शुक्र तारा अस्त होने से इस बार बसंत पंचमी पर नहीं बजेंगी शहनाइयां, जानें क्यों
Latest Religious News: हर साल बसंत पंचमी को विवाह के लिए सबसे सही माना जाता है। इसे शास्त्रों में एक अबूझ मुहूर्त के रूप में पहचान मिली हुई है। लोग इस दिन बिना पंचांग देखे शादी और मुंडन जैसे कार्य करते हैं। ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, साल 2026 में 23 जनवरी को परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं।
इस बार बसंत पंचमी पर विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शुक्र तारे का अस्त होना इसका मुख्य कारण है। बिना शुक्र के उदय हुए मांगलिक कार्यों की सिद्धि संभव नहीं होती है।
शुक्र तारा अस्त होने का धार्मिक महत्व
ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, विवाह संस्कार में शुक्र ग्रह की भूमिका बहुत जरूरी माना जाता है। शुक्र देव जीवन में सुख, शांति और वंश वृद्धि के कारक माने जाते हैं। धर्मशास्त्रों में गुरु या शुक्र के अस्त होने पर कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है।
इस बार शुक्र का तारा 31 जनवरी की रात को उदित होगा। इसलिए बसंत पंचमी पर विवाह की शहनाइयां इस साल सुनाई नहीं देंगी। ग्रहों की यह स्थिति मांगलिक कार्यों के लिए शुभ फलदायी नहीं है।
बसंत ऋतु का भव्य स्वागत
भले ही विवाह मुहूर्त न हो, लेकिन धार्मिक उत्साह कम नहीं होगा। बसंत पंचमी का पर्व मुख्य रूप से विद्या की देवी को समर्पित है। इस दिन मां सरस्वती की विशेष साधना और ज्ञान का उत्सव होगा। भक्त माता को पीले वस्त्र, पीले फूल और मालपुआ अर्पित करते हैं। बसंत ऋतु के आगमन पर प्रकृति में नया उत्साह देखने को मिलता है।
मंदिरों में फाग उत्सव की शुरुआत के साथ गुलाल उड़ाया जाता है। यह दिन संगीत, कला और शिक्षा के आरंभ के लिए श्रेष्ठ है। इस बार बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।
महाकाल मंदिर में विशेष आयोजन
बता दें कि, विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा का अद्भुत श्रृंगार किया जाएगा। भस्म आरती के समय बाबा महाकाल को बसंती फूलों (Basant Panchami) से सजाया जाएगा। संध्या आरती में भगवान को अबीर और गुलाल भी समर्पित किया जाएगा।
वहीं, सांदीपनि आश्रम में भगवान श्री कृष्ण का विशेष पूजन संपन्न किया जाएगा। यहां बच्चों का विद्यारंभ संस्कार पाटी पूजन के साथ आयोजित होता है। भगवान को मीठे पीले चावल का भोग लगाकर आशीर्वाद लिया जाता है।
साल 2026 के आगामी विवाह मुहूर्त
विवाह की योजना बना रहे लोगों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। हिंदू पंचांग के मुताबिक,
ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, अधिक मास के दौरान सभी प्रकार के मांगलिक कार्य फिर रुक जाएंगे। ज्येष्ठ मास में विवाह कार्य भी वर्जित रहता है। ऐसे में ग्रहों की चाल को समझकर ही विवाह की तारीख तय करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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