चनाव आयोग का यह फैसला बढ़ाएगा नए वोटर्स की मुश्किलें
Aman Vaishnav | Jul 13, 2026, 12:23 IST
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का बदला नियम
चुनाव आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में एक नया बदलाव किया है। अब नए मतदाताओं को अपने माता-पिता के पुराने SIR डेटा की जानकारी देनी होगी। यह नया नियम सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म भरने वालों के लिए है, जबकि ऑफलाइन वालों के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- चुनाव आयोग नए वोटरों के लिए फॉर्म 6 के ऑनलाइन वर्जन में बदलाव कर रहा है।
- अब आवेदकों को अपने माता-पिता की पिछले SIR की स्थिति बतानी होगी।
- इस बदलाव के लिए अभी तक कोई कानूनी संशोधन नहीं हुआ है।
- देश भर में एसआईआरके दौरान पांच करोड़ 58 लाख से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हट चुके हैं।
- इसका असर उन लोगों के बच्चों के रजिस्ट्रेशन पर पड़ सकता है, जिनके नाम पहले हट चुके हैं।
नया प्रावधान क्या कहता है
पहला विकल्प यह बताता है कि आवेदक का नाम पिछली SIR सूची में मौजूद था। दूसरा विकल्प माता-पिता या दादा-दादी के नाम से जुड़ा है। तीसरा विकल्प उन लोगों के लिए है जिनका या जिनके परिवार का नाम कभी सूची में नहीं आया।
अगर कोई पहले दो विकल्पों में से कोई चुनता है, तो उसे विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और सीरियल नंबर जैसी पुरानी जानकारी देनी होगी।
कई आवेदकों के पास यह जानकारी मौजूद नहीं है। ऐसे लोगों के सामने सिर्फ तीसरा विकल्प बचता है। लेकिन पोर्टल पर अभी यह साफ नहीं है कि तीसरा विकल्प चुनने पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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सिर्फ ऑनलाइन आवेदकों पर लागू
यानी मैन्युअल तरीके से आवेदन करने वालों को यह जानकारी नहीं देनी होगी। सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करने वालों को ही इस नई शर्त से गुजरना होगा।
तकनीकी रूप से यह कॉलम अनिवार्य नहीं बताया गया है। लेकिन इसे भरे बिना फॉर्म सबमिट नहीं हो पाता। इसलिए व्यवहारिक तौर पर हर ऑनलाइन आवेदक को यह जानकारी देनी ही पड़ती है।
कहां-कहां लागू होगा यह नियम
पिछले साल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई SIR के दौरान मौजूदा वोटरों से यही जानकारी मांगी गई थी। अभी 19 राज्यों में चल रही SIR में भी यह जानकारी ली जा रही है। लेकिन नए वोटरों के मुख्य फॉर्म 6 में अब तक कोई आधिकारिक संशोधन नहीं हुआ है। कानून मंत्रालय की गजट नोटिफिकेशन में भी इस बदलाव का जिक्र नहीं मिलता।
बंगाल में सबसे ज्यादा असर
कानूनी आधार क्या है
फॉर्म 6 का मूल मकसद
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