तीसरे, पांचवें, सातवें दिन और अनंत चतुर्दशी पर कैसे दें बप्पा को विदाई, जानें गणपति विसर्जन मुहूर्त
Kaushiki | Aug 28, 2025, 16:05 IST
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यह गणेश विसर्जन 2025 के लिए शुभ मुहूर्तों की विस्तृत जानकारी है, जिसमें डेढ़ दिन, तीसरे दिन, पांचवें दिन, सातवें दिन और अनंत चतुर्दशी के समय शामिल हैं, ताकि भक्त अपनी परंपरा के अनुसार सही विधि-विधान से विसर्जन कर सकें।
Anant Chaturdashi: 27 अगस्त से पूरे देश में गणेश उत्सव का शानदार आगाज हो चुका है। भक्तगण पूरे उत्साह और भक्ति के साथ विघ्नहर्ता गणपति बप्पा को अपने घर लाए हैं और उनकी स्थापना की है। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है, जिसमें भक्तगण भगवान गणेश की सेवा, पूजा-अर्चना और भजन करते हैं।
इस 10-दिवसीय महोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है, जब बप्पा को विदाई दी जाती है और उनकी मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।
हालांकि, बहुत से लोग अपनी-अपनी परंपराओं और मान्यताओं के मुताबिक गणपति का विसर्जन डेढ़, तीसरे, पांचवें और सातवें दिन भी करते हैं।
ऐसे में विसर्जन (गणपति विसर्जन मुहूर्त) का सही समय और मुहूर्त जानना बहुत जरूरी है ताकि सभी धार्मिक अनुष्ठान सही विधि-विधान से पूरे किए जा सकें। आइए, इस साल गणेश विसर्जन के अलग-अलग मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानें....
वैदिक पंचांग के मुताबिक, जिन परिवारों में गणपति को तीन दिन के लिए रखा जाता है, वे 29 अगस्त 2025 को विसर्जन कर सकते हैं।
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 05:58 बजे से सुबह 10:46 बजे तक
वैदिक पंचांग के मुताबिक, गणपति की पांच दिन की सेवा करने वाले भक्त 31 अगस्त 2025 को विसर्जन कर सकते हैं। यह विसर्जन का एक बहुत ही लोकप्रिय समय है।
वैदिक पंचांग के मुताबिक, जो लोग गणपति को सात दिन के लिए घर लाते हैं वे 2 सितंबर 2025 को विसर्जन कर सकते हैं।
वैदिक पंचांग के मुताबिक, सबसे ज्यादा प्रचलित और प्रमुख विसर्जन का दिन अनंत चतुर्दशी है, जो 6 सितंबर 2025 को है। यह 10-दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन होता है।
विसर्जन से पहले, गणपति (अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन) की मूर्ति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आरती की जाती है और उन्हें मोदक और अन्य प्रिय भोग लगाए जाते हैं।
परिवार के सभी सदस्य बप्पा से अगले साल फिर आने की प्रार्थना करते हैं। यह एक भावुक क्षण होता है, जब भक्तगण अपने प्रिय भगवान को विदाई देते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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इस 10-दिवसीय महोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है, जब बप्पा को विदाई दी जाती है और उनकी मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।
हालांकि, बहुत से लोग अपनी-अपनी परंपराओं और मान्यताओं के मुताबिक गणपति का विसर्जन डेढ़, तीसरे, पांचवें और सातवें दिन भी करते हैं।
ऐसे में विसर्जन (गणपति विसर्जन मुहूर्त) का सही समय और मुहूर्त जानना बहुत जरूरी है ताकि सभी धार्मिक अनुष्ठान सही विधि-विधान से पूरे किए जा सकें। आइए, इस साल गणेश विसर्जन के अलग-अलग मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानें....
तीसरे दिन गणेश विसर्जन
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 05:58 बजे से सुबह 10:46 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त (चर): शाम 05:10 बजे से शाम 06:46 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 12:22 बजे से दोपहर 01:58 बजे तक
- रात्रि मुहूर्त (लाभ): रात 09:34 बजे से रात 10:58 बजे तक
पांचवें दिन गणेश विसर्जन
- प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 07:34 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 01:57 बजे से दोपहर 03:32 बजे तक
- सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): शाम 06:44 बजे से रात 10:57 बजे तक
- रात्रि मुहूर्त (लाभ): देर रात 01:46 बजे से देर रात 03:10 बजे तक
- पांच दिन का उत्सव परिवार में खुशी, समृद्धि और सकारात्मकता लाता है।
सातवें दिन गणेश विसर्जन
- प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 09:10 बजे से दोपहर 01:56 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 03:31 बजे से शाम 05:06 बजे तक
- सायाह्न मुहूर्त (लाभ): रात 08:06 बजे से रात 09:31 बजे तक
- रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): रात 10:56 बजे से सुबह 03:10 बजे तक
- सात दिन की पूजा भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ देती है।
अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 6 सितंबर 2025, सुबह 3:12 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 7 सितंबर 2025, सुबह 01:41 बजे
- प्रातः मुहूर्त (शुभ): सुबह 07:36 बजे से सुबह 09:10 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): दोपहर 12:19 बजे से शाम 05:02 बजे तक
- सायाह्न मुहूर्त (लाभ): शाम 06:37 बजे से रात 08:02 बजे तक
- रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): रात 09:28 बजे से देर रात 01:45 बजे तक
- उषाकाल मुहूर्त (लाभ): 7 सितंबर को सुबह 04:36 बजे से सुबह 06:02 बजे तक
- इस दिन पूरे देश में गणपति विसर्जन की धूम रहती है और भक्त 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देते हैं।
विसर्जन से पहले की विधि
परिवार के सभी सदस्य बप्पा से अगले साल फिर आने की प्रार्थना करते हैं। यह एक भावुक क्षण होता है, जब भक्तगण अपने प्रिय भगवान को विदाई देते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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