकी मेंटल हेल्थ को पूरी तरह नुकसान पहुंचाती है।
बढ़ रहा है बर्नआउट और जॉब चेंज
रिपोर्ट में देखा गया कि ऐसे एम्प्लाइज में जॉब छोड़ने का विचार ज्यादा आता है। वे हर समय नई जॉब सर्च करने और स्विच करने की योजना बनाते रहते हैं। उन्हें अपने प्रेजेंट काम में कोई फ्यूचर या ग्रोथ नजर नहीं आती है।
हालांकि वे शुरुआत में अपने काम को लेकर काफी ज्यादा सीरियस रहते हैं। लेकिन लंबे समय तक तारीफ और सही सैलरी न मिलने से उनका भरोसा टूट जाता है।
वे जल्द से जल्द उस वर्क कल्चर से बाहर निकलने का रास्ता खोजते हैं। इस तरह अनपेड ओवरटाइम से कंपनियों में एम्प्लॉई एट्रिशन रेट यानी नौकरी छोड़ने की दर बढ़ती है। unpaid work
वर्क कल्चर में सुधार की सख्त जरूरत
कर्मचारियों (corporate employees) को उनके हर एक घंटे के काम का सही मुआवजा मिलना चाहिए। ओवरटाइम (overtime) के लिए सख्त नियम और पॉलिसी बनाई जानी चाहिए ताकि शोषण न हो। कंपनियों को ये समझना होगा कि खुशहाल कर्मचारी ही कंपनी को आगे ले जाते हैं।
कॉर्पोरेट सेक्टर (corporate sector) मेंबिना सैलरी के काम कराने से केवल शॉर्ट टर्म में ही फायदा दिखता है। लॉन्ग टर्म में कंपनी के ब्रांड इमेज और प्रोडक्टिविटी दोनों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए टाइम पर लॉग-ऑफ और फेयर पे स्केल लागू होना बेहद जरूरी है।
Reference:
ADP People at Work 2026 Report Article
ये खबरें भी पढ़ें...
PGI-D Report: भोपाल, इंदौर, जबलपुर सब फिसड्डी, सीधी ने बचाई सरकारी शिक्षा व्यवस्था की लाज
PGI-D Report: छत्तीसगढ़ में कोई जिला टॉप ग्रेड नहीं, रायगढ़ नंबर-1, सुकमा सबसे पीछे
MP NFHS Report: एमपी में महिलाओं के पास बैंक खाते पर मोबाइल नहीं
NHFS Report 2026: एमपी मैरिटल वायलेंस के आकड़ों में सुधार पर जमीनी हकीकत डरावनी
रायपुर मेडिकल कॉलेज में 152 पदों पर संविदा भर्ती, 14 अक्टूबर को कॉलेज काउंसिल हॉल में वॉक-इन इंटरव्यू
By Umeshwari Baghel
चूरू में 38 लाख की साइबर ठगी: ठगों को बैंक खाते देने वाला आरोपी असम से गिरफ्तार, पूछताछ जारी
By Jyoti Mahender Bhardwaj
‘नागरिकता से पहले मतदाता बनीं सोनिया गांधी’, मदन राठौड़ ने SIR के विरोध पर कांग्रेस को घेरा
By Raghvendra Singh Rathore
बिना नोटिस सीनियर एडवोकेट का WhatsApp अकाउंट बैन, मेटा और व्हाट्सएप के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची याचिका
By Neel Tiwari
आसाराम को कोर्ट से मिली राहत, हाईकोर्ट ने सरकार से कहा - 20 दिन की पैरोल पर करें रिहा
By Ashish Bhardwaj
SI भर्ती 2021: रिजाइन देने वालों को दोबारा मिलेगी पुरानी नौकरी, राजस्थान सरकार ने जारी किया आदेश
By Jageshwar prasad
भोपाल यूथ कॉन्क्लेव में बवाल: जुबिन के शो में छात्र और पुलिस के बीच भिड़ंत, कुर्सियां भी फेंकी
By Arohi Raj