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Big decision of CBSE: सीबीएसई बोर्ड अब शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा डिजिटल बदलाव लाने जा रहा है। 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए अब ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है। इस बार 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 तक होंगी।
इस नए सिस्टम के तहत 17 लाख से ज्यादा छात्रों की लगभग एक करोड़ कॉपियों को हाई-टेक तरीके से स्कैन किया जाएगा। ये सिस्टम न सिर्फ मैन्युअल टोटलिंग की गलतियों को खत्म करेगा, बल्कि रिजल्ट प्रोसेस को भी बहुत तेज कर देगा। अब छात्रों को समय पर और सही नतीजे मिलेंगे, और ट्रांसपेरेंसी के साथ जीरो-एरर का फायदा मिलेगा।
क्या है ये नया ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम
सीबीएसई 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 के बीच होनी हैं। बोर्ड (सीबीएसई गाइडलाइन) ने तय किया है कि करीब 17 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों की एक करोड़ कॉपियों को स्कैन किया जाएगा।
इन कॉपियों के लगभग 32 करोड़ पन्नों को कंप्यूटर पर अपलोड किया जाएगा। फिर टीचर्स इन्हें पेन-पेपर के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर ही चेक करेंगे। इससे टीचर्स अब घर बैठे या स्कूल के कंप्यूटर लैब में डिजिटल इवैल्यूएशन कर सकेंगे।
ये हाई-टेक सिस्टम (12 th cbse exam) मैन्युअल टोटलिंग की गलतियों को खत्म करेगा। इससे रिजल्ट प्रोसेस भी काफी सुपरफास्ट हो जाएगा। हालांकि, 10वीं क्लास की कॉपियां पहले की तरह ही मैनुअल तरीके से जांची जाएंगी।
कैसे होगी आपकी कॉपी की डिजिटल जांच
ऑफलाइन परीक्षा: सीबीएसई बोर्ड परीक्षामेंछात्र पहले की तरह एग्जाम हॉल में पेन से उत्तर लिखेंगे।
हाई-टेक स्कैनिंग: स्कूल के कंप्यूटर लैब में हर पन्ने की डिजिटल इमेज बनेगी।
यूनिक कोड सिस्टम: हर कॉपी को एक खास कोड मिलेगा, जिससे छात्र की पहचान छिपी रहेगी।
टीचर का लॉगिन: टीचर्स अपनी ओएसिस (Oasis) आईडी से पोर्टल पर लॉगिन करेंगे।
डिजिटल मार्किंग: स्क्रीन पर कॉपी खुलेगी और शिक्षक हर सवाल के लिए बगल में नंबर देंगे।
ऑटोमेटेड टोटलिंग: सिस्टम खुद-ब-खुद नंबरों को जोड़ देगा। इससे कैलकुलेशन की कोई गलती नहीं होगी।
डायरेक्ट डेटाबेस: चेक होने के बाद नंबर सीधे सीबीएसई के रिजल्ट सर्वर पर पहुंच जाएंगे।
छात्रों और शिक्षकों को इससे क्या फायदा होगा
सीबीएसई के एग्जामिनेशन कंट्रोलर संयम भारद्वाज के मुताबिक, इस सिस्टम से कई बड़े सुधार होंगे।
सबसे पहले कॉपियों को एक शहर से दूसरे शहर भेजने का समय और पैसा बचेगा।
दूसरा, टोटलिंग में होने वाली मानवीय गलतियां (Human Errors) पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।
सबसे जरूरी बात ये है कि इवैल्यूएशन प्रोसेस बहुत तेज हो जाएगी।
इससे समय पर रिजल्ट घोषित किए जा सकेंगे और छात्रों का फ्यूचर सिक्योर्ड रहेगा।
स्कूलों के लिए नई चुनौतियां
इस नई व्यवस्था के लिए सीबीएसई (सीबीएसई बोर्ड का निर्णय) ने सभी 32 हजार स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं। हर स्कूल में एक एडवांस कंप्यूटर लैब होना अनिवार्य कर दिया गया है।
वहां कम से कम 2 एमबीपीएस की इंटरनेट स्पीड और बिजली का बैकअप होना जरूरी है। शिक्षकों को इसके लिए विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे बिना किसी तकनीकी परेशानी के कॉपियां जांच सकें।
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