महिला वकीलों की चुनौतियां: SCBA सर्वे में 81% महिला वकीलों ने बताया पेशे में संघर्ष, CJI सूर्यकांत ने जारी की रिपोर्ट

Pawan Modiya | Mar 25, 2026, 19:04 IST
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Photograph: (the sootr)

महिला वकीलों की चुनौतियां पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के सर्वे में 81% महिलाओं ने पेशे में संघर्ष, भेदभाव और नेटवर्किंग की समस्या बताई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्याय व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है।

भारत में न्याय व्यवस्था को अक्सर निष्पक्षता और समान अवसरों का प्रतीक माना जाता है, लेकिन महिला वकीलों की चुनौतियां (Challenges of Women Lawyers) पर हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने इस धारणा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा कराए गए राष्ट्रीय सर्वे में सामने आया है कि 81.3% महिला वकीलों को अपने पुरुष सहकर्मियों की तुलना में पेशे में अधिक संघर्ष करना पड़ता है।

यह रिपोर्ट भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने 22 मार्च को बेंगलुरु में आयोजित SCBA के पहले सम्मेलन में जारी की। सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि न्याय व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद उन्हें पेशेवर जीवन में कई तरह की चुनौतियों और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

SCBA सर्वे: महिला वकीलों की स्थिति पर पहली बड़ी रिपोर्ट

SCBA द्वारा किए गए इस राष्ट्रीय सर्वे का शीर्षक है- “डॉक्यूमेंटिंग वॉयसेज ऑफ वुमेन लीगल प्रोफेशनल्स इन इंडिया (Documenting Voices of Women Legal Professionals in India)”

इस सर्वे में देशभर की 2,604 महिला वकीलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कई गंभीर मुद्दों को उजागर किया, जिनमें पेशेवर असमानता, नेटवर्किंग की कमी, कार्यस्थल पर भेदभाव और उत्पीड़न जैसे मामले प्रमुख हैं।

81% महिला वकीलों को पेशे में ज्यादा संघर्ष

सर्वे के प्रमुख निष्कर्षों में यह सामने आया कि:

  • 81.3% महिला वकीलों ने कहा कि उन्हें पुरुषों के मुकाबले अधिक संघर्ष करना पड़ता है।
  • 41.1% महिला वकीलों ने बताया कि उन्हें अपने काम में अत्यधिक कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
  • 63.7% महिला वकीलों ने कभी न कभी महसूस किया कि यह पेशा शायद उनके लिए नहीं है।
यह आंकड़े बताते हैं कि वकालत के क्षेत्र में महिलाओं के लिए पेशेवर माहौल अभी भी पूरी तरह अनुकूल नहीं बन पाया है।

काम के दौरान यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी सामने आईं

सर्वे में शामिल कई महिला वकीलों ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) के मामलों का भी खुलासा किया।

  • 16.1% महिला वकीलों ने कहा कि उन्हें पेशे में यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
  • शिकायत करने वाली 57% महिलाओं ने बताया कि उन्हें या तो नकारात्मक प्रतिक्रिया मिली या काम से अलग कर दिया गया।
  • कई मामलों में शिकायत करने पर महिलाओं को परोक्ष बदले (Indirect Retaliation) का सामना करना पड़ा।
  • 12.7% महिलाओं ने इस विषय पर जवाब देने से ही परहेज किया।
यह आंकड़े न्याय व्यवस्था में कार्यस्थल सुरक्षा और लैंगिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

महिला वकीलों को नेटवर्किंग में भी दिक्कत

वकालत के पेशे में प्रोफेशनल नेटवर्किंग (Professional Networking) सफलता का एक अहम हिस्सा मानी जाती है। लेकिन सर्वे के अनुसार 72.3% महिला वकीलों ने कहा कि जेंडर के कारण उन्हें नेटवर्किंग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसका सीधा असर उनके करियर ग्रोथ और बड़े मामलों में अवसर मिलने पर पड़ता है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ी, लेकिन बाधाएं अभी भी कायम

हाल के वर्षों में भारत में महिला वकीलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि, SCBA सर्वे के अनुसार अभी भी कई ढांचागत समस्याएं (Structural Barriers) मौजूद हैं, जैसे - नेतृत्व पदों पर महिलाओं की कम भागीदारी। बार एसोसिएशन में प्रतिनिधित्व की कमी। कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव और मातृत्व और परिवार के साथ काम का संतुलन। इन कारणों से कई महिला वकीलों को पेशे में आगे बढ़ने में कठिनाई होती है।

सर्वे में किन अदालतों की वकील शामिल थीं

इस सर्वे में 23 राज्यों के बार काउंसिल का प्रतिनिधित्व शामिल था।

अनुभव के आधार पर भागीदारी

  • 37.4% वकील – 0 से 5 साल का अनुभव
  • 30.7% वकील – 15 साल से अधिक अनुभव

अदालतों के आधार पर भागीदारी

  • 52.9% – जिला अदालत
  • 28.8% – हाई कोर्ट
  • 13% – सुप्रीम कोर्ट
  • 2.5% – ट्रिब्यूनल


CJI सूर्यकांत ने क्या कहा

रिपोर्ट जारी करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्याय व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस सर्वे से सामने आए निष्कर्ष न्यायिक संस्थाओं और बार एसोसिएशनों को सुधार के लिए प्रेरित करेंगे। उनका मानना है कि महिला वकीलों के लिए सुरक्षित, समान और सहयोगी कार्य वातावरण तैयार करना न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है।

SCBA सर्वे के मुख्य आंकड़े

मुद्दाप्रतिशत
पेशे में ज्यादा संघर्ष81.3%
अत्यधिक चुनौतियां41.1%
पेशा छोड़ने का विचार63.7%
यौन उत्पीड़न का सामना16.1%
नेटवर्किंग में समस्या72.3%

भारत में महिला वकीलों के लिए आगे का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि न्याय व्यवस्था में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम जरूरी हैं, जैसे- बार एसोसिएशनों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना, कार्यस्थल पर सुरक्षा और शिकायत प्रणाली को मजबूत करना, मातृत्व और परिवार के लिए अनुकूल नीतियां बनाना और मेंटरशिप और नेटवर्किंग के अवसर बढ़ाना। अगर इन मुद्दों पर गंभीरता से काम किया जाए, तो आने वाले समय में महिला वकीलों के लिए वकालत का पेशा अधिक सुरक्षित और अवसरों से भरपूर हो सकता है।

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