अधिकारियों ने अल्पवर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए। कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। किसानों को कम अवधि में पकने वाली किस्में अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
![इंदौर में कृषि और संबंधित विभागों की संभागस्तरीय समीक्षा बैठक]()
इंदौर में कृषि और संबंधित विभागों की संभागस्तरीय समीक्षा बैठक
Agriculture department urges farmers to opt
संभाग के चार जिलों में बारिश के ये हाल
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 में संभाग के चार जिले अल्पवर्षा (Scanty rainfall)से प्रभावित हैं। इनमें अलीराजपुर, धार, इंदौर और झाबुआ शामिल हैं। पिछले साल की तुलना में अलीराजपुर में 43.11 प्रतिशत कम बारिश हुई है। धार में 40.81 प्रतिशत और इंदौर में 32.82 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। झाबुआ में पिछले साल की तुलना में 28.98 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बैठक में जल परियोजनाओं की कुल क्षमता की जानकारी भी दी गई। जलभराव की स्थिति और बुवाई के प्रतिशत की भी समीक्षा हुई। आगामी कृषि जरूरतों के अनुसार बीजों की उपलब्धता की जानकारी भी दी गई।
गेहूं की जगह चना और सरसों की खेती पर जोर
बैठक में कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने गेहूं की जगह दूसरी फसलों की खेती के लिए किसानों को जागरूक करने को कहा। इनमें चना, अलसी और सरसों जैसी फसलें शामिल हैं। ये फसलें कम पानी में तैयार हो सकती हैं।
अल्पवर्षा से प्रभावित जिलों के लिए प्रस्तावित रबी रणनीति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने उपलब्ध पानी का समुचित उपयोग करने पर जोर दिया। किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई अपनाने की सलाह देने को कहा गया। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया।
उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने निर्देश दिए। उन्होंने रबी वर्ष 2026-27 के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने को कहा। उर्वरक वितरण व्यवस्था का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए।
अधिकारियों को ई-विकास पोर्टल के माध्यम से उर्वरक वितरण करने के निर्देश दिए गए। पीओएस मशीनों से उर्वरकों की बिक्री सुनिश्चित करने को भी कहा गया। दोबारा उर्वरक लेने वाले किसानों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए।
कंपनियों और थोक विक्रेताओं के यहां उपलब्ध स्टॉक की नियमित निगरानी करने को कहा गया। उर्वरकों का उचित भंडारण और वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। सभी कलेक्टरों को उर्वरक वितरण व्यवस्था की निगरानी करने के लिए कहा गया।
संभाग में 17 लाख 36 हजार 5 हेक्टेयर में होगी खेती
बैठक में रबी वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित बुवाई लक्ष्य की जानकारी दी गई।
इंदौर संभाग में कुल 17 लाख 36 हजार 5 हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य है। इस क्षेत्र में विभिन्न रबी फसलों की खेती प्रस्तावित है।
फसलवार कार्ययोजना में गेहूं की बुवाई का क्षेत्र सबसे अधिक प्रस्तावित है। संभाग में 9 लाख 93 हजार 100 हेक्टेयर में गेहूं बोने का लक्ष्य है। चने की बुवाई के लिए 5 लाख 82 हजार 100 हेक्टेयर क्षेत्र प्रस्तावित है। मक्का की बुवाई के लिए 1 लाख 23 हजार 940 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े मौजूद रहे। सहकारिता आयुक्त दीपक सिंह और संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार भी शामिल हुए। विपणन संघ के प्रबंध संचालक अभिजीत अग्रवाल भी बैठक में मौजूद रहे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के संचालक उमाशंकर भार्गव भी शामिल हुए। कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक राघवेंद्र सिंह भी बैठक में उपस्थित रहे। वे मंडी आयुक्त भी हैं।
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह भी मौजूद रहे। संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर भी बैठक में शामिल हुए। जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। संबंधित विभागों के संभागीय और जिला स्तर के अधिकारी भी मौजूद थे।