पुष्कर कुंभ 2025: 12 साल बाद बद्रीनाथ धाम के पास होगा ऐतिहासिक मेला, जानें इसका महत्व

Kaushiki | Apr 22, 2025, 16:48 IST
पुष्कर कुंभ 2025
पुष्कर कुंभ 15 मई से 25 मई 2025 तक बद्रीनाथ के पास माणा गांव में आयोजित होगा, जो 12 साल बाद हो रहा है। इस कुंभ में दक्षिण भारत के आचार्य और सरस्वती नदी का ऐतिहासिक महत्व जुड़ा हुआ है, जहां वेदव्यास ने महाभारत की रचना की थी।

बदरीनाथ में सरस्वती नदी के उद्गम स्थल पर आयोजित होने वाला 'पुष्कर कुंभ' इस बार खास होने वाला है क्योंकि, यह 12 साल बाद आयोजित हो रहा है। यह पवित्र कुंभ 15 मई से शुरू होगा और 25 मई तक चलेगा। इस दौरान दक्षिण भारत के सैकड़ों आचार्य भी इसमें शामिल होंगे। माणा गांव में स्थित सरस्वती नदी का महत्व भी इस आयोजन से जुड़ा हुआ है, जहां वेदव्यास ने महाभारत की रचना की थी।



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पुष्कर कुंभ का धार्मिक महत्व

पुष्कर कुंभ का आयोजन 12 साल में एक बार होता है और यह खास तौर पर मिथुन राशि में बृहस्पति के प्रारंभ पर आयोजित किया जाता है। माना जाता है कि यहीं पर वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना की थी और सरस्वती नदी के शोर से परेशान होकर उन्होंने इस स्थान को चुना था। इस धार्मिक स्थल से जुड़ी परंपराएं आज भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।



तो ऐसे में इस बार, यह कुंभ वेदव्यास के महाभारत रचनास्थल पर मनाया जा रहा है, जो एक ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। दक्षिण भारत के आचार्य इस पर्व में भाग लेने के लिए हर 12 साल में यहां आते हैं और इस मौके पर सरस्वती नदी के उद्गम स्थल पर पूजा-अर्चना करते हैं। यह भी माना जाता है कि वेदव्यास जी ने यहां केशव प्रयाग में अपनी तपस्या के दौरान महाभारत की रचना की थी। इस अवसर पर दक्षिण भारत के प्रमुख शंकराचार्य भी इस आयोजन में हिस्सा लेते हैं।



बद्रीनाथ मंदिर समिति की तैयारियां

बता दें कि, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इस आयोजन के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। यहां की सड़कें दुरुस्त की जा रही हैं और लॉज एवं ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया भी चालू हो चुकी है। इस आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का प्रबंध किया जाएगा ताकि वे कुंभ के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी से बच सकें।



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अक्षय तृतीया के बाद शुरू होने वाली यात्रा

इसके अलावा, 2025 में चारधाम यात्रा का भी आगाज होने जा रहा है। 30 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद यात्रा शुरू होगी। 2 मई को बाबा केदार के कपाट खोलने के साथ बदरीनाथ के कपाट भी 4 मई को खोले जाएंगे।



आचार्य और दक्षिण भारत की परंपरा

पुष्कर कुंभ के आयोजन में दक्षिण भारत के प्रमुख आचार्य, जैसे शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और माधवाचार्य, प्रत्येक 12 साल में एक बार यहां ज्ञान प्राप्ति के लिए आते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और वेदव्यास की तपस्थली पर आचार्य अपनी पूजा अर्चना करते हैं।



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