उज्जैन की वैश्य टेकरी में 90 साल बाद फिर खुदाई की तैयारी, सांची से बड़ा बौद्ध स्तूप मिलने की उम्मीद
Kaushiki | Oct 22, 2026, 15:26 IST
90 साल बाद फिर खुलेगा वैश्य टेकरी का राज
Archaeologists believe a Buddhist stupa larger than Sanchi may lie beneath Vaishya Tekri in Ujjain. Fresh excavation is planned about 90 years after the first dig.
उज्जैन सिर्फ महाकाल की नगरी नहीं है। यहां एक टीले के नीचे बौद्ध इतिहास दबा होने की उम्मीद है। वैश्य टेकरी की खुदाई करीब 90 साल बाद फिर होने जा रही है। माना जा रहा है कि टीले के नीचे सांची से बड़ा बौद्ध स्तूप दबा है। इसके लिए 15 हेक्टेयर निजी जमीन लेनी होगी। खर्च करीब 40 करोड़ रुपए अनुमान लगाया गया है।
वैश्य टेकरी में क्या है उम्मीद
सांची का स्तूप विश्व धरोहर स्थल है। अब तक उज्जैन को हिंदू तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है। इस उज्जैन में स्तूप की खोज से शहर की नई पहचान बन सकती है। बौद्ध अनुयायियों के केंद्र के रूप में भी इसकी साख मजबूत हो सकती है।
90 साल पहले क्या मिला था
ऊंचाई करीब 100 फीट आंकी गई। उस खुदाई में बड़ी ईंटें मिली थीं। छोटे स्तूप भी मिले थे। साथ में 32 मानव कंकालों के अवशेष भी मिले। ये कंकाल कोलकाता में भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (Anthropological Survey of India) के म्यूजियम में रखे हैं।
सांची से कितना बड़ा हो सकता है
अशोका यूनिवर्सिटी में इतिहास की प्रोफेसर इस तुलना को जरूरी नहीं मानतीं। उनके मुताबिक बड़ी ईंटें मौर्य काल की ओर इशारा करती हैं। संभव है कि इसमें सांची जैसी पत्थरों की भव्यता न हो।
अशोक और देवी का कनेक्शन
माना जाता है कि स्तूप बनाने में देवी की भूमिका रही होगी। सांची में भी ऐसा ही माना जाता है। वैश्य टेकरी नाम का संबंध उसी व्यापारी समुदाय से बताया जाता है। इसी आधार पर स्तूप को ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के आसपास का माना जा सकता है।
सिर्फ स्तूप नहीं और भी राज
खुदाई में क्या है अड़चन
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने केंद्रीय संस्कृति सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में केंद्र से मदद मांगी गई है। यानी एएसआई उज्जैन खुदाई की राह अब केंद्र की मंजूरी पर टिकी है। 90 साल पुराने निष्कर्षों पर सरकार का ध्यान अब जाकर गया है।
पर्यटन को क्या फायदा होगा
FAQs:
- वैश्य टेकरी में बौद्ध स्तूप की खोज क्यों महत्वपूर्ण है?
वैश्य टेकरी में बौद्ध स्तूप की खोज उज्जैन की नई पहचान बनाने में मदद कर सकती है और इसे बौद्ध अनुयायियों के लिए एक प्रमुख केंद्र बना सकती है। - वैश्य टेकरी के स्तूप की ऊंचाई सांची के स्तूप से कैसे तुलना की जा सकती है?
वैश्य टेकरी का स्तूप लगभग 100 फीट ऊंचा है, जबकि सांची का सबसे ऊंचा स्तूप 54 फीट है, जिससे वैश्य टेकरी का स्तूप सांची से लगभग दो गुना अधिक ऊंचा होने की संभावना है। - उज्जैन में खुदाई के लिए क्या चुनौतियां सामने आ रही हैं?
उज्जैन का यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का प्रोटेक्टेड साइट है और खुदाई के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी, जिसके लिए लगभग 40 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
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