TV पर संसद की कार्यवाही देखते समय उलझाते हैं ये शब्द, उदाहरणों के साथ समझे मतलब
Kaushiki | Aug 18, 2026, 12:30 IST
Indian Parliament Rules
संसद सत्र के दौरान टीवी पर कई कठिन शब्द सुनाई देते हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल, तारांकित प्रश्न और स्थगन प्रस्ताव जैसे शब्दों से ही संसद चलती है। इन शब्दों के सरल अर्थ और नियमों को समझकर कोई भी देश की राजनीति को आसानी से समझ सकता है।
Indian Parliament Rules: जब भी टीवी पर पार्लियामेंट सेशन लाइव चलता है, तो हमें कई भारी-भरकम शब्द सुनाई देते हैं। कई बार समाचारों में भी प्रश्नकाल, शून्यकाल या प्रस्ताव पास होने की खबरें आती हैं। आम बोलचाल में हम इन शब्दों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते हैं।
इसलिए बहुत से लोगों को इनका सही मतलब समझ नहीं आता है। लेकिन सच्चाई यह है कि इन शब्दों के जरिए ही हमारे देश का पूरा कामकाज चलता है। देश के नए कानून बनने से लेकर जनता की समस्याओं को उठाने तक इन्हीं नियमों का पालन किया जाता है।
संसद हमारे लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर मानी जाती है। यहां देशभर से चुनकर आए सांसद जनता की आवाज बनते हैं। वे सरकार से सवाल पूछते हैं और देश के विकास के लिए नीतियां बनाते हैं। संसद की इस कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए कुछ तय नियम और समय बनाए गए हैं। इन्हीं नियमों को अलग-अलग तकनीकी शब्दों से जाना जाता है।
ऐसे में अगर आप एक जागरूक नागरिक हैं, तो आपको इन शब्दों का मतलब जरूर पता होना चाहिए। जब आप इनका मतलब समझ जाएंगे, तो आपको संसद की खबरें देखना और भी ज्यादा रोचक लगेगा। आप आसानी से समझ पाएंगे कि पार्लियामेंट हाउस के अंदर क्या कर रहे हैं और सरकार कैसे जवाब दे रही है। आइए, संसद से जुड़े ऐसे ही कुछ शब्दों को उदाहरण के साथ समझते हैं।
![Indian Parliament Rules]()
प्रश्नकाल (
प्रश्नकाल सदन की बैठक का पहला घंटा होता है। इस दौरान सांसद सीधे सरकार से सवाल पूछते हैं। संबंधित विभाग के मंत्री उनका तुरंत उत्तर देते हैं। जनता के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का ये तरीका है। इस दौरान देश के विकास से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।
उदाहरण: मान लीजिए आपके इलाके में नई हाईवे रोड बन रही है, लेकिन काम बहुत धीमा है। तो आपके सांसद प्रश्नकाल में सीधे सड़क परिवहन मंत्री से पूछ सकते हैं कि "इस रोड का काम कब तक पूरा होगा?" मंत्री को तुरंत इसका जवाब देना होता है।
प्रश्नकाल के ठीक बाद का समय शून्यकाल कहलाता है। इसमें सांसद बिना पूर्व सूचना तुरंत मुद्दे उठाते हैं। यह समय जनहित के जरूरी मामलों के लिए होता है। यह व्यवस्था भारत की अपनी अनोखी संसदीय देन है। यह किसी लिखित नियम का हिस्सा नहीं बल्कि परंपरा है।
उदाहरण: मान लीजिए देश के किसी हिस्से में अचानक भारी बाढ़ आ गई या कोई बड़ा हादसा हो गया। सांसद इसके लिए 10 दिन पहले से नोटिस नहीं दे सकते। इसलिए वे शून्यकाल में इस अर्जेंट मुद्दे को तुरंत उठाकर सरकार से मदद की मांग करते हैं।
![प्रश्नकाल क्या होता है, जिसके संसद सत्र में ना होने को लेकर उठ रहे हैं सवाल - BBC News हिंदी]()
ऐसे सवाल जिनका जवाब मंत्री बोलकर सदन में देते हैं। इन सवालों के ऊपर स्टार (★) बना होता है। जवाब मिलने के बाद सांसद सप्लीमेंट्री क्वेश्चन पूछ सकते हैं।सदन में इस पर आमने-सामने बहस देखने को मिलती है। यह नीतिगत फैसलों की गहराई जानने का जरिया है।
उदाहरण: सांसद ने मंत्री से पूछा कि "देश में इस साल कितने नए सरकारी स्कूल खुले?" मंत्री ने खड़े होकर जवाब दिया, "100 स्कूल खुले।" इसके बाद सांसद तुरंत एक और पूरक सवाल (Follow-up Question) पूछ सकते हैं कि "उनमें से आपके राज्य में कितने खुले?"
ऐसे सवाल जिनका जवाब मंत्री लिखित रूप में देते हैं। इन प्रश्नों पर स्टार का निशान नहीं लगाया जाता है। लिखित उत्तर मिलने के कारण आगे सवाल नहीं पूछ सकते। यह कागजी जानकारी और आंकड़े जुटाने के लिए उपयोगी है। इससे सदन का समय बचता है और डेटा मिल जाता है।
उदाहरण: अगर किसी सांसद को देश के सभी 28 राज्यों में पिछले पांच सालों का रेलवे बजट और खर्च का पूरा डेटा चाहिए, तो वह अतारांकित प्रश्न पूछेगा। मंत्री इसका लिखित चार्ट/डॉक्यूमेंट टेबल पर रख देंगे। इस पर आगे कोई आमने-सामने बहस नहीं होती।
किसी बहुत गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए यह आता है। सदन का पूर्व निर्धारित कामकाज रोकने का यह प्रस्ताव है। इसे लाने के लिए अध्यक्ष की मंजूरी जरूरी होती है। यह देश की किसी बड़ी आपात घटना (Emergency incident) पर लाया जाता है। सदन का सारा ध्यान उस एक मुद्दे पर टिक जाता है।
उदाहरण: मान लीजिए देश की सीमा पर कोई बहुत बड़ा सुरक्षा संकट खड़ा हो गया या कोई बड़ा राष्ट्रीय आपातकाल आ गया। तब सांसद कहेंगे कि "बाकी सारे सामान्य काम और बिल रोकिए, पहले इस गंभीर संकट पर बात करते हैं।"
जनहित के किसी जरूरी मुद्दे पर ये प्रस्ताव लाते हैं। इसके जरिए मंत्री का ध्यान समस्या की तरफ खींचते हैं। मंत्री इस पर सदन में अपना ऑफिसियल स्टेटमेंट देते हैं। इसके लिए सदन का काम रोकना बिल्कुल जरूरी नहीं है। यह कम समय में सरकारी रुख जानने का जरिया है।
उदाहरण: किसी राज्य में अचानक खाद (Fertilizer) की भारी किल्लत हो गई और किसान परेशान हैं। सांसद ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाकर कृषि मंत्री का ध्यान इस समस्या पर लाते हैं ताकि मंत्री इस पर अपना ऑफिशियल बयान दें।
यह प्रस्ताव सांसदों के अधिकारों की रक्षा करता है। जब कोई मंत्री गलत या झूठी जानकारी देता है। या सदन के नियमों का उल्लंघन किया जाता है। तब सांसद मंत्री के खिलाफ यह प्रस्ताव ला सकते हैं। यह संसदीय गरिमा को बनाए रखने के लिए होता है।
उदाहरण: अगर किसी मंत्री ने सदन में दावा किया कि "देश में किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई", लेकिन असल में आंकड़े कुछ और थे। तो दूसरे सांसद मंत्री के खिलाफ यह आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार प्रस्ताव ला सकते हैं कि उन्होंने सदन को गुमराह किया है।
सदन की कार्यवाही नियमों के हिसाब से चलनी चाहिए। जब किसी सांसद को लगता है नियम टूट रहा है। तब वह कार्य व्यवस्था का प्रश्न उठा सकता है। वह पीठासीन अधिकारी का ध्यान नियम की तरफ खींचता है। इसके बाद अध्यक्ष उस पर अपना फैसला सुनाते हैं।
उदाहरण: जैसे किसी गेम में जब कोई प्लेयर फाउल करता है तो रेफरी सीटी बजाता है। ठीक वैसे ही, अगर बहस के दौरान कोई सांसद ऐसा शब्द या तरीका इस्तेमाल करता है जो संसद के नियमों के खिलाफ है, तो दूसरा सांसद 'Point of Order' उठाकर स्पीकर का ध्यान खींचता है। फिर स्पीकर नियम के मुताबिक फैसला सुनाते हैं।
तो इन संसदी शब्दों को समझकर आप भारत के लोकतंत्र और उसकी कार्यवाही को और भी बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। टीवी पर live debate या संसद सत्र देखते समय अब ये कठिन शब्द आपको बिल्कुल भी नहीं उलझाएंगे।
भारतीय संसद को स्मूथली चलाने के लिए एक साल में मेनली 3 सेशंस (Parliament Sessions) आयोजित किए जाते हैं।
यह संसद का सबसे पहला, सबसे लंबा और सबसे महत्वपूर्ण सत्र होता है, जो आमतौर पर जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत से लेकर मई तक चलता है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य देश का वार्षिक केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश करना और उस पर चर्चा करके उसे पारित करना होता है। इसमें देश की आर्थिक नीतियों, करों (Taxes) और सरकारी खर्चों पर विस्तार से बहस होती है।
यह संसद का दूसरा सत्र होता है, जो मानसून के मौसम यानी जुलाई से शुरू होकर अगस्त तक चलता है। बजट सत्र के बाद यह देश के सामयिक और तात्कालिक ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करने का प्रमुख मंच बनता है। इस सत्र में सरकार कई नए महत्वपूर्ण विधेयकों (Bills) को सदन में पेश करती है और उन्हें कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है।
यह साल का अंतिम और सबसे छोटा सत्र होता है, जो आमतौर पर नवंबर के मध्य या दिसंबर से शुरू होकर साल के अंत तक चलता है। इस सत्र में उन विधेयकों पर काम पूरा किया जाता है जो पिछले सत्रों में लंबित रह गए थे या जिन्हें जल्द से जल्द पारित कराना जरूरी होता है। कम समय का होने के बावजूद इसमें देश के सुरक्षा, विदेश नीति और प्रशासनिक मामलों पर गंभीर चर्चाएं होती हैं।
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इसलिए बहुत से लोगों को इनका सही मतलब समझ नहीं आता है। लेकिन सच्चाई यह है कि इन शब्दों के जरिए ही हमारे देश का पूरा कामकाज चलता है। देश के नए कानून बनने से लेकर जनता की समस्याओं को उठाने तक इन्हीं नियमों का पालन किया जाता है।
संसद हमारे लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर मानी जाती है। यहां देशभर से चुनकर आए सांसद जनता की आवाज बनते हैं। वे सरकार से सवाल पूछते हैं और देश के विकास के लिए नीतियां बनाते हैं। संसद की इस कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए कुछ तय नियम और समय बनाए गए हैं। इन्हीं नियमों को अलग-अलग तकनीकी शब्दों से जाना जाता है।
ऐसे में अगर आप एक जागरूक नागरिक हैं, तो आपको इन शब्दों का मतलब जरूर पता होना चाहिए। जब आप इनका मतलब समझ जाएंगे, तो आपको संसद की खबरें देखना और भी ज्यादा रोचक लगेगा। आप आसानी से समझ पाएंगे कि पार्लियामेंट हाउस के अंदर क्या कर रहे हैं और सरकार कैसे जवाब दे रही है। आइए, संसद से जुड़े ऐसे ही कुछ शब्दों को उदाहरण के साथ समझते हैं।
Indian Parliament Rules
प्रश्नकाल (Question Hour )
उदाहरण: मान लीजिए आपके इलाके में नई हाईवे रोड बन रही है, लेकिन काम बहुत धीमा है। तो आपके सांसद प्रश्नकाल में सीधे सड़क परिवहन मंत्री से पूछ सकते हैं कि "इस रोड का काम कब तक पूरा होगा?" मंत्री को तुरंत इसका जवाब देना होता है।
शून्यकाल (Zero Hour)
उदाहरण: मान लीजिए देश के किसी हिस्से में अचानक भारी बाढ़ आ गई या कोई बड़ा हादसा हो गया। सांसद इसके लिए 10 दिन पहले से नोटिस नहीं दे सकते। इसलिए वे शून्यकाल में इस अर्जेंट मुद्दे को तुरंत उठाकर सरकार से मदद की मांग करते हैं।
प्रश्नकाल क्या होता है, जिसके संसद सत्र में ना होने को लेकर उठ रहे हैं सवाल - BBC News हिंदी
तारांकित प्रश्न (Starred Questions)
उदाहरण: सांसद ने मंत्री से पूछा कि "देश में इस साल कितने नए सरकारी स्कूल खुले?" मंत्री ने खड़े होकर जवाब दिया, "100 स्कूल खुले।" इसके बाद सांसद तुरंत एक और पूरक सवाल (Follow-up Question) पूछ सकते हैं कि "उनमें से आपके राज्य में कितने खुले?"
अतारांकित प्रश्न (Unstarred Questions)
उदाहरण: अगर किसी सांसद को देश के सभी 28 राज्यों में पिछले पांच सालों का रेलवे बजट और खर्च का पूरा डेटा चाहिए, तो वह अतारांकित प्रश्न पूछेगा। मंत्री इसका लिखित चार्ट/डॉक्यूमेंट टेबल पर रख देंगे। इस पर आगे कोई आमने-सामने बहस नहीं होती।
स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion)
उदाहरण: मान लीजिए देश की सीमा पर कोई बहुत बड़ा सुरक्षा संकट खड़ा हो गया या कोई बड़ा राष्ट्रीय आपातकाल आ गया। तब सांसद कहेंगे कि "बाकी सारे सामान्य काम और बिल रोकिए, पहले इस गंभीर संकट पर बात करते हैं।"
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion)
उदाहरण: किसी राज्य में अचानक खाद (Fertilizer) की भारी किल्लत हो गई और किसान परेशान हैं। सांसद ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाकर कृषि मंत्री का ध्यान इस समस्या पर लाते हैं ताकि मंत्री इस पर अपना ऑफिशियल बयान दें।
विशेषाधिकार प्रस्ताव (Privilege Motion)
उदाहरण: अगर किसी मंत्री ने सदन में दावा किया कि "देश में किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई", लेकिन असल में आंकड़े कुछ और थे। तो दूसरे सांसद मंत्री के खिलाफ यह आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार प्रस्ताव ला सकते हैं कि उन्होंने सदन को गुमराह किया है।
कार्य व्यवस्था का प्रश्न (Point of Order)
उदाहरण: जैसे किसी गेम में जब कोई प्लेयर फाउल करता है तो रेफरी सीटी बजाता है। ठीक वैसे ही, अगर बहस के दौरान कोई सांसद ऐसा शब्द या तरीका इस्तेमाल करता है जो संसद के नियमों के खिलाफ है, तो दूसरा सांसद 'Point of Order' उठाकर स्पीकर का ध्यान खींचता है। फिर स्पीकर नियम के मुताबिक फैसला सुनाते हैं।
तो इन संसदी शब्दों को समझकर आप भारत के लोकतंत्र और उसकी कार्यवाही को और भी बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। टीवी पर live debate या संसद सत्र देखते समय अब ये कठिन शब्द आपको बिल्कुल भी नहीं उलझाएंगे।
भारतीय संसद के 3 मेजर सेशंस
बजट सत्र (Budget Session)
मानसून सत्र (Monsoon Session)
शीतकालीन सत्र (Winter Session)
FAQ
- संसद में प्रश्नकाल और शून्यकाल में क्या मुख्य अंतर होता है?
प्रश्नकाल सदन का पहला घंटा होता है जिसमें तय सवाल पूछे जाते हैं और मंत्री उत्तर देते हैं। जबकि शून्यकाल प्रश्नकाल के बाद होता है, जिसमें बिना किसी पूर्व सूचना के तुरंत जनहित के मुद्दे उठाए जाते हैं। - तारांकित और अतारांकित प्रश्नों में क्या अंतर होता है?
तारांकित प्रश्नों के उत्तर मंत्री सदन में मौखिक रूप से देते हैं और सांसद पूरक सवाल पूछ सकते हैं। वहीं अतारांकित प्रश्नों के उत्तर लिखित में दिए जाते हैं और उन पर आगे कोई सवाल नहीं पूछा जा सकता। - संसद में स्थगन प्रस्ताव कब और क्यों लाया जाता है?
स्थगन प्रस्ताव किसी बेहद गंभीर और अति-महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे पर चर्चा करने के लिए लाया जाता है। इसे लाने का मुख्य उद्देश्य सदन के पूर्व निर्धारित काम को रोककर उस जरूरी मुद्दे पर ध्यान देना होता है।
कैसे काम करता है भारतीय रेलवे का कंप्लेंट सिस्टम, चलते ट्रेन में ऐसे करें शिकायत
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