Diwali 2025: इस बार शुभ योग में मनेगा दीपावली 2025 का पर्व, इन योगों में पूजा करने से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
Kaushiki | Oct 06, 2025, 13:51 IST
diwali-2025
दीपावली 2025 में 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जब प्रदोष काल में हस्त नक्षत्र और उच्च बृहस्पति का अत्यंत शुभ योग बन रहा है। इस दिन लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल (वृषभ लग्न) सबसे उत्तम है, जो धन की स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करेगा।
Diwali 2025: प्रकाश का महापर्व दीपावली जिसे लक्ष्मी पूजन के नाम से भी जाना जाता है इस साल 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, इस दिन बनने वाले अत्यंत शुभ ग्रह योग इस पर्व की महत्ता को कई गुना बढ़ा रहे हैं।
सोमवार को पड़ने वाला हस्त नक्षत्र, वेध्रति योग, नाग करण और कन्या राशि के चंद्रमा की स्थिति में यह पर्व विशेष रूप से शुभ रहेगा। दीपावली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को प्रदोष काल में मनाया जाता है।
धर्मशास्त्रीय मान्यताओं के मुताबिक, प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना ही दीपावली पूजन के लिए शास्त्रोक्त और सबसे सटीक माना जाता है।
इस बार 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहेगी जिसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो लक्ष्मी पूजन के लिए बिल्कुल उपयुक्त रहेगी।
दीपावली का त्योहार केवल एक दिन का नहीं, बल्कि पांच दिवसीय उत्सव होता है, जिसमें हर दिन का अपना एक विशेष महत्व है:
ये खबर भी पढ़ें... जानिए मध्य प्रदेश के उन शहरों की हैरान करने वाली कहानी, जहां होती है रावण की पूजा इस बार दिवाली 2025 पर 20 और 21 का चक्कर, जानें लक्ष्मी पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त और सही तारीख
ज्योतिष की दृष्टि से इस वर्ष की दीपावली अत्यंत शुभ और फलदायी रहने वाली है। कई प्रमुख ग्रह योग बन रहे हैं जो भूमि, भवन, संपत्ति और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाएंगे। जैसे-
ज्योतिषाचार्य पं. संतोष शर्मा के मुताबिक, दीपावली पर लक्ष्मी पूजन हमेशा प्रदोष काल में और स्थिर लग्न में किया जाना चाहिए ताकि घर में लक्ष्मी का वास स्थिर रहे।
ये खबर भी पढ़ें...
Karwa Chauth 2025: अखंड सौभाग्य के लिए करवाचौथ पर जरूर करें ये 5 काम, प्रेम से भर जाएगा वैवाहिक जीवन
दीवाली, छठ और तुलसी विवाह कब? जानें कार्तिक मास 2025 के 10 सबसे बड़े पर्वों की लिस्ट और पूजा विधि
सोमवार को पड़ने वाला हस्त नक्षत्र, वेध्रति योग, नाग करण और कन्या राशि के चंद्रमा की स्थिति में यह पर्व विशेष रूप से शुभ रहेगा। दीपावली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को प्रदोष काल में मनाया जाता है।
धर्मशास्त्रीय मान्यताओं के मुताबिक, प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना ही दीपावली पूजन के लिए शास्त्रोक्त और सबसे सटीक माना जाता है।
इस बार 20 अक्टूबर को दोपहर 3:45 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहेगी जिसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो लक्ष्मी पूजन के लिए बिल्कुल उपयुक्त रहेगी।
दीपावली के पांच दिवसीय पर्व
| दिन | त्योहार | तिथि (2025) | महत्व |
| प्रथम दिन | धनतेरस (Dhanteras) | 18 अक्टूबर | यम के निमित्त दीपदान का आरंभ और नई खरीदारी (विशेषकर धातुओं की)। |
| द्वितीय दिन | धन्वंतरि जयंती | 19 अक्टूबर | अभिजीत मुहूर्त में चिकित्सा के देवता (Lord of Medicine) धन्वंतरि की पूजा। |
| तृतीय दिन | रूप चौदस (नरक चतुर्दशी) | 20 अक्टूबर (प्रातः) | तेल स्नान (Abhyanga Snan) द्वारा सौंदर्य और स्वास्थ्य की कामना का पर्व। |
| चतुर्थ दिन | दीपावली/लक्ष्मी पूजन | 20 अक्टूबर (शाम) | लक्ष्मी पूजन और घरों में दीपों को प्रज्ज्वलित करने का मुख्य त्योहार। |
| पंचम दिन | गोवर्धन पूजा/अन्नकूट | 22 अक्टूबर | गोवर्धन पर्वत की पूजा और अन्नकूट (विभिन्न व्यंजनों) का महोत्सव। |
| षष्ठम दिन | भाईदूज (यम द्वितीया) | 23 अक्टूबर | भाई-बहन के अटूट प्रेम और यमराज से लंबी उम्र का आशीर्वाद पाने का पर्व। |
धन और समृद्धि के लिए बन रहे विशेष ग्रह योग
- केंद्र-त्रिकोण योग:
ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, ग्रह गोचर (दिवाली लक्ष्मी पूजा टाइम) में इस दिन केंद्र-त्रिकोण योग बन रहा है। इसमें बुध का त्रिकोण योग (बुद्धि और व्यापार का कारक) और मंगल का केंद्र योग (भूमि, साहस और ऊर्जा का कारक) शामिल है। यह संयोग किसी भी नई योजना की शुरुआत और संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता दिलाने वाला है। - बृहस्पति की उच्च स्थिति:
ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, नवग्रहों में देवताओं के गुरु बृहस्पति इस दिन कर्क राशि में अतिचारी होंगे। भारतीय ज्योतिष में बृहस्पति का कर्क राशि में होना शुभ माना जाता है क्योंकि यह उनकी उच्च गत अवस्था है। उच्च बृहस्पति ज्ञान, धर्म और धन-धान्य की वृद्धि में सहायक होते हैं जिससे लक्ष्मी पूजन का फल कई गुना बढ़ जाएगा। - हस्त नक्षत्र:
सोमवार का दिन और हस्त नक्षत्र का संयोग भी शुभ माना जाता है। हस्त नक्षत्र का स्वामी स्वयं चंद्रमा है, जो मन, शांति और धन का कारक है। यह योग स्थिरता और सुख-शांति प्रदान करने वाला है।
दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त
- प्रदोष काल (वृषभ लग्न):
समय: शाम का समय जब अमावस्या तिथि रहती है।
महत्व: यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम माना जाता है, खासकर जब वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) चल रहा हो। माना जाता है कि स्थिर लग्न में किया गया पूजन घर में धन की स्थिरता सुनिश्चित करता है। - मध्य रात्रि (सिंह लग्न):
समय: देर रात का समय।
महत्व: यह तांत्रिक क्रियाओं और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ माना जाता है, जो गुप्त साधना या विशिष्ट उद्देश्यों के लिए किए जाते हैं। - महानिशीथ काल (वृश्चिक लग्न):
समय: मध्य रात्रि के बाद का समय।
महत्व: यह खासकर व्यापारियों के लिए शुभ होता है। इस लग्न में पूजन करने से व्यापार वृद्धि और धन संग्रह में सफलता मिलती है। पूजन की शुरुआत प्रदोष काल से करनी चाहिए, जिसमें सबसे पहले घर में नरकहरा चतुर्दशी का पर्व भी शामिल रहेगा।
ये खबर भी पढ़ें...
Karwa Chauth 2025: अखंड सौभाग्य के लिए करवाचौथ पर जरूर करें ये 5 काम, प्रेम से भर जाएगा वैवाहिक जीवन
दीवाली, छठ और तुलसी विवाह कब? जानें कार्तिक मास 2025 के 10 सबसे बड़े पर्वों की लिस्ट और पूजा विधि
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari