Mahakumbh: जानें शाही स्नान का महत्व और कुंभ मेले से जुड़ी 10 खास बातें
Siddhi Tamrakar | Jan 10, 2025, 13:59 IST
mahakumbh 2025
2025 में महाकुंभ मेला 144 साल बाद प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक होगा। जानें महाकुंभ मेला से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें इस लेख में।
हिंदू धर्म में कुंभ मेला एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है, जो चार प्रमुख जगहों पर आयोजित होता है: प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। 2025 में यह मेला एक सामान्य कुंभ नहीं, बल्किमहाकुंभ मेलाके रूप में आयोजित होगा, जो 144 सालों के बाद आ रहा है। महाकुंभ मेला13 जनवरी 2025कोपौष पूर्णिमासे शुरू होगा और यह26 फरवरी 2025तक चलेगा। जानें महाकुंभ से जुड़ी कई खास बातें इस लेख में-
महाकुंभ मेला13 जनवरी 2025से शुरू होकर26 फरवरी 2025तक चलेगा। यह मेला कुल44 दिनोंतक आयोजित होगा।
महाकुंभ मेले में शाही स्नान का अत्यधिक महत्व है। शाही स्नान खास तारीखों पर होता है और यह जीवन में एक बार का अवसर होता है। शाही स्नान में डुबकी लगाने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।
कुंभ मेला भारत के चार प्रमुख स्थानों पर आयोजित होता है:
कुंभ मेला चार प्रकार का होता है:
कुंभ मेला का इतिहास काफी पुराना है और हिंदू धर्म ग्रंथों में इसे सतयुग से ही मनाया जाता है। कुंभ मेला की शुरुआत को लेकर कई तरह की कथाएं हैं। कुछ विद्वान इसे गुप्त काल से जोड़ते हैं, जबकि कुछ के अनुसार, शंकराचार्य के समय से कुंभ का आयोजन होता आया है।
महाकुंभ (Mahakumbh) 12 पूर्ण कुंभ मेलों के बाद आता है और यह केवल प्रयागराज में होता है। यह आयोजन भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं।
कुछ कथाओं में बताया गया है कि समुद्र मंथन के बाद से ही कुंभ का आयोजन हो रहा है, हालांकि पहला कुंभ मेला कहां हुआ, इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। पुराणों में भी इसकीविस्तृत (Detailed)जानकारी नहीं मिलती है।
महाकुंभ में स्नान करने को लेकर मान्यता है कि इससे पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह मेला विशेष रूप से आत्मिक शुद्धि, धार्मिक उन्नति और पुण्य की प्राप्ति के लिए आयोजित किया जाता है।
प्रयागराज में कुंभ मेला तब लगता है जबगुरु ग्रहवृषभ राशिमें औरसूर्यमकर राशिमें होते हैं।
1. महाकुंभ 2025 की अवधि
2. महाकुंभ में शाही स्नान का महत्व
3. शाही स्नान की तारीखें
महाकुंभ मेला में शाही स्नान के लिए निम्नलिखित तारीखें तय की गई हैं: पौष पूर्णिमा - 13 जनवरी 2025 मकर संक्रांति - 14 जनवरी 2025 मौनी अमावस्या (सोमवती) - 29 जनवरी 2025 बसंत पंचमी - 3 फरवरी 2025 माघ पूर्णिमा - 12 फरवरी 2025 महाशिवरात्रि - 26 फरवरी 2025
4. कुंभ मेला के स्थान
- हरिद्वार- गंगा नदी के किनारे, उत्तराखंड
- उज्जैन- शिप्रा नदी के किनारे, मध्य प्रदेश
- नासिक- गोदावरी नदी के किनारे, महाराष्ट्र
- प्रयागराज- गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर, उत्तर प्रदेश
5. कुंभ मेला के प्रकार
- महाकुंभ- 144 सालों में एक बार आयोजित होता है और यह सिर्फ प्रयागराज में होता है।
- अर्ध कुंभ- हर 6 साल में आयोजित होता है। यह हरिद्वार और प्रयागराज में होता है।
- पूर्ण कुंभ- हर 12 साल में आयोजित होता है और यह चार स्थानों पर हो सकता है।
- माघ मेला- हर साल आयोजित होता है और इसे "छोटा कुंभ" भी कहते हैं। यह विशेष रूप से प्रयागराज में होता है।
6. कुंभ मेला का इतिहास
7. महाकुंभ का आयोजन क्यों होता है?
8. कब और कहां हुआ था पहला कुंभ मेला?
9. महाकुंभ के महत्व
10. प्रयागराज में कुंभ मेला कब होता है?
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava