यहां महिलाएं ही लेती हैं फैसले: कहीं पुरुषों की गांव में एंट्री ही बैन तो कहीं पिता जैसा शब्द ही नहीं जानता कोई

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यहां महिलाएं ही लेती हैं फैसले: कहीं पुरुषों की गांव में एंट्री ही बैन तो कहीं पिता जैसा शब्द ही नहीं जानता कोई

दुनिया में पुरुष प्रधान व्यवस्था होने के बाद भी ऐसे समुदाय हमारे बीच मौजूद हैं, जहां महिलाएं ही समाज की व्यवस्था संभालती हैं (matriarchal society)। इन समुदायों में स्त्रियों के नियम— कायदों से ही परिवार चलाया जाता है। जहां परिवार की मुखिया भी महिला होती है, खानदान (Faimly) की पहचान भी महिला से ही की जाती है। ऐसे समुदायों का अभी भी बने रहना समाज को एक बड़ी सीख भी देता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ महिला प्रधान समुदायों के बारे में...

खासी समुदाय (भारत, मेघालय)

इस सूची में पहला स्त्री प्रधान समुदाय भारत से है, जिसकी जड़ें पूर्वोत्तर के मेघालय में खासी समुदाय (khasi community) से जुड़ी हैं। खासी एक बेहद ही शांति प्रिय समुदाय है। इनकी मातृ भाषा ही खासी है। इस समाज की सबसे खास चीज है, इस जनजातीय समुदाय की मातृवंशी व्यवस्था, यानी यहां मां ही सर्वोपरि होती है। बच्चों का उपनाम मां के नाम पर होता है। यहां संपत्ति का अधिकार महिला को ही मिलता है। खासी समुदाय में अरेंज्ड मैरिज (khasi community marriage) को नहीं माना जाता और तलाक के मामलों में महिलाओं को पूरी आजादी होती है, क्योंकि उसकी पसंद पर किसी तरह के सवाल खड़े नहीं किए जा सकते। इस समुदाय में महिलाएं नहीं बल्कि पुरुष शादी के बाद अपनी पत्नी के घर आते हैं और पूरा जीवन अपनी सास के घर में ही बिताते हैं। 

मिनांगकबाऊ समुदाय (इंडोनेशिया)

स्त्री प्रधान समाज का दूसरा उदाहरण है इंडोनेशिया का मिनांगकबाऊ समुदाय। यह दुनिया का सबसे बड़ा मातृ सत्तात्मक समाज माना जाता है। यहां पुरुष शादी के बाद ससुराल जाते हैं। पैतृक धन-संपत्ति मां से बेटियों को दी जाती है और बच्चों को पिता के नाम के बजाय मां का नाम मिलता है। सभी प्रकार के निर्णयों में महिलाओं की ही अहम भूमिका होती है और परिवार से जुड़े विवादों का निपटारा भी महिलाएं ही करती है। इस समुदाय में मां का दर्जा सबसे अहम माना जाता है। 

उमोजा गांव (केन्या)

तीसरा सबसे चर्चित समुदाय उत्तरी केन्या में संबुरु काउंटी में स्थित एक गांव उमोजा है। दरअसल इस गांव की शुरुआत 15 रेप सर्रवाइवर महिलाओं ने की थी, जिन्होंने साल 1990 में इस गांव का निर्माण किया, लेकिन बाद में यहां पर बाल विवाह, खतना प्रथा, घरेलू हिंसा से पीड़ित औरतें भी आकर रहने लगीं। यहां रह रही औरतें खाने, कपड़े और घर के लिए नियमित आय की व्यवस्था खुद ही करती हैं। इस गांव में पुरुष प्रवेश नहीं कर सकते, क्योंकि यहां रह रही महिलाएं समाज के पितृसत्तामक वर्ग से पीड़ित थी और उनके जीवन का एकमात्र सहारा यह उमोजा है, जहां वे सुख शांति से अपना जीवन व्यतीत कर सकती है। हालांकि पर्यटक मामूली फीस देकर उमोजा गांव की सैर कर सकते हैं।

मोस्यू समुदाय (चीन)

चीन और तिब्‍बत के कुछ इलाकों में रहने वाले मोस्‍यू समुदाय में घर से लेकर व्यवसाय तक के सारे फैसले घर की मुखिया यानी नानी या दादी लेती हैं। इस समुदाय में पुरुषों की भूमिका सिर्फ बेहद सीमित होती है जो कि महिलाओं के शासन वाले समाज को बढ़ाने के लिए ही होती हैं। यहां बच्‍चा पैदा करने वाली महिलाओं के लिए प्राइवेट रूम बनाए गए हैं। मोस्‍यू महिलाओं को यह तक नहीं मालूम होता है कि उसके बच्‍चों का पिता कौन है? इस समुदाय में बच्‍चे अपनी मां के नाम से जाने जाते हैं। जानवरों की देखभाल का काम पुरुषों की जिम्मेदारी मानी जाती है। 

बिब्री समुदाय (कोस्टारिका)

ब्रिब्री भी एक जनजातीय समुदाय है जो कोस्टारिका और पनामा के क्षेत्रों में निवास करता है। इस समुदाय में स्त्रियों की वरीयता का मूल एक किंवदंती से जुड़ा हुआ है जिसमें कहा गया था कि एक महिला इतिहास में सिबू नाम के एक बिलारी देवता के कैकोव पेड़ में बदल गई थी। यही कारण है कि केवल महिलाएं ही पवित्र कोको पेय को तैयार कर सकती हैं। साथ ही महिलाओं के पास ही अपनी संपत्ति को अपने बच्चों को देने का अधिकार होता है।

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