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अब एक ऐप से दूसरे ऐप में पोर्ट होगा आपका UPI AutoPay, बार-बार नहीं करना होगा सेट
Kaushiki | Sept 03, 2026, 12:40 IST
UPI AutoPay
UPI AutoPay
एनपीसीआई जल्द ही UPI AutoPay को इंटरऑपरेबल बनाने जा रहा है। अब यूजर्स को ऐप बदलने पर पुराना मैंडेट कैंसिल करके नया सेट नहीं करना पड़ेगा। वे किसी भी दूसरे यूपीआई ऐप से अपने पुराने ऑटोपे मैंडेट को आसानी से मैनेज कर सकेंगे।
UPI AutoPay Porting: डिजिटल इंडिया के इस दौर में ऑनलाइन पेमेंट करना बहुत आसान हो गया है। आज हम मोबाइल रीचार्ज से लेकर राशन खरीदने तक के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा ओटीटी सब्सक्रिप्शन, म्यूचुअल फंड एसआईपी, इंश्योरेंस प्रीमियम और लोन की किस्तों के लिए लोग यूपीआई ऑटोपे का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करते हैं।
लेकिन अभी तक एक सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि अगर आप अपना यूपीआई ऐप बदलते हैं, तो आपको पुराना ऑटोपे मैंडेट कैंसिल करना पड़ता है। इसके बाद नए ऐप पर जाकर दोबारा नया मैंडेट सेट करना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है।
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अब भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) इस सिस्टम को पूरी तरह बदलने जा रहा है। एनपीसीआई जल्द ही इंटरऑपरेबल यूपीआई ऑटोपे सुविधा (Interoperable UPI AutoPay System) शुरू करने की तैयारी में है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब आपका ऑटोपे किसी एक ऐप से बंधा नहीं रहेगा।
अगर आप फोनपे से गूगल पे या पेटीएम पर स्विच करते हैं, तो आपका पुराना ऑटोपे खुद ही पोर्ट हो जाएगा। ये टेक्नोलॉजी फिनटेक की दुनिया में एक बड़ा कदम है। इससे करोड़ों यूजर्स को बहुत बड़ी सहूलियत मिलने वाली है।
इंटरऑपरेबल शब्द का मतलब होता है आपस में जुड़कर काम करना। अभी हर यूपीआई ऐप अपना अलग मैंडेट सिस्टम चलाता है। नया सिस्टम आने के बाद सभी ऐप आपस में जुड़ जाएंगे।
यूजर किसी भी ऐप से अपने ऑटोपे को मैनेज कर पाएगा। इससे यूजर्स को बार-बार नया रजिस्ट्रेशन नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल पेमेंट को सुगम बनाने के लिए यह बड़ा कदम है।
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मौजूदा समय में ऐप बदलते ही पुराना सिस्टम काम करना बंद कर देता है। आपको पुरानी सब्सक्रिप्शन कैंसिल करके नई सेट करनी पड़ती है। अगर आप भूल गए तो आपकी पेमेंट रुक सकती है। नए नियम के लागू होने से यह झंझट पूरी तरह खत्म होगी। आप बिना किसी टेंशन के कभी भी नया ऐप चुन सकेंगे। आपके सभी ऑटोपे मैंडेट बिना रुके पहले की तरह चलते रहेंगे।
अब नए यूपीआई पेमेंटसिस्टम से यूजर्स को एक बहुत बड़ा फायदा मिलने वाला है। आप किसी भी ऐप पर अपने सभी एक्टिव मैंडेट देख पाएंगे। आने वाले महीनों में कटने वाले पैसों की लिस्ट दिख जाएगी। पुरानी सब्सक्रिप्शन को ट्रैक करना बहुत आसान हो जाएगा। इसके लिए उसी पुराने ऐप पर वापस जाने की जरूरत नहीं होगी। यह स्क्रीन यूजर्स को पूरा कंट्रोल और सही जानकारी देगी।
यूपीआई ऐप बदलने से आपका मूल बैंक खाता नहीं बदलेगा। जिस बैंक खाते को आपने शुरू में जोड़ा था, पैसा वहीं से कटेगा। ऐप सिर्फ पेमेंट को मैनेज करने का एक जरिया बनेगा।
बैंकिंग की मूल रूटिंग में कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से यह सिस्टम बिल्कुल सुरक्षित रहेगा। कंस्यूमर का पैसा पहले की तरह सुरक्षित तरीके से ही ट्रांसफर होगा।
इस नए बदलाव (Digital India) से उन लोगों को बहुत फायदा होगा जो एसआईपी भरते हैं। लोन की रीपेमेंट और इंश्योरेंस प्रीमियम टाइम पर कटना जरूरी होता है।
मैंडेट रुकने से पेनल्टी या नुकसान होने का खतरा रहता था। अब इंटरऑपरेबल ऑटोपे से किस्तों का भुगतान समय पर हो सकेगा। यूजर्स को बार-बार ऑथराइजेशन देने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस बदलाव का बड़ा असर व्यापारियों और मर्चेंट्स पर भी पड़ेगा। पेमेंट गेटवे कंपनियां अपने ग्राहकों के मैंडेट ट्रांसफर कर सकेंगी। एक पेमेंट गेटवे से दूसरे पर जाना बेहद आसान हो जाएगा। इसके लिए ग्राहकों से बार-बार अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी।
बिजनेस और कस्टमर दोनों का समय इससे काफी बचेगा। इस नई सुविधा को शुरू करने के लिए ऐप्स को अपडेट करना होगा। थर्ड-पार्टी ऐप्स को अपना सिस्टम ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाना पड़ेगा। एनपीसीआई के गाइडलाइंस के हिसाब से नया कोडिंग सिस्टम बनेगा।
तकनीकी बदलाव पूरे होने के बाद ही यह सर्विस लाइव होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनपीसीआई (National Payments Corporation of India) जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा करेगा।
मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में यह ऐलान संभव है। इसके बाद इसे लागू करने की पूरी टाइमलाइन सामने आ जाएगी। फिनटेक एक्सपर्ट्स इस फैसले की काफी सराहना कर रहे हैं। PhonePe | google pay
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लेकिन अभी तक एक सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि अगर आप अपना यूपीआई ऐप बदलते हैं, तो आपको पुराना ऑटोपे मैंडेट कैंसिल करना पड़ता है। इसके बाद नए ऐप पर जाकर दोबारा नया मैंडेट सेट करना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है।
क्या है इंटरऑपरेबल यूपीआई ऑटोपे सिस्टम
अगर आप फोनपे से गूगल पे या पेटीएम पर स्विच करते हैं, तो आपका पुराना ऑटोपे खुद ही पोर्ट हो जाएगा। ये टेक्नोलॉजी फिनटेक की दुनिया में एक बड़ा कदम है। इससे करोड़ों यूजर्स को बहुत बड़ी सहूलियत मिलने वाली है।
इंटरऑपरेबल शब्द का मतलब होता है आपस में जुड़कर काम करना। अभी हर यूपीआई ऐप अपना अलग मैंडेट सिस्टम चलाता है। नया सिस्टम आने के बाद सभी ऐप आपस में जुड़ जाएंगे।
यूजर किसी भी ऐप से अपने ऑटोपे को मैनेज कर पाएगा। इससे यूजर्स को बार-बार नया रजिस्ट्रेशन नहीं करना पड़ेगा। डिजिटल पेमेंट को सुगम बनाने के लिए यह बड़ा कदम है।
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एक ही स्क्रीन पर दिखेंगे सभी एक्टिव मैंडेट
अब नए यूपीआई पेमेंटसिस्टम से यूजर्स को एक बहुत बड़ा फायदा मिलने वाला है। आप किसी भी ऐप पर अपने सभी एक्टिव मैंडेट देख पाएंगे। आने वाले महीनों में कटने वाले पैसों की लिस्ट दिख जाएगी। पुरानी सब्सक्रिप्शन को ट्रैक करना बहुत आसान हो जाएगा। इसके लिए उसी पुराने ऐप पर वापस जाने की जरूरत नहीं होगी। यह स्क्रीन यूजर्स को पूरा कंट्रोल और सही जानकारी देगी।
पैसे उसी ओरिजिनल बैंक खाते से ही कटेंगे
बैंकिंग की मूल रूटिंग में कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से यह सिस्टम बिल्कुल सुरक्षित रहेगा। कंस्यूमर का पैसा पहले की तरह सुरक्षित तरीके से ही ट्रांसफर होगा।
लोन की किस्त में मिलेगी बड़ी राहत
मैंडेट रुकने से पेनल्टी या नुकसान होने का खतरा रहता था। अब इंटरऑपरेबल ऑटोपे से किस्तों का भुगतान समय पर हो सकेगा। यूजर्स को बार-बार ऑथराइजेशन देने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी।
सभी UPI ऐप्स को करने होंगे बदलाव
बिजनेस और कस्टमर दोनों का समय इससे काफी बचेगा। इस नई सुविधा को शुरू करने के लिए ऐप्स को अपडेट करना होगा। थर्ड-पार्टी ऐप्स को अपना सिस्टम ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाना पड़ेगा। एनपीसीआई के गाइडलाइंस के हिसाब से नया कोडिंग सिस्टम बनेगा।
तकनीकी बदलाव पूरे होने के बाद ही यह सर्विस लाइव होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनपीसीआई (National Payments Corporation of India) जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा करेगा।
मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में यह ऐलान संभव है। इसके बाद इसे लागू करने की पूरी टाइमलाइन सामने आ जाएगी। फिनटेक एक्सपर्ट्स इस फैसले की काफी सराहना कर रहे हैं। PhonePe | google pay
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वैज्ञानिकों ने बनाए रोबोटिक कॉकरोच, मलबे में दबे लोगों की जान बचाएंगे ये कॉकरोच
अब टोल प्लाजा नहीं रोकनी होगी गड़िया, MP में पहली बार बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू
नो नेटवर्क में भी नहीं अटकेगा UPI, अब सिर्फ फोन टैप कर करें दो हजार तक का पेमेंट
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