क्या RSS पर बैन लगाने वाला है अमेरिका? जानें सच्चाई
Amresh Kushwaha | Aug 23, 2026, 13:25 IST
मोहन भागवत की US यात्रा
क्या अमेरिका RSS पर बैन लगाने की तैयारी कर रहा है? जानिए USCIRF की सिफारिश, भारत सरकार के कड़े रुख और मोहन भागवत की यात्रा से जुड़े इस पूरे विवाद का सच...
पिछले कुछ दिनों से एक सवाल तेजी से चर्चा में है, क्या अमेरिका आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) पर बैन लगाने वाला है। सच्चाई यह है कि अमेरिका ने RSS पर कोई बैन नहीं लगाया है। यह मामला अमेरिका के एक धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF (United States Commission on International Religious Freedom) से जुड़ा है।
इस आयोग ने अमेरिकी सरकार से RSS के कुछ सदस्यों पर सैंक्शन यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश एक रिपोर्ट के तहत आई है, कोई सीधा फैसला नहीं है। अमेरिकी सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। यानी फिलहाल यह सिर्फ एक आयोग की मांग है, RSS पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है।
USCIRF अमेरिका की एक स्वतंत्र संघीय एजेंसी है। यह दुनियाभर में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नजर रखती है। आयोग अपनी सिफारिशें अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को भेजता है। इस बार आयोग की चेयर आसिफ महमूद ने RSS प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा का विरोध किया है।
उन्होंने अमेरिकी सरकार से RSS के कुछ सदस्यों पर सैंक्शन लगाने को कहा है। आयोग का आरोप है कि ये सदस्य धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि RSS नेताओं को कोई डिप्लोमेटिक शिष्टाचार या उच्च स्तरीय मुलाकात नहीं दी जानी चाहिए।
USCIRF ने RSS को एक छाता संगठन बताया है। आयोग का दावा है कि इससे जुड़े संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों में भूमिका निभाई है। यह मांग USCIRF की 2026 की सालाना रिपोर्ट का हिस्सा है।
इसी रिपोर्ट में भारत को कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न यानी CPC (Country of Particular Concern) घोषित करने की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में RAW (Research and Analysis Wing) पर भी सैंक्शन की मांग की गई थी।
भारत सरकार ने इस मांग पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय यानी MEA (Ministry of External Affairs) ने 21 अगस्त को इस पर बयान जारी किया। MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि USCIRF बार-बार भारत के बारे में गुमराह करने वाले बयान देता रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक पक्षपाती संगठन है।
जायसवाल के मुताबिक ऐसे संगठनों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उनका कहना था कि इस आयोग का अपना एजेंडा है और इसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है। भारत सरकार ने साफ कर दिया कि वह USCIRF के दावों और सिफारिशों को स्वीकार नहीं करती। यह पहली बार नहीं है जब भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को खारिज किया हो। इससे पहले भी भारत कई बार इस आयोग की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण बता चुका है।
यह पूरा विवाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की विदेश यात्रा से ठीक पहले सामने आया है। भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाने वाले हैं। यह यात्रा RSS के सौ साल पूरे होने के मौके पर हो रहे वैश्विक कार्यक्रमों का हिस्सा है। न्यूयॉर्क में वे 29 अगस्त को यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन में हिस्सा लेंगे।
RSS के मुताबिक इस विदेश यात्रा का मकसद भारत और हिंदू समाज को लेकर अपना नजरिया रखना है। संगठन का कहना है कि वे वसुधैव कुटुंबकम का संदेश भी फैलाना चाहते हैं। यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, इस विचार को आगे बढ़ाना इस यात्रा का लक्ष्य बताया गया है।
USCIRF के इस कदम पर अमेरिका में मौजूद हिंदू संगठनों ने भी नाराजगी जताई है। अमेरिका आधारित हिंदू एडवोकेसी ग्रुप हिंदूपैक्ट ने USCIRF के रुख की आलोचना की है। संगठन का कहना है कि आयोग के कुछ सदस्य हिंदू विरोधी नैरेटिव को आगे बढ़ा रहे हैं। हिंदूपैक्ट के फाउंडर ने इसे एकतरफा और गलत कदम बताया है। यह पहला मौका नहीं है जब USCIRF की सिफारिशों पर अमेरिका में मौजूद भारतीय मूल के संगठनों ने सवाल उठाए हों।
USCIRF और भारत के बीच यह टकराव नया नहीं है। पिछले कुछ सालों में यह आयोग कई बार भारत को लेकर विवादित सिफारिशें दे चुका है। साल 2024 की रिपोर्ट में आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम तक लिया था। उस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि सत्तारूढ़ पार्टी ने चुनाव से पहले मुस्लिमों के खिलाफ नफरत भरे बयान दिए। इसके अलावा आयोग RAW और उसके एक अधिकारी पर भी सैंक्शन की मांग कर चुका है। हर बार भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है और आयोग को पक्षपाती बताया है।
फिलहाल की स्थिति साफ है। USCIRF सिर्फ एक सलाहकार संस्था है, जिसके पास खुद कोई कानूनी ताकत नहीं है। यह सिर्फ अमेरिकी सरकार को सिफारिशें भेज सकती है। अमेरिकी सरकार चाहे तो इन सिफारिशों को माने, या फिर उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दे।
अभी तक अमेरिकी विदेश विभाग या राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से इस पर कोई ठोस बयान नहीं आया है। ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि RSS पर अमेरिका बैन लगाने जा रहा है। यह सिर्फ एक आयोग की सिफारिश है, जिसे भारत सरकार पहले ही खारिज कर चुकी है।
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इस आयोग ने अमेरिकी सरकार से RSS के कुछ सदस्यों पर सैंक्शन यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश एक रिपोर्ट के तहत आई है, कोई सीधा फैसला नहीं है। अमेरिकी सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। यानी फिलहाल यह सिर्फ एक आयोग की मांग है, RSS पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है।
USCIRF ने क्या मांग रखी है
उन्होंने अमेरिकी सरकार से RSS के कुछ सदस्यों पर सैंक्शन लगाने को कहा है। आयोग का आरोप है कि ये सदस्य धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि RSS नेताओं को कोई डिप्लोमेटिक शिष्टाचार या उच्च स्तरीय मुलाकात नहीं दी जानी चाहिए।
USCIRF ने RSS को एक छाता संगठन बताया है। आयोग का दावा है कि इससे जुड़े संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों में भूमिका निभाई है। यह मांग USCIRF की 2026 की सालाना रिपोर्ट का हिस्सा है।
इसी रिपोर्ट में भारत को कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न यानी CPC (Country of Particular Concern) घोषित करने की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में RAW (Research and Analysis Wing) पर भी सैंक्शन की मांग की गई थी।
भारत ने दिया कड़ा जवाब
जायसवाल के मुताबिक ऐसे संगठनों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उनका कहना था कि इस आयोग का अपना एजेंडा है और इसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है। भारत सरकार ने साफ कर दिया कि वह USCIRF के दावों और सिफारिशों को स्वीकार नहीं करती। यह पहली बार नहीं है जब भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को खारिज किया हो। इससे पहले भी भारत कई बार इस आयोग की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण बता चुका है।
मोहन भागवत की यात्रा से जुड़ा है विवाद
RSS के मुताबिक इस विदेश यात्रा का मकसद भारत और हिंदू समाज को लेकर अपना नजरिया रखना है। संगठन का कहना है कि वे वसुधैव कुटुंबकम का संदेश भी फैलाना चाहते हैं। यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, इस विचार को आगे बढ़ाना इस यात्रा का लक्ष्य बताया गया है।
अमेरिका में हिंदू संगठनों ने भी दी प्रतिक्रिया
पहले भी विवादों में रहा है USCIRF
तो क्या सच में बैन लगेगा
अभी तक अमेरिकी विदेश विभाग या राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से इस पर कोई ठोस बयान नहीं आया है। ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि RSS पर अमेरिका बैन लगाने जा रहा है। यह सिर्फ एक आयोग की सिफारिश है, जिसे भारत सरकार पहले ही खारिज कर चुकी है।
ये खबरें भी पढ़िए...
शाह के बयान पर गहलोत का पलटवार, बोले-RSS ने कभी नहीं अपनाया यह गीत
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