केदारनाथ धाम में VIP दर्शन पर विवाद, पुरोहितों और भक्तों का हंगामा
केदारनाथ धाम. भगवान के दरबार में सब बराबर हैं यह कहावत इन दिनों केदारनाथ की पहाड़ियों में नारों की शक्ल ले चुकी है। केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को लेकर विवाद अब चरम पर पहुंच गया है।
शुक्रवार एक मई से शुरू हुआ यह विरोध शनिवार को तब और उग्र हो गया जब तीर्थ पुरोहितों के साथ-साथ आम श्रद्धालु भी सड़कों पर उतर आए। हालात यहां तक पहुंच गए कि बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
वीआईपी कल्चर को लेकर शुरू हुआ विवाद
इन दिनों बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जहां आम श्रद्धालु कड़ाके की ठंड में घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। वहीं वीआईपी व्यवस्था के तहत कुछ चुनिंदा लोगों को सीधे मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है।
इसी असमानता ने शनिवार को भक्तों के गुस्से में घी डालने का काम किया। मंदिर परिसर के बाहर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एकत्र होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
विवाद की शुरुआत शुक्रवार को हुई जब तीर्थ पुरोहितों ने वीआईपी कल्चर के खिलाफ आवाज उठाई। उनका तर्क है कि इस व्यवस्था से न केवल पारंपरिक पूजा प्रभावित हो रही है, बल्कि मंदिर की मर्यादा को भी ठेस पहुंच रही है।
शनिवार होते-होते यह विरोध जन-आंदोलन में बदल गया। तीर्थ यात्रियों का आरोप है कि प्रशासन ने वीआईपी दर्शन बंद करने के दावे तो बहुत किए, लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
सरकार के दावों की खुली पोल
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बार चारधाम यात्रा में वीआईपी कल्चर खत्म करने का पुरजोर दावा किया था। लेकिन केदारनाथ से आ रही तस्वीरें इन दावों पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि जब सरकार कह रही है कि वीआईपी एंट्री बंद है, तो फिर पिछले दरवाजों से प्रवेश पाने वाले ये खास लोग कौन हैं? इसी बात को लेकर तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा सीधे मंदिर समिति के प्रबंधन पर फूट रहा है।
सियासी रंग या वाजिब मांग?
इस पूरे विवाद पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सफाई देते हुए कहा कि केदारनाथ में कोई वीआईपी दर्शन नहीं हो रहा है। उन्होंने उल्टा आरोप लगाया कि कुछ लोग यात्रा को बाधित करने के लिए इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर प्रदर्शनकारी स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। प्रशासन के लिए चुनौती अब इस भारी भीड़ को नियंत्रित करना और गिरते भरोसे को बहाल करना है।
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