MP में भाजपा की 29 सीटें...आदिवासियों का भी मिला साथ

भाजपा ने 6 राज्यों में क्लीन स्वीप किया है, लेकिन मप्र की 29 सीटें सबसे अधिक चर्चा में है। चुनाव के बाद जब इस जीत का कारण जाना गया तो यह बात सामने आई कि यहां संगठन और संघ में जोरदार समन्वय रहा।

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Aparajita Priyadarshini
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मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है। यहां  भारतीय जनता पार्टी ने सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी ने कांग्रेस के एक मात्र सीट छिंदवाड़ा पर भी इस बार कब्जा जमा लिया है। प्रदेश में कांग्रेस को उम्मीद थी कि 3-4 सीटों पर जीत दर्ज हो सकती है, लेकिन कांग्रेस के दिग्गजों को वहां भी हार का मुंह देखना पड़ा है। आइए जानते हैं मध्य प्रदेश में भाजपा के जीत की वजह

आदिवासी क्षेत्र में भाजपा की जीत का कारण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्य प्रदेश के झाबुआ में हर बूथ पर 370 वोट बढ़ाने का जो मंत्र दिया था, वही यहां भाजपा की जीत का मजबूत आधार बना। पीएम मोदी ने कहा था कि हर बूथ पर पिछले तीन चुनाव में मिले परिणाम निकालिए, जब भी सबसे ज्यादा वोट मिले हों, उसमें 370 वोट और जोड़ लीजिए। इसी मंत्र पर भाजपा संगठन ने बूथ प्रबंधन का मॉडल खड़ा किया और सभी 29 सीटों पर जीत का लक्ष्य पा लिया।

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विधानसभा से बढ़ गया वोट प्रतिशत

मध्य प्रदेश में करीब छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को 48.55 प्रतिशत मत मिले थे और कांग्रेस को 40.40 प्रतिशत। यह पहली बार नहीं हुआ है। 1984 के बाद से जब भी प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बाद लोकसभा चुनाव हुए, भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा है। 2018 के विधानसभा चुनावों में 41.02 प्रतिशत वोट भाजपा को मिले थे, जबकि उसके बाद 2019 लोकसभा चुनावों में करीब 58.5 प्रतिशत वोट उसे मिले थे।  

राम मंदिर आंदोलन के साथ बढ़ी भाजपा की ताकत

1980 में भाजपा की स्थापना हुई और 1984 का लोकसभा चुनाव पार्टी का राज्य में पहला बड़ा चुनाव था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में कांग्रेस ने 57.1 प्रतिशत वोट के साथ राज्य की सभी 40 में से 40 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा को तब 30 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद के पांच साल में जैसे-जैसे राम मंदिर आंदोलन ने गति पकड़ी, भाजपा को आधार मिलता गया। भाजपा ने 1989 में 39.7 प्रतिशत वोट के साथ 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को 37.7 प्रतिशत वोट के साथ सिर्फ आठ सीटें मिली थीं। 1991 में कांग्रेस ने दिल्ली की कुर्सी पर वापसी की, लेकिन भाजपा का वोट नहीं घटा। कांग्रेस ने 45.3 प्रतिशत वोट के साथ 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़कर 41.9 प्रतिशत हुआ था। उसे 12 सीटों पर ही जीत मिली थी। 1996 में 41.3 प्रतिशत वोट के साथ 27 सीटें, 1998 में 45.7 प्रतिशत वोट के साथ 30 सीटें और 1999 में भाजपा ने 46.6 प्रतिशत वोट के साथ 29 सीटों पर जीत हासिल की थी। 

पीएम मोदी ने राज्य में आक्रामक प्रचार किया

2014 में मोदी लहर ऐसी चली कि भाजपा ने 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल की। सिर्फ गुना ( ज्योतिरादित्य सिंधिया ) और छिंदवाड़ा (कमलनाथ) में ही कांग्रेस को जीत मिली। भाजपा को 54.8 प्रतिशत वोट मिले थे और कांग्रेस को सिर्फ 35.4 प्रतिशत। 2019 में तो लहर और बड़ी हो गई। भाजपा को मिले 58.5 प्रतिशत वोट और 28 सीटें। इस बार गुना में सिंधिया को उनके करीबी रहे केपी यादव ने धूल चटाई थी। छिंदवाड़ा जरूर कांग्रेस का अभेद्य किला बना रहा। कांग्रेस का वोट प्रतिशत 34.8 प्रतिशत रहा था। अब 2024 में भाजपा ने वोट प्रतिशत को और बढ़ाकर करीब 59.5 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं। सिंधिया भाजपा के टिकट पर थे, इस वजह से गुना में आसानी से जीते। छिंदवाड़ा में जरूर कांग्रेस

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