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Latest Religious News: दिवाली केवल रोशनी का त्योहार नहीं है। यह पांच दिनों का सबसे बड़ा महापर्व है। दिवाली की रात को महानिशा भी कहते हैं। इस रात कई खास साधनाएं होती हैं जिसमें महालक्ष्मी की पूजा बहुत जरूरी होती है। पर क्या आप जानते हैं इस रात उल्लू की पूजा भी होती है।
उल्लू मां लक्ष्मी का प्रिय वाहन है। इसके पीछे गहरा धार्मिक रहस्य छिपा है। उल्लू पूजा को तंत्र-मंत्र से जोड़ा जाता है इसलिए इसका आध्यात्मिक महत्व भी बहुत बड़ा है। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
माता लक्ष्मी का वाहन उल्लू क्यों है
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, जब सृष्टि की रचना हुई और सभी देवी-देवता पृथ्वी पर आए तो हर देवी-देवता ने अपना वाहन चुना। जब मां लक्ष्मी का नंबर आया तो सभी पशु-पक्षी उनका वाहन बनने के लिए तैयार थे। तब मां लक्ष्मी ने कहा कि मैं हर साल कार्तिक अमावस्या पर धरती पर आऊंगी और तभी अपना वाहन चुनूंगी।
अंत में मां लक्ष्मी ने उल्लू को अपना वाहन चुना। उन्होंने उल्लू को यह वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति दीपावली के दिन उनकी पूजा के साथ उनके वाहन की पूजा भी करेगा, उस पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहेगी।
मां लक्ष्मी की पूजा दीपावली की रात अमावस्या के घने अंधेरे में होती है। उल्लू भी एक निशाचर प्राणी है, जो रात के अंधेरे में भी स्पष्ट देख सकता है। ये बताता है कि धन अचानक या गुप्त रूप से आ सकता है। तो उसे संभालने के लिए व्यक्ति के पास मानसिक क्षमता होनी चाहिए।
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उल्लू पूजा का आध्यात्मिक संदेश
उल्लू की पूजा केवल एक पक्षी की पूजा नहीं है। यह उस विशेष क्षमता और लक्षणरहित देखने का प्रतीक है, जो धन कमाने और उसे बनाए रखने के लिए जरूरी है।
बुद्धि का प्रतीक
तंत्र शास्त्र और हिंदू दर्शन में उल्लू को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना गया है। वह उस समय भी देख सकता है, जब बाकी दुनिया सो रही होती है या भ्रम में होती है।
व्यापारिक क्षमता
यह गुण व्यापार और जीवन में सफलता के लिए बहुत जरूरी है। लक्ष्मी यानी धन का वाहक वही हो सकता है, जो समय से पहले आने वाले समय को देख ले और सही समय पर सही निर्णय ले सके। उल्लू की पूजा का यह सबसे बड़ा संदेश है कि धन केवल भाग्य से नहीं, बल्कि बुद्धि से आता है।
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दिवाली का उल्लू से कनेक्शन
आमतौर पर भारतीय समाज में उल्लू को अशुभ माना जाता है और उसकी आवाज को नकारात्मक माना जाता है। दीपावली की रात जब उल्लू लक्ष्मी (मां लक्ष्मी का पूजन) के वाहन के रूप में पूजनीय हो जाता है।
ये संदेश देता है कि कोई भी वस्तु या व्यक्ति बुरा नहीं होता, बस उसे सही जगह और सही समय पर सम्मान देने की जरूरत होती है। यह उस नकारात्मकता को दूर करने का भी प्रतीक है जो धन आने के रास्ते में बाधा डालती है।
तो दिवाली की रात पवित्र उल्लू की पूजा इसलिए की जाती है, क्योंकि यह माता लक्ष्मी का वाहन है। उल्लू को पूजने का अर्थ है लक्ष्मी जी के वाहन का सम्मान करना, जिससे देवी प्रसन्न होती हैं। यह पूजा धन की देवी को स्थिर करने और सच के मार्ग से धन-समृद्धि कमने का प्रतीक है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। धार्मिक अपडेट | Hindu News
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