/sootr/media/media_files/2026/03/08/basoda-2026-2026-03-08-13-02-33.jpg)
Sheetala Ashtami 2026: भारतीय संस्कृति में त्योहारों का गहरा धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देशभर में शीतला अष्टमी मनाया जाता है। इसे आम बोलचाल में बसोड़ा भी कहा जाता है। साल 2026 में ये पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा।
यह दिन आरोग्य की देवी माता शीतला को समर्पित है। मां शीतला हमें बीमारियों से बचाकर शीतलता प्रदान करती हैं। इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता। मां को एक दिन पहले बने बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।
शीतला अष्टमी 2026 की सही तारीख
पंचांग के मुताबिक, अष्टमी तिथि 11 मार्च को शुरू होगी। ये तिथि रात 01:54 बजे से प्रारंभ हो जाएगी। इसका समापन 12 मार्च को सुबह 04:19 बजे होगा।
उदया तिथि के कारण 11 मार्च को ही बसोड़ा मनेगा। पूजा का शुभ समय सुबह 06:35 से शाम 06:27 तक है। इस पूरे समय में भक्त माता की पूजा कर सकते हैं।
चूल्हा न जलाने की परंपरा
मान्यता के मुताबिक, बसोड़ा के दिन घर का चूल्हा जलाना पूरी तरह वर्जित होता है। भक्त एक दिन पहले ही सारा भोजन तैयार कर लेते हैं। सप्तमी की रात को मीठे चावल, पूड़ी और हलवा बनता है।
अष्टमी के दिन माता को इसी बासी भोजन का भोग लगता है। मां शीतला को ठंडा भोजन अत्यंत प्रिय माना जाता है। चूल्हा जलाने से माता शीतला रुष्ट हो सकती हैं। पूरा परिवार प्रसाद के रूप में ठंडा भोजन ही ग्रहण करता है।
शीतला अष्टमी का वैज्ञानिक कारण
बसोड़ा का पर्व मौसम बदलने के समय पर आता है। इस समय सर्दी खत्म होती है और गर्मी शुरू होती है। मौसम के इस बदलाव में संक्रामक बीमारियां बढ़ने लगती हैं।
चेचक और खसरा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ठंडा और संतुलित भोजन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। गर्मी के दस्तक देते ही पाचन शक्ति भी थोड़ी कम होती है। इसलिए ठंडा भोजन शरीर को अंदर से शीतलता प्रदान करता है।
शीतला अष्टमी की पूजा विधि
- पूजा के लिए एक दिन पहले शुद्ध भोजन बना लें।
- अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
- पूजा की थाली में हल्दी, रोली और अक्षत रखें।
- मां शीतला की प्रतिमा को जल और भोग अर्पित करें।
- पूजा के बाद बचा हुआ जल घर में छिड़क दें।
- इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और खुशहाली आती है।
- परिवार के सभी सदस्य माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
ये खबरें भी पढ़ें...
बाबा महाकाल ने भक्तों संग खेली होली, हुआ भव्य श्रृंगार, कल से बदलेगा पूजा का समय
जानें हिंदू कैलेंडर के अंतिम महीने फाल्गुन माह का महत्व, भूल के भी न करें ये काम
घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए कपूर आरती के साथ शामिल करें ये चीज, नेगेटिव एनर्जी रहेगी दूर
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us