365 दिनों में केवल नागपंचमी पर खुलते हैं ये मंदिर, जानें क्या है खासियत

Dolly patil | Aug 08, 2024, 16:08 IST
नागपंचमी पर्व पर भगवान नागचंद्रेश्वर के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। साल में एक बार खुलने वाले मंदिर हर साल दर्शन के लिए करीब लाखों श्रद्धालु आते है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ मंदिर के बारे में खास बाते...
1 6 हाकालेश्वर मंदिर का शिखर तीन खंडों में बंटा है। इसमें सबसे नीचे गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर, दूसरे खंड में ओंकारेश्वर और तीसरे खंड में नागचन्द्रेश्वर भगवान का मंदिर है।
हाकालेश्वर मंदिर का शिखर तीन खंडों में बंटा है। इसमें सबसे नीचे गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर, दूसरे खंड में ओंकारेश्वर और तीसरे खंड में नागचन्द्रेश्वर भगवान का मंदिर है।

महाकाल मंदिर में स्थित नागचंद्रेश्वर भगवान की प्रतिमा 11वीं शताब्दी की है। इस प्रतिमा में फन फैलाए हुए नाग के आसन पर शिव के साथ देवी पार्वती बैठी है। संभवतः दुनिया में ये एक मात्र ऐसी प्रतिमा है, जिसमें शिव जी नाग शैया पर विराजित हैं।

2 6 हाकालेश्वर मंदिर का शिखर तीन खंडों में बंटा है। इसमें सबसे नीचे गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर, दूसरे खंड में ओंकारेश्वर और तीसरे खंड में नागचन्द्रेश्वर भगवान का मंदिर है।
हाकालेश्वर मंदिर का शिखर तीन खंडों में बंटा है। इसमें सबसे नीचे गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर, दूसरे खंड में ओंकारेश्वर और तीसरे खंड में नागचन्द्रेश्वर भगवान का मंदिर है।

महाकालेश्वर मंदिर का शिखर तीन खंडों में बंटा है। इसमें सबसे नीचे गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर, दूसरे खंड में ओंकारेश्वर और तीसरे खंड में नागचन्द्रेश्वर भगवान का मंदिर है। यह मंदिर अतिप्राचीन है।

3 6 ीू
ीू

माना जाता है कि परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के लगभग इस मंदिर का निर्माण करवाया था। सिंधिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने 1732 में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।

4 6 ेाी
ेाी

बीजामंडल, मध्य प्रदेश के विदिशा शहर में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। यह एक विशाल मंडप है जिसका निर्माण पारंपरिक भारतीय वास्तुकला शैली में किया गया है।

5 6 ्ि
्ि

यह स्थान भगवान विष्णु को समर्पित है और यहां एक विशाल बीजामंडल स्थापित है। विदिशा का प्राचीन सूर्य मंदिर, जिसे विजय मंदिर या बीजामंडल के नाम से भी जाना जाता है।

6 6 यहां पर भी साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी पर हिंदुओं को बंद ताले में पूजन की परमिशन दी जाती है।
यहां पर भी साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी पर हिंदुओं को बंद ताले में पूजन की परमिशन दी जाती है।

यहां पर भी साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी पर हिंदुओं को बंद ताले में पूजन की परमिशन दी जाती है।