Narak Chaturdashi 2026: छोटी दिवाली पर सूर्योदय से पहले क्यों करते हैं अभ्यंग स्नान? इन बातों का रखें खास ध्यान
Kaushiki | Nov 06, 2026, 15:00 IST
रूप चौदस पर तेल लगाकर स्नान करने की है मान्यता, जानें शुभ समय
Narak Chaturdashi 2026: दिवाली से पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस भी कहा जाता है। इस साल नरक चतुर्दशी 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करना शुभ माना जाता है।
इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और यमराज के नाम का दीपक जलाने की भी परंपरा है। नरक चतुर्दशी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की पौराणिक कथा से भी जुड़ा है। आइए जानते हैं छोटी दिवाली पर स्नान का सही समय, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस त्योहार से जुड़ी खास मान्यताएं।
हिंदू पंचांग के मुताबिक, नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह त्योहार दिवाली के आसपास पड़ता है और दीपोत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंचांग के मुताबिक, नरक चतुर्दशी 2026: स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त-
धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, नरक चतुर्दशी पर सुबह जल्दी स्नान करने का विशेष महत्व है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, दीपदान और जरूरतमंद लोगों की मदद करना भी शुभ माना जाता है। हालांकि, स्नान और पूजा का समय अलग-अलग शहरों में बदल सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग के मुताबिक समय की पुष्टि करना सही रहेगा।
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह दीपोत्सव के दिनों में मनाई जाती है। इस दिन लोग घरों की साफ-सफाई करते हैं और शाम को दीपक जलाते हैं। कई परिवारों में सुबह जल्दी उठकर तेल लगाने और स्नान करने की परंपरा भी है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के असुर का वध किया था। इसी घटना की याद में नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कुछ राज्यों में इसे रूप चौदस कहते हैं, जबकि कई स्थानों पर काली चौदस के नाम से मनाया जाता है।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान की परंपरा काफी पुरानी है। धार्मिक मान्यताओं में इस स्नान को खास महत्व दिया गया है। अभ्यंग स्नान का मतलब शरीर पर तेल लगाकर स्नान करना होता है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल लगाने की परंपरा है। कुछ परिवार स्नान के दौरान उबटन और सुगंधित चीजों का भी इस्तेमाल करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान करने से नरक के भय से मुक्ति की कामना पूरी होती है। इसे शरीर और मन की पवित्रता से भी जोड़ा जाता है। इसलिए नरक चतुर्दशी पर Abhyanga Snan का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, इससे किसी धार्मिक फल या स्वास्थ्य लाभ की गारंटी नहीं होती। यह आस्था और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है।
नरक चतुर्दशी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर की पौराणिक कथा से है। मान्यता के मुताबिक, नरकासुर ने अपनी शक्ति के घमंड में देवताओं को परेशान किया और कई कन्याओं को बंदी बना लिया। लोगों को उसके अत्याचारों से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने प्राग्ज्योतिषपुर पर आक्रमण किया।
युद्ध में नरकासुर का वध कर सभी बंदी कन्याओं को मुक्त कराया। इसी जीत की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस पर्व को रूप चौदस भी कहते हैं। इस दिन सुबह तेल लगाकर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है।
मान्यता है कि इससे सुंदरता और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। नरक चतुर्दशी पर स्नान के बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। उनकी मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और फूल व प्रसाद चढ़ाएं। इसके बाद 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें।
हिंदू धर्म में दीपक को प्रकाश, आशा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। नरक चतुर्दशी पर शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा है। इस दिन दीपक जलाना अंधकार को दूर करने और सकारात्मक सोच अपनाने का प्रतीक माना जाता है।
कई परिवार घर के आंगन में भी मिट्टी के दीये जलाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि दीपदान से देवी-देवताओं की कृपा मिलने की कामना की जाती है। दीपक जलाते समय परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों और पालतू जानवरों से जलते हुए दीपक को दूर रखें।
नरक चतुर्दशी पर पूजा और दीपदान के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद करने का भी महत्व बताया गया है। धार्मिक परंपराओं में दान और सेवा को अच्छे कर्मों से जोड़ा जाता है। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या दूसरी जरूरी चीजें दी जा सकती हैं।
किसी की मदद करना केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं है। इससे समाज में सहयोग और आपसी प्रेम भी बढ़ता है। नरक चतुर्दशी का त्योहार लोगों को अच्छे विचार अपनाने और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने की सीख देता है।
नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान और पूजा करने की परंपरा है। पूजा के लिए घर में साफ-सफाई रखें। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें। शाम को घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जला सकते हैं। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों की मदद करना भी अच्छा काम है।
सबसे जरूरी बात यह है कि त्योहार को डर या अंधविश्वास से जोड़कर न देखें। नरक चतुर्दशी का महत्व धार्मिक आस्था, स्वच्छता, अच्छे व्यवहार और परिवार की खुशहाली की कामना से जुड़ा है। नरक चतुर्दशी को भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।
इस दिन किया जाने वाला अभ्यंग स्नान स्वच्छता का प्रतीक है। वहीं, दीपदान अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है। रूप चौदस के रूप में यह त्योहार बाहरी सुंदरता के साथ अच्छे विचार रखने की प्रेरणा देता है। इस तरह नरक चतुर्दशी केवल पूजा और स्नान का त्योहार नहीं है। यह अच्छे कर्म करने और जीवन में सकारात्मक बदलाव अपनाने का अवसर भी है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
नरक चतुर्दशी 2026 कब है?
| पूजा और स्नान का समय | शुभ मुहूर्त |
|---|---|
| नरक चतुर्दशी की तारीख | 8 नवंबर 2026, रविवार |
| चतुर्दशी तिथि शुरू | 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे |
| अभ्यंग स्नान मुहूर्त | सुबह 5:41 से 6:38 बजे |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 1:53 से 2:37 बजे |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 5:31 से 5:57 बजे |
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली क्यों कहते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के असुर का वध किया था। इसी घटना की याद में नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कुछ राज्यों में इसे रूप चौदस कहते हैं, जबकि कई स्थानों पर काली चौदस के नाम से मनाया जाता है।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान क्यों किया जाता है?
धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान करने से नरक के भय से मुक्ति की कामना पूरी होती है। इसे शरीर और मन की पवित्रता से भी जोड़ा जाता है। इसलिए नरक चतुर्दशी पर Abhyanga Snan का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, इससे किसी धार्मिक फल या स्वास्थ्य लाभ की गारंटी नहीं होती। यह आस्था और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान कैसे करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान की तैयारी करें।
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तिल या सरसों का तेल लें।
- तेल को शरीर पर हल्के हाथों से लगाएं।
- इसके बाद साफ पानी से स्नान करें।
- स्नान के दौरान भगवान श्रीकृष्ण या अपने आराध्य देव का स्मरण करें।
- स्वच्छ कपड़े पहनकर घर के मंदिर में पूजा करें।
- परिवार की सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
नरक चतुर्दशी पर ऐसे करें श्रीकृष्ण की पूजा
युद्ध में नरकासुर का वध कर सभी बंदी कन्याओं को मुक्त कराया। इसी जीत की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस पर्व को रूप चौदस भी कहते हैं। इस दिन सुबह तेल लगाकर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है।
मान्यता है कि इससे सुंदरता और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। नरक चतुर्दशी पर स्नान के बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। उनकी मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और फूल व प्रसाद चढ़ाएं। इसके बाद 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें।
नरक चतुर्दशी पर दीपक जलाने का क्या महत्व है?
कई परिवार घर के आंगन में भी मिट्टी के दीये जलाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि दीपदान से देवी-देवताओं की कृपा मिलने की कामना की जाती है। दीपक जलाते समय परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों और पालतू जानवरों से जलते हुए दीपक को दूर रखें।
नरक चतुर्दशी पर दान करना क्यों माना जाता है शुभ?
किसी की मदद करना केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं है। इससे समाज में सहयोग और आपसी प्रेम भी बढ़ता है। नरक चतुर्दशी का त्योहार लोगों को अच्छे विचार अपनाने और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करने की सीख देता है।
नरक चतुर्दशी पर किन बातों का ध्यान रखें?
सबसे जरूरी बात यह है कि त्योहार को डर या अंधविश्वास से जोड़कर न देखें। नरक चतुर्दशी का महत्व धार्मिक आस्था, स्वच्छता, अच्छे व्यवहार और परिवार की खुशहाली की कामना से जुड़ा है। नरक चतुर्दशी को भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।
इस दिन किया जाने वाला अभ्यंग स्नान स्वच्छता का प्रतीक है। वहीं, दीपदान अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है। रूप चौदस के रूप में यह त्योहार बाहरी सुंदरता के साथ अच्छे विचार रखने की प्रेरणा देता है। इस तरह नरक चतुर्दशी केवल पूजा और स्नान का त्योहार नहीं है। यह अच्छे कर्म करने और जीवन में सकारात्मक बदलाव अपनाने का अवसर भी है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
- नरक चतुर्दशी 2026 कब मनाई जाएगी?
नरक चतुर्दशी 2026 में 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। - नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान कैसे करें?
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान के लिए सुबह जल्दी उठकर अपने शरीर पर तिल या सरसों का तेल लगाएं और फिर साफ पानी से स्नान करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। - नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली क्यों कहा जाता है?
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह दीपोत्सव के दिनों में मनाई जाती है और इस दिन लोग घर की सफाई करते हुए दीपक जलाते हैं।
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