मुंबई फिल्म फेस्टिवल में छाई MP की 64 योगिनी मंदिर पर बनी डॉक्यूमेंट्री
Kaushiki | Jun 23, 2026, 15:00 IST
Y64 - Whispers of the Unseen
मध्य प्रदेश के मुरैना में स्थित ऐतिहासिक 64 योगिनी मंदिर पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म Y64 - Whispers of the Unseen को 19वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में खूब सराहा गया है। डॉ. बीना उन्नीकृष्णन द्वारा बनाई गई यह फिल्म वैश्विक पहचान बन रही है।
बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों का क्रेज तो आपने बहुत देखा होगा। लेकिन इस समय पूरी दुनिया में मध्य प्रदेश की एक ऐसी रियल लाइफ हिस्टोरिकल स्टोरी गूंज रही है, जिसने इंटरनेशनल लेवल पर धमाल मचा दिया है।
एमपी के मुरैना में स्थित रहस्यमयी और बेहद खूबसूरत 64 योगिनी मंदिर पर बनी एक धमाकेदार डॉक्यूमेंट्री फिल्म बन रही है। Y64 - Whispers of the Unseen ने मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) में एंट्री मारते ही तहलका मचा दिया है।
ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हमारे देश की प्राचीन वास्तुकला, राजसी इतिहास का जीता-जागता अजूबा है। ये आज के हर युवा को अपनी जड़ों से जोड़ देगा।
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इस कमाल के सिनेमाई प्रोजेक्ट को मशहूर विजुअल आर्टिस्ट डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने तैयार किया है। इस बेहतरीन डॉक्यूमेंट्री का नाम Y64 - व्हिसपर्स ऑफ द अनसीन रखा गया है।
ये अनूठी फिल्म मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग और काली ट्रस्ट के संयुक्त सहयोग से बनी है। इसमें मुरैना के मितावली में स्थित ऐतिहासिक 64 योगिनी मंदिर को दिखाया गया है।
डायरेक्टर डॉ. बीना ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में उन्हें पूरे 12 साल लगे। इन 12 सालों की कठिन रिसर्च और साधना के बाद यह मास्टरपीस तैयार हुआ है।
इस बड़े और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरुआत फिल्मों के कैमरों से नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत सबसे पहले 64 योगिनियों पर बनाई गई बेहद खूबसूरत पेंटिंग्स से हुई थी।
डॉ. बीना ने कैनवास पर 64 योगिनियों के मूल रूपों को अपने चित्रों में उकेरा था। इन सभी 64 ओरिजिनल पेंटिंग्स की एक भव्य प्रदर्शनी भोपाल के भारत भवन में लगी थी।
भोपाल के कला प्रेमियों ने पूरे एक हफ्ते तक इन चित्रों को करीब से देखा था। मध्य प्रदेश के लोगों से मिले इसी प्यार ने इस फिल्म को बनाने का हौसला दिया।
फिल्म की मेकर डॉ. बीना उन्नीकृष्णन अपने इस सफर को बेहद स्पिरिचुअल और मैजिकल मानती हैं। उनका कहना है कि इस विषय पर काम करना कोई सामान्य बात नहीं थी।
डॉ. बीना कहती हैं कि मैंने इस विषय या इन योगिनियों को खुद नहीं चुना है। बल्कि इन 64 दिव्य योगिनियों ने खुद मुझे इस पावन काम के लिए चुना था। उनके मुताबिक, ये फिल्म केवल एक एंटरटेनमेंट या मनोरंजन का साधन मात्र नहीं है। बल्कि यह हमारी खोई हुई प्राचीन सांस्कृतिक आत्मा की एक गहरी खोज जैसी है।
![अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव मुंबई में प्रदर्शित हुई 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन' | मध्यप्रदेश | prativad.com]()
इस फिल्म की मेकिंग स्टोरी किसी एडवेंचर थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। डॉ. बीना ने इन 64 दिव्य चित्रों के साथ देश भर में एक लंबी यात्रा पूरी की।
उन्होंने भारत के अलग-अलग 14 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहरों का दौरा किया। इस पूरे प्रोजेक्ट को समझने और फिल्माने के लिए उन्होंने कुल 15 हजार किलोमीटर की दूरी तय की।
यह सफर सिर्फ एक फिल्म की शूटिंग के लिए नहीं किया गया था। यह सफर अपनी जड़ों को तलाशने, साहस जुटाने और भारत की प्राचीन विरासत को सहेजने का था।
मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के एसीएस शिवशेखर शुक्ला ने भी इस फिल्म की सराहना की है। उन्होंने कहा कि मितावली मुरैना का यह मंदिर आर्किटेक्चर का बेजोड़ नमूना है।
आपको बता दें कि इसी मंदिर के गोल डिजाइन से हमारे पुराने संसद भवन को प्रेरणा मिली थी। यह ऐतिहासिक मंदिर वर्तमान में यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
शिवशेखर शुक्ला के मुताबिक, ऐसी कलात्मक फिल्में हमारी मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को ग्लोबल पहचान दिलाती हैं। इससे दुनिया भर के टूरिस्ट भारत की तरफ आकर्षित होते हैं।
![Chambal's 64 yogini Temple a replica of Parliament House । चंबल के बीहड़ में आज भी गुलजार है चौंसठ योगिनी मंदिर, जिसकी तर्ज पर बना है संसद भवन]()
ये ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री फिल्म आज के मॉडर्न युवाओं के लिए एक बहुत बड़ा संदेश देती है। यह आज की नई जनरेशन को उनके गौरवशाली और शानदार इतिहास से रूबरू कराती है।
स्क्रीन पर जब 64 मूल कैनवास पर बनी अद्भुत पेंटिंग्स दिखती हैं, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और विजुअल्स दर्शकों को प्राचीन काल में ले जाते हैं।
12 साल की लंबी मेहनत का नतीजा है कि आज लोग अपने इतिहास को समझ पा रहे हैं। ये फिल्म हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाती है और उसे संजोने की इंस्पिरेशन देती है।
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एमपी के मुरैना में स्थित रहस्यमयी और बेहद खूबसूरत 64 योगिनी मंदिर पर बनी एक धमाकेदार डॉक्यूमेंट्री फिल्म बन रही है। Y64 - Whispers of the Unseen ने मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) में एंट्री मारते ही तहलका मचा दिया है।
ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हमारे देश की प्राचीन वास्तुकला, राजसी इतिहास का जीता-जागता अजूबा है। ये आज के हर युवा को अपनी जड़ों से जोड़ देगा।
Chausath Yogini Temple Jabalpur Madhya Pradesh Mystery Photos Also Called Tantrik University ANN | Photos: चौसठ योगिनी मंदिर: 64 योगिनी के बीच में विराजमान है शिव की प्रतिमा, जानें क्यों ...
डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की 12 साल की साधना
ये अनूठी फिल्म मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग और काली ट्रस्ट के संयुक्त सहयोग से बनी है। इसमें मुरैना के मितावली में स्थित ऐतिहासिक 64 योगिनी मंदिर को दिखाया गया है।
डायरेक्टर डॉ. बीना ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में उन्हें पूरे 12 साल लगे। इन 12 सालों की कठिन रिसर्च और साधना के बाद यह मास्टरपीस तैयार हुआ है।
भोपाल के भारत भवन से शुरू हुआ था सफर
डॉ. बीना ने कैनवास पर 64 योगिनियों के मूल रूपों को अपने चित्रों में उकेरा था। इन सभी 64 ओरिजिनल पेंटिंग्स की एक भव्य प्रदर्शनी भोपाल के भारत भवन में लगी थी।
भोपाल के कला प्रेमियों ने पूरे एक हफ्ते तक इन चित्रों को करीब से देखा था। मध्य प्रदेश के लोगों से मिले इसी प्यार ने इस फिल्म को बनाने का हौसला दिया।
योगिनियों ने खुद मुझे इस काम के लिए चुना
डॉ. बीना कहती हैं कि मैंने इस विषय या इन योगिनियों को खुद नहीं चुना है। बल्कि इन 64 दिव्य योगिनियों ने खुद मुझे इस पावन काम के लिए चुना था। उनके मुताबिक, ये फिल्म केवल एक एंटरटेनमेंट या मनोरंजन का साधन मात्र नहीं है। बल्कि यह हमारी खोई हुई प्राचीन सांस्कृतिक आत्मा की एक गहरी खोज जैसी है।
अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव मुंबई में प्रदर्शित हुई 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन' | मध्यप्रदेश | prativad.com
14 शहर और 15 हजार किलोमीटर की यात्रा
उन्होंने भारत के अलग-अलग 14 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहरों का दौरा किया। इस पूरे प्रोजेक्ट को समझने और फिल्माने के लिए उन्होंने कुल 15 हजार किलोमीटर की दूरी तय की।
यह सफर सिर्फ एक फिल्म की शूटिंग के लिए नहीं किया गया था। यह सफर अपनी जड़ों को तलाशने, साहस जुटाने और भारत की प्राचीन विरासत को सहेजने का था।
आर्किटेक्चर की अनमोल धरोहर
आपको बता दें कि इसी मंदिर के गोल डिजाइन से हमारे पुराने संसद भवन को प्रेरणा मिली थी। यह ऐतिहासिक मंदिर वर्तमान में यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
शिवशेखर शुक्ला के मुताबिक, ऐसी कलात्मक फिल्में हमारी मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को ग्लोबल पहचान दिलाती हैं। इससे दुनिया भर के टूरिस्ट भारत की तरफ आकर्षित होते हैं।
Chambal's 64 yogini Temple a replica of Parliament House । चंबल के बीहड़ में आज भी गुलजार है चौंसठ योगिनी मंदिर, जिसकी तर्ज पर बना है संसद भवन
युवा पीढ़ी को जड़ों से जोड़ती फिल्म
स्क्रीन पर जब 64 मूल कैनवास पर बनी अद्भुत पेंटिंग्स दिखती हैं, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और विजुअल्स दर्शकों को प्राचीन काल में ले जाते हैं।
12 साल की लंबी मेहनत का नतीजा है कि आज लोग अपने इतिहास को समझ पा रहे हैं। ये फिल्म हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाती है और उसे संजोने की इंस्पिरेशन देती है।
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