विदेश से एमबीबीएस करने वालों की संख्या में होगी कमी, बिगड़ते संबंधों का होगा असर
Ravi Singh | May 23, 2024, 11:00 IST
भारतीय स्टूडेंट्स एजुकेशन एमबीबीएस करने के लिए विदेश जाते हैं
भारतीय स्टूडेंट्स एमबीबीएस करने के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन एक के बाद एक सामने आए विवादों के बाद अब छात्रों की संख्या पर असर होने वाला है। हाल में किर्गिस्तान का मामला सामने आया है। भारतीय छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार हुआ था।
MBBS Abroad : यूक्रेन व रूस के बीच युद्ध और चीन में कोविड के बाद अब किर्गिस्तान में उठे विवाद का असर मेडिकल स्टडीज पर होगा। दरअसल, इन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय स्टूडेंट्स एमबीबीएस करने के लिए जाते हैं, लेकिन एक के बाद एक सामने आए विवादों के बाद अब छात्रों की संख्या पर असर होने वाला है। हाल में किर्गिस्तान का मामला सामने आया है। यहां पर पाकिस्तान के साथ भारतीय छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार हुआ था।
किर्गिस्तान के कई संगठनों ने वहां रहने वाले छात्रों को वापस हिंदुस्तान बुलाने की मांग उठाई है। इससे पहले यूक्रेन व रूस के विवाद के दौरान भी भारतीय छात्रों को भारत वापस बुलाया गया था। कोविड के बाद भी यही स्थिति बनी थी। भारत आने के बाद इन छात्रों को एमबीबीएस व इंटर्नशिप करने के लिए विकल्प नहीं दिए गए थे। जिस वजह से छात्रों के भविष्य खतरे में नजर आने लगा।
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अब विदेश जाने से पहले छात्र अधिक सचेत हो जाएंगे। उज्जबेकिस्तान बन सकता है चिकित्सा शिक्षा का बड़ा सेंटर यूक्रेन, चीन व किर्गिस्तान में सामने आए अलग-अलग मामलों के बाद अब उज्जबेकिस्तान मेडिकल स्टडीज का एक बड़ा केंद्र हो सकता है। उज्जबेकिस्तान का डिप्लोमेटिक रिश्ते भी अच्छे हैं। वहीं अभी तक हर विवाद से यह देश दूर ही रहा है।
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कोविड से ही चीन के लिए सीधी फ्लाइट उपलब्ध नहीं है। चीन में छात्रों की संख्या गिरने का दूसरा कारण यातायात व्यवस्थाएं भी हैं। कोविड से ही चीन के लिए कोई भी फ्लाइट नई दिल्ली से नहीं है। कोविड से पहले चीन के पांच शहरों से के लिए सीधी फ्लाइट मिल जाती थी, जिससे स्टूडेंट को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता था।
विशेषज्ञों के अनुसार किर्गिस्तान में एमबीबीएस के लिए छात्र को करीब 35 से 40 लाख रुपए का खर्चा होता है। इसमें रहना, खाना , हॉस्टल और ट्यूशन फीस शामिल है। वहीं भारतीय निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस का औसतन खर्चा 75 से 80 लाख रुपए का होता है।
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स्टूडेंट्स को भारत बुलाने की मांग
किर्गिस्तान के कई संगठनों ने वहां रहने वाले छात्रों को वापस हिंदुस्तान बुलाने की मांग उठाई है। इससे पहले यूक्रेन व रूस के विवाद के दौरान भी भारतीय छात्रों को भारत वापस बुलाया गया था। कोविड के बाद भी यही स्थिति बनी थी। भारत आने के बाद इन छात्रों को एमबीबीएस व इंटर्नशिप करने के लिए विकल्प नहीं दिए गए थे। जिस वजह से छात्रों के भविष्य खतरे में नजर आने लगा।
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उज्जबेकिस्तान बन सकता है स्टडीज का केंद्र
अब विदेश जाने से पहले छात्र अधिक सचेत हो जाएंगे। उज्जबेकिस्तान बन सकता है चिकित्सा शिक्षा का बड़ा सेंटर यूक्रेन, चीन व किर्गिस्तान में सामने आए अलग-अलग मामलों के बाद अब उज्जबेकिस्तान मेडिकल स्टडीज का एक बड़ा केंद्र हो सकता है। उज्जबेकिस्तान का डिप्लोमेटिक रिश्ते भी अच्छे हैं। वहीं अभी तक हर विवाद से यह देश दूर ही रहा है।
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फ्लाइट नई दिल्ली से नहीं है
कोविड से ही चीन के लिए सीधी फ्लाइट उपलब्ध नहीं है। चीन में छात्रों की संख्या गिरने का दूसरा कारण यातायात व्यवस्थाएं भी हैं। कोविड से ही चीन के लिए कोई भी फ्लाइट नई दिल्ली से नहीं है। कोविड से पहले चीन के पांच शहरों से के लिए सीधी फ्लाइट मिल जाती थी, जिससे स्टूडेंट को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता था।
किर्गिस्तान में कम खर्च पर एमबीबीएस
विशेषज्ञों के अनुसार किर्गिस्तान में एमबीबीएस के लिए छात्र को करीब 35 से 40 लाख रुपए का खर्चा होता है। इसमें रहना, खाना , हॉस्टल और ट्यूशन फीस शामिल है। वहीं भारतीय निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस का औसतन खर्चा 75 से 80 लाख रुपए का होता है।
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