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सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों के लिए खुशखबरी है। SSC ने अब एक नया नियम लागू किया है। इसका नाम एसएससी फिक्स-फ्लोट न्यू रूल रखा गया है। यह नया नियम (New rules) साल 2026 से लागू होगा। इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया अब और पारदर्शी बनेगी। खाली पदों की समस्या को अब हल किया जाएगा।
उम्मीदवारों को मेरिट के हिसाब से बेहतर पद मिलेंगे। एसएससी सीजीएल परीक्षा के बाद कई पद खाली रह जाते थे। कई छात्र चयन के बाद भी जॉइन नहीं करते थे। इस समस्या को खत्म करने के लिए बदलाव हुआ है। अब इसके लिए स्लाइडिंग मैकेनिज्म शुरू किया गया है।
क्या है एसएससी का फिक्स और फ्लोट नियम?
एसएससी (Staff Selection Commission) ने इस नए नियम को यूनिवर्सिटी काउंसलिंग (University Counseling) की तर्ज पर तैयार किया है। जिस तरह कॉलेजों में दाखिले के समय छात्रों को सीट अपग्रेड करने या अपनी पसंद की सीट पक्की करने का मौका मिलता है, अब सरकारी नौकरियों में भी वैसा ही होगा।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
एसएससी के चेयरमैन एस. गोपालाकृष्णन के मुताबिक अब आयोग सीधे फाइनल रिजल्ट जारी करने के बजाय सबसे पहले एक टेंटिटिव लिस्ट (Tentative List) जारी करेगा। इस लिस्ट में शामिल उम्मीदवारों से उनकी पसंद पूछी जाएगी। उनके पास दो मुख्य विकल्प होंगे:
फिक्स (Fix): यदि उम्मीदवार उसे अलॉट किए गए पद और स्थान से संतुष्ट है, तो वह 'फिक्स' विकल्प चुनकर अपनी सीट पक्की कर सकता है।
फ्लोट (Float): यदि उम्मीदवार को लगता है कि उसकी मेरिट के आधार पर उसे इससे बेहतर पद मिल सकता है, तो वह 'फ्लोट' विकल्प चुनकर स्लाइडिंग राउंड (Sliding Round) में जा सकता है।
एसएससी नया नियम 2026
लक्ष्य: सरकारी पदों पर 90 से 95 फीसदी तक नियुक्ति सुनिश्चित करना।
प्रभाव: वेटिंग लिस्ट जैसी समस्या का समाधान और खाली पदों को तुरंत भरना।
प्रक्रिया: दो राउंड में लिस्ट जारी होगी ताकि प्रक्रिया लंबी न खिंचे।
लाभ: मेरिट के आधार पर पद अपग्रेड करने का मौका।
नियम लागू करने का मुख्य उद्देश्य
एसएससी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक होती है। हर साल 30 से 50 लाख उम्मीदवार आवेदन करते हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि करीब 20 से 30 फीसदी उम्मीदवार चुने जाने के बाद भी नौकरी जॉइन नहीं करते।
इसका कारण बेहतर विकल्प मिलना या मनचाहा पद न मिलना हो सकता है।
खाली पदों की समस्या का समाधान
पुराने नियमों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार जॉइन नहीं करता था, तो वह पद खाली रह जाता था और उसे अगली भर्ती परीक्षा (Next Recruitment Cycle) में जोड़ दिया जाता था।
इससे नए उम्मीदवारों का साल बर्बाद होता था। 'फिक्स-फ्लोट' नियम के जरिए उस खाली पद पर तुरंत दूसरे इच्छुक उम्मीदवार को मौका मिल सकेगा।
मेरिट और पसंद को प्रायोरिटी
इस नियम से उन मेधावी छात्रों को फायदा होगा जो अपनी रैंक के हिसाब से बेहतर विभाग या लोकेशन चाहते हैं। स्लाइडिंग राउंड के माध्यम से उन्हें अपनी प्रायोरिटी (Priority) के अनुसार उच्च पद मिल सकेगा।
स्लाइडिंग राउंड और आखिरी रिजल्ट
पहले राउंड की टेंटिटिव लिस्ट जारी होने के बाद, जो उम्मीदवार 'फ्लोट' का विकल्प चुनेंगे, उन्हें स्लाइडिंग राउंड में शामिल किया जाएगा।
अपग्रेडेशन: यदि ऊपर के पदों पर जगह खाली होती है, तो फ्लोट वाले उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के अनुसार पद आवंटित (Reallocation) कर दिए जाएंगे।
अंतिम सूची: इसके बाद एक संशोधित अंतिम रिजल्ट (Revised Final Result) जारी होगा, जिसके आधार पर नियुक्ति की फॉर्मलिटीज पूरी की जाएंगी।
सावधानी: यदि कोई उम्मीदवार 'फिक्स' चुनने के बाद भी जॉइन नहीं करता है, तो वह पद फिर से खाली माना जाएगा और उसे अगले साल की परीक्षा चक्र (Examination Cycle) में भेज दिया जाएगा।
छात्रों के लिए इस नियम के फायदे
जॉब सिक्योरिटी: योग्य उम्मीदवारों के पास नौकरी पक्की करने का ज्यादा मौका होगा।
समय की बचत: खाली पदों के लिए अलग से लंबी वेटिंग लिस्ट का इंतजार नहीं करना होगा।
पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया डिजिटल और काउंसलिंग आधारित होगी, जिससे भ्रम कम होगा।
बेहतर करियर ग्रोथ: अपनी पसंद के विभाग में जाने की संभावना बढ़ जाएगी।
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