2026 सूर्य का साल, जानें इस साल कब-कब कम हो जाएगी सूर्य की शक्ति

साल 2026 सूर्य का वर्ष है। राहु-केतु के प्रभाव और ग्रहण के बीच सूर्य को मजबूत करने के लिए अर्घ्य, रविवार व्रत और गायत्री मंत्र के उपाय अपनाएं।

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Kaushiki
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Latest Religious News: आज नए साल की पहली सुबह है और दुनियाभर में उत्साह का माहौल है। अंक ज्योतिष के हिसाब से देखें तो 2026 का कुल योग 1 (2+0+2+6=10, 1+0=1) आता है। ज्योतिष शास्त्र में नंबर 1 का स्वामी सूर्य को माना जाता है।

इसलिए विद्वान इसे सूर्य का वर्ष कह रहे हैं। इसमें सूर्य का प्रभाव चरम पर होगा। इससे लीडरशिप, नाम और शोहरत के नए रास्ते खुलेंगे। ये साल नई शुरुआत और आत्मविश्वास के साथ चमकने का है। आइए जानें...

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सूर्य देव पर राहु और केतु का प्रभाव

इस साल सूर्य देव को कुछ क्रूर ग्रहों की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। 13 फरवरी 2026 को सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे जहां पहले से राहु बैठा है। राहु और सूर्य की यह युति सूर्य के तेज को काफी हद तक कम कर देगी।

इसी तरह 17 अगस्त को सिंह राशि में केतु के साथ सूर्य की युति बनेगी। केतु के साथ होने से सूर्य का आत्मबल और प्रभाव समाज में कुछ कमजोर पड़ सकता है।

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मीन और धनु खरमास की अवधि

ज्योतिष शास्त्र में साल 2026 में दो बार खरमास का समय आएगा जब शुभ कार्य वर्जित होंगे। 15 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे जिससे मीन खरमास शुरू हो जाएगा। 

इसके बाद साल के अंत में 16 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में लौटेंगे। खरमास के दौरान सूर्य की शक्ति क्षीण मानी जाती है। इसलिए विवाह जैसे संस्कार नहीं होते।

सूर्य - विकिपीडिया

तुला राशि में नीच के होंगे सूर्य

ज्योतिष में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना जाता है जहां वे कमजोर होते हैं। 17 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे और काफी कमजोर स्थिति में रहेंगे।

इस अवधि में लोगों को मान-सम्मान की कमी और सेहत संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। नीच का सूर्य आत्मविश्वास को कम करता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी जरूरी है।

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2026 के दो मुख्य सूर्य ग्रहण

इस सूर्य वर्ष में दो सूर्य ग्रहण भी लगने वाले हैं जो ज्योतिषीय महत्व रखते हैं। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा और दूसरा ग्रहण 12 अगस्त को होने वाला है।

हालांकि ये दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे और न सूतक मान्य होगा। फिर भी ब्रह्मांडीय ऊर्जा के अनुसार ग्रहण के समय सूर्य का प्रभाव काफी कम हो जाता है।

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सूर्य देव को प्रसन्न करने के 7 ज्योतिषीय उपाय

साल 2026 (New Year 2026) 'सूर्य का वर्ष' है। इसलिए ग्रहों के राजा को प्रसन्न रखने और उनकी कमजोर स्थिति के प्रभाव से बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ये अचूक उपाय बहुत लाभकारी रहेंगे:

  • तांबे के पात्र से अर्घ्य देना: 

    प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, कुमकुम और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल देते समय अपनी दृष्टि जल की धारा में रखें ताकि सूर्य की किरणें आप पर सकारात्मक प्रभाव डालें।

  • आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ: 

    यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है या राहु-केतु से पीड़ित है। तो रोज आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। यह पाठ आत्मविश्वास बढ़ाने और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए सबसे शक्तिशाली माना जाता है।

  • रविवार का व्रत और नमक का त्याग: 

    सूर्य की शक्ति बढ़ाने के लिए रविवार का व्रत रखें। इस दिन विशेष रूप से भोजन में नमक का प्रयोग न करें और केवल मीठा भोजन या फलाहार ग्रहण करें।

  • लाल वस्तुओं का दान: 

    सूर्य के कमजोर होने की स्थिति में रविवार के दिन गेहूं, तांबा, गुड़ और लाल मसूर की दाल का दान करें। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को ये वस्तुएं दान करने से सूर्य का दोष दूर होता है।

  • गायत्री मंत्र का जाप: 

    प्रतिदिन कम से कम 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करें। गायत्री मंत्र सूर्य की ऊर्जा का ही स्वरूप है। ये बुद्धि को प्रखर करता है और मानसिक तनाव को दूर रखता है।

  • पिता का सम्मान और आशीर्वाद: 

    ज्योतिष में सूर्य को पिता का कारक माना गया है। सूर्य की शुभता पाने के लिए अपने पिता और घर के बुजुर्गों का सम्मान करें। रोज सुबह उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

  • माणिक्य या तांबे का छल्ला: 

    अगर सूर्य बहुत अधिक नीच स्थिति में है, तो किसी जानकार ज्योतिषी से परामर्श कर 'माणिक्य' (Ruby) रत्न धारण करें। यदि रत्न नहीं पहन सकते, तो अनामिका अंगुली में तांबे का छल्ला पहनना भी बहुत शुभ रहता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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