धनतेरस पर क्यों जलाया जाता है यम दीपक, जानें यम दीया जलाने की पूरी विधि और यमलोक तक प्रकाश पहुंचाने का रहस्य

Kaushiki | Oct 04, 2025, 12:22 IST
Share
Yam Deepak on Dhanteras
Yam Deepak on Dhanteras

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी यानी धनतेरस पर मृत्यु के देवता यमराज के लिए दीपक जलाया जाता है। जानें यम का दीया जलाने की सही तिथि, दक्षिण दिशा में दीया रखने के नियम और महत्व।

यम दीपक: हिन्दू धर्म में दीपावली का पांच दिवसीय उत्सव न केवल प्रकाश का पर्व है बल्कि यह जीवन, स्वास्थ्य और आयु की कामना का भी त्योहार है। इन पांच दिनों की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसी दिन शाम को एक विशेष दीपक जलाया जाता है, जिसे यम का दीया या यम दीपक कहा जाता है।

यह दीपक मृत्यु के देवता यमराज को समर्पित होता है। इस परंपरा का गहरा धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि यम के नाम से दीया जलाने से घर के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और पूरे परिवार को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

यह दीया घर के अंधकार को दूर करने के साथ-साथ परिवार के जीवन पर आने वाले संकटों को भी हर लेता है। 2025 में यह पवित्र दीप दान 18 अक्टूबर, 2025 को किया जाएगा। आइए, इस विशेष दिन से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी को विस्तार से जानते हैं।

यम दीपक 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

यम का दीया हमेशा कार्तिक मास (kartik mahina) के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर जलाया जाता है, जिसे हम आम भाषा में धनतेरस कहते हैं। इस दीप दान का काम संध्याकाल या प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है।

  • 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार)
    यम दीपक जलाया जाएगा। यह दिन धनतेरस के रूप में भी मनाया जाता है।
  • त्रयोदशी तिथि का समय
    त्रयोदशी तिथि का आरंभ - 18 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर होगा।
    त्रयोदशी तिथि का समापन - 19 अक्टूबर 2025 को दोपहर 01 बजकर 51 मिनट पर होगा।
  • दीप दान का शुभ समय
    यम का दीप दान हमेशा संध्याकाल में करना शुभ माना जाता है। शुभ समय के लिए आपको अपने स्थानीय पंचांग के मुताबिक सूर्यास्त का समय देखना होगा।
त्रयोदशी तिथि का अधिकतर हिस्सा 18 अक्टूबर को है और दीपावली के उत्सव में धनतेरस का पर्व भी इसी दिन मनाया जाता है, इसलिए यम दीपक 2025 भी इसी दिन जलाया जाएगा।

ये खबर भी पढ़ें...

दीवाली, छठ और तुलसी विवाह कब? जानें कार्तिक मास 2025 के 10 सबसे बड़े पर्वों की लिस्ट और पूजा विधि

क्यों जलाया जाता है यम का दीया

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, यम दीपक जलाने की परंपरा का संबंध यमराज से है।

दीवाली के पहले क्यों और कैसे होती है यमराज की पूजा

यम दीपक जलाने की परंपरा का कारण एक पौराणिक कथा में छिपा है। एक समय राजा हंस का पुत्र था, जिसके विवाह के चौथे दिन ही सांप के काटने से उसकी मृत्यु निश्चित थी।

उसकी नवविवाहित पत्नी ने अपनी सूझबूझ से पति को यमराज से बचा लिया। उसने अपने घर के चारों ओर और दरवाजे पर खूब सारे दीपक जलाए, जिनकी रोशनी से यमदूतों का मार्ग भ्रमित हो गया और वे उसके पति के प्राण हरण किए बिना ही लौट गए।

इस घटना के बाद, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को यमराज को दीप दान करने की परंपरा शुरू हुई। इस दीप दान का उद्देश्य परिवार को अकाल मृत्यु के भय से बचाना और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त करना है।

दीया हमेशा घर के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया जाता है। इस दिन यमराज के लिए दीया जलाकर एक तरह से उन्हें दीप दान किया जाता है। माना जाता है कि यह दीया यमदूतों को मार्ग दिखाता है और उन्हें प्रसन्न करता है, जिससे वे उस घर के सदस्यों को कष्ट नहीं देते।

यम दीपक जलाने के नियम

यम का दीया जलाते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है। इन नियमों का पालन करने से ही दीप दान का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

दीया कैसा होना चाहिए

चौमुखी दीपक:

मान्यता के मुताबिक, यम दीपक हमेशा चौमुखी होना चाहिए, यानी उसमें चार बत्तियां लगाई जाती हैं। यह चारों दिशाओं से परिवार पर आने वाले संकटों को दूर करने का प्रतीक है।

इस दीये में सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है। सरसों का तेल शनि देव और स्वास्थ्य से भी संबंधित माना जाता है। दीया मिट्टी का या आटे से बनाया हुआ होना चाहिए। आटे का दीया सबसे शुद्ध और शुभ माना जाता है।

ये खबर भी पढ़ें...

Sharad Purnima 2025: 6 अक्टूबर को चंद्रमा बरसाएगा अमृत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और 16 कलाओं का रहस्य

यम का दीया कहां और किस दिशा में रखें

मान्यता के मुताबिक, यह दीया हमेशा घर के बाहर जलाया जाता है न कि घर के अंदर। इसे घर के मुख्य द्वार पर या दहलीज पर रखना चाहिए। कुछ लोग इसे नाली के पास या कूड़े के ढेर के पास भी रखते हैं, जो जीवन की नश्वरता को दर्शाता है लेकिन मुख्य नियम इसे मुख्य द्वार के बाहर रखने का है।

दिशा

यम का दीया हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाना चाहिए। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इस दिशा में दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सभी भयों से मुक्ति मिलती है। दीये का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए, ताकि उसका प्रकाश यमलोक की ओर जाए।

दीप दान की विधि और प्रार्थना

  • धनतेरस की शाम को स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • एक चौमुखी दीया लें, उसमें सरसों का तेल और चार बत्तियां लगाएं।
  • दीया जलाते समय हाथ जोड़कर यह प्रार्थना करनी चाहिए:
    "मृत्युनां दण्डपाशाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति।"
    अर्थ: "त्रयोदशी के इस दीप दान से मृत्यु के बंधन से मुक्त करने वाले, काल और देवी श्यामा के साथ रहने वाले सूर्यपुत्र यमराज मुझ पर प्रसन्न हों।"
  • दीया जलाने के बाद, उसे घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दें। इस दीये को रखने के बाद इसे वापस पलटकर नहीं देखना चाहिए।
यह यमराज पूजा दीप दान परिवार के सभी सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और पूरे दीपावली उत्सव के लिए शुभ वातावरण तैयार करता है। why and how Yamraj is worshiped before Diwali

ये खबर भी पढ़ें...

Karwa Chauth 2025: कब है सुहागिनों का सबसे बड़ा पर्व करवा चौथ? जानें कथा, पूजा विधि और चंद्र दर्शन का समय

October vrat tyohar 2025: दीपावली, छठ पूजा, करवा चौथ, यहां देखें अक्टूबर 2025 के सभी व्रत-त्योहारों की लिस्ट

Tags:
  • दीपावली
  • why and how Yamraj is worshiped before Diwali
  • दीवाली के पहले क्यों और कैसे होती है यमराज की पूजा
  • kartik mahina
  • कार्तिक मास
  • यमराज पूजा
  • यम का दीया
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग