कैंसर के इलाज में वैज्ञानिकों को मिला नया ब्रम्हास्त्र, आखिर क्या है लिक्विड गोल्ड?

Anjali Dwivedi | May 20, 2026, 20:58 IST
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जापान की तोहोकू यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक अनोखे लिक्विड गोल्ड की खोज की है। सोने के ये नैनोपार्टिकल्स इंसानी कोशिकाओं की तरह व्यवहार करते हैं। तापमान और दबाव बदलने पर यह अपना आकार खुद बदल लेते हैं। इससे कैंसर का सटीक इलाज संभव होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जापानी वैज्ञानिकों ने लिक्विड गोल्ड के अनोखे नैनोपार्टिकल्स की खोज की है।
  • यह अनोखा तरल सोना बिल्कुल जीवित कोशिकाओं की तरह व्यवहार करता है।
  • गर्मी और दबाव मिलने पर यह अपना आकार खुद बदल लेता है।
  • यह शानदार रिसर्च जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में छपी है।
  • इस तकनीक से कैंसर का इलाज और एडवांस गैजेट्स बनाना आसान होगा।
जरा सोचिए कि आपके गहनों में लगा सोना अचानक पानी की तरह बहने लगे। इतना ही नहीं, वह किसी जीवित कोशिका की तरह बर्भाव करने लगे तो कैसा लगेगा? यह बात सुनने में किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी जैसी लग सकती है।

जापान के वैज्ञानिकों ने इस हैरान करने वाली बात को सच साबित कर दिखाया है। विज्ञान की दुनिया में अक्सर ऐसे अनोखे आविष्कार होते रहते हैं। जो पूरी दुनिया के इंसानों को पूरी तरह हैरान कर देते हैं।

वैज्ञानिकों ने कैसे तैयार किया यह अनोखा लिक्विड गोल्ड?

जापान की मशहूर तोहोकू यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह बड़ी कामयाबी हासिल की है। उन्होंने लिक्विड गोल्ड यानी तरल सोने के ऐसे नैनोपार्टिकल्स खोजे हैं। यह पार्टिकल्स पूरी तरह से किसी जीवित जीव की तरह काम करते हैं।

वैज्ञानिकों की यह अद्भुत खोज आने वाले समय में बहुत मददगार साबित होगी। इससे मेडिकल साइंस, कैंसर के इलाज और गैजेट्स की दुनिया पूरी तरह बदल जाएगी। यह पूरी रिसर्च जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुई है।

कैसे काम करता है लिक्विड गोल्ड?

यह पूरी रिसर्च डॉक्टर रीना सातो और प्रोफेसर कियोशी कानी की देखरेख में हुई। वैज्ञानिकों ने सोने के इन बेहद बारीक कणों को एक खास सतह पर रखा। इस सतह को हवा और पानी के बीच तैयार किया गया था।

इन सोने के पार्टिकल्स को खास बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया गया। वैज्ञानिकों ने इन पर दो अलग-अलग तरह के ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स की परत चढ़ाई। इस खास कोटिंग की वजह से ये नैनोपार्टिकल्स बिल्कुल अलग तरीके से काम करने लगे।

ऐसे बदल जाता है सोने का आकार

इस कोटिंग का असर यह हुआ कि पार्टिकल्स तापमान के हिसाब से बदलने लगे। सामान्य तापमान पर सोने के ये कण अलग-अलग टापू की तरह बिखरे रहते हैं। लेकिन जैसे ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंचता है, ये आपस में जुड़ जाते हैं।

आपस में जुड़कर ये कण एक मजबूत नेटवर्क या जाल बना लेते हैं। वहीं दोबारा दबाव या प्रेशर पड़ने पर ये वापस अलग-अलग हो जाते हैं। आणविक स्तर पर किया गया यह छोटा सा बदलाव पूरे ढांचे को बदल देता है।

कैंसर के इलाज में मिलेगी मदद

इस खोज की सबसे अच्छी बात यह है कि यह बदलाव 40 डिग्री सेल्सियस पर होता है। यह तापमान हमारे इंसानी शरीर के सामान्य तापमान के बेहद करीब माना जाता है। इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में इससे बेहद सटीक दवाइयां बनाई जा सकेंगी।

ये दवाइयां शरीर के अंदर जाकर सिर्फ बीमारी वाले हिस्से पर असर करेंगी। ये ट्यूमर या कैंसर सेल्स के तापमान को भांपकर वहीं पर एक्टिव होंगी। इससे शरीर के बाकी अच्छे हिस्सों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

रोबोटिक्स की दुनिया में आएगा बड़ा बदलाव

इस नई तकनीक का फायदा सिर्फ मेडिकल साइंस तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल भविष्य में मुड़ने वाली स्क्रीन और एडवांस सेंसर बनाने में होगा। साथ ही इसकी मदद से खुद को ठीक करने वाले रोबोट्स भी बनाए जा सकेंगे।

वैज्ञानिक इसे भविष्य के स्मार्ट मैटेरियल्स की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम मान रहे हैं। सोने का यह नया रूप आने वाले समय में तकनीकी क्रांति लेकर आएगा। इससे इंसानी जीवन बेहद आसान और सुरक्षित बन जाएगा।

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