62 करोड़ रुपए कैपेसिटर का खर्च, MP सरकार हर साल 1425 करोड़ दे रही सरचार्ज, 937 करोड़ में तो किसानों को मिल जाए फ्री बिजली  

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Rahul Sharma
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62 करोड़ रुपए कैपेसिटर का खर्च, MP सरकार हर साल 1425 करोड़ दे रही सरचार्ज, 937 करोड़ में तो किसानों को मिल जाए फ्री बिजली  

BHOPAL. आप और हम सरकार को टैक्स देते हैं, इस मंशा से कि हमारे टैक्स से जो राशि सरकारी खजाने में पहुंचा रही है उससे प्रदेश का विकास होगा, पर अब हम आपको जो बताने जा रहे हैं उसे सुनकर आप चौक जाएंगे। द सूत्र की पड़ताल में हम आपको बताएंगे कि कैसे आपके और हमारे जैसे टैक्सपेयर की गाढ़ी कमाई का पैसा सरकार लुटा रही है। मामला बिजली कंपनी और किसानों से जुड़ा है। किसानों के बिजली बिल पर सरकार 94.45% सब्सिडी देती है। इस सब्सिडी के नाम पर हर साल सरकार बिजली कंपनी को 1425 करोड़ रुपए बेवजह ही दे रही है। क्यों...यह तो हम आपको आगे बताएंगे ही, लेकिन पहले ये जान लीजिए कि किसानों के नाम पर जो ये करोड़ों का अनुदान बिजली कंपनी को दिया जा रहा है इससे किसानों का कोई खास लेनादेना नहीं है।



सरकार बिजली बिल माफ कर दे तब भी बचेंगे 425 करोड़



किसानों के पंप में कैपेसिटर नहीं होने पर बिजली कंपनी हर साल 1425 करोड़ रुपए जुर्माने के रूप में वसूल रही है। जबकि कैपेसिटर लगाने का खर्चा मात्र 62.5 करोड़ है। यदि सरकार प्रत्येक किसान के स्थाई कनेक्शन पर कैपेसिटर लगा दे तब भी सरकार के पास 1362.5 करोड़ बचेंगे। 1 किसान हर साल 3750 रुपए का बिजली बिल दे रहा है, मतलब 25 लाख किसान हर साल अपनी ओर से 937.5 करोड़ बिजली कंपनी को दे रहा है। कैपेसिटर लगाने के बाद यदि यह बिल भी किसानों का सरकार ही जमा कर दे तब भी 425 करोड़ सरकारी खजाने में बच जाएंगे। 



क्यों लगाया जाता है कैपेसिटर सरचार्ज



मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पीआरओ मनोज द्विवेदी ने बताया कि कैपेसिटर सरचार्ज उन किसानों पर लगाया जाता है जो अपने कनेक्शन में इसे नहीं लगाते हैं। सामान्य भाषा में कहें तो यह एक तरह का जुर्माना ही है, जो कैपेसिटर नहीं लगाने के लिए वसूला जाता है। मनोज द्विवेदी ने बताया कि कैपेसिटर रिएक्टिव पॉवर को रोकता है। जिससे पंप को स्मूथ सप्लाई मिलती है। कैपेसिटर नहीं लगाने पर हम उतना चार्ज किसानों को लेते हैं, क्योंकि रिएक्टिव पॉवर से बिजली कंपनी के उपकरण खराब होते हैं। 



अब समझिए किसान के बिजली बिल और सब्सिडी कनेक्शन



प्रदेश में करीब 1 करोड़ किसान हैं, इनमें करीब 34 लाख किसान अपने पंपों को चलाने के लिए बिजली कंपनी से कनेक्शन लिया है। इसमें सरकार 94.45% सब्सिडी देती है। यह सब्सिडी हर छह महीने में किसान के बिजली बिल के नाम पर दी जाती है जो बिजली कंपनी के पास जाती है। बिजली कंनेक्शन पंप की क्षमता के अनुसार दिए जाते हैं और उसी के आधार पर दर भी अलग-अलग होती है, लेकिन अधिकांश कनेक्शन 5 एचपी के पंप के लिए होते हैं। 



यह है सब्सिडी का पूरा गणित



5 एचपी कनेक्शन को ही यदि हम औसत मानकर गणना करें तो हर 6 महीने में एक बिल पर सरकार अपनी ओर से 27186 रुपए सब्सिडी देती है। इंदिरा किसान ज्योति योजना से 1875 रुपए की सब्सिडी मिलती है, कैपेसिटर सरचार्ज का 2850 रुपए भी सरकार ही वहन करती है। ऐसे में 6 महीने के एक बिल पर सब्सिडी की राशि 31911 रुपए होती है। कुल बिल की राशि 33786 रुपए होती है, सब्सिडी को हटाकर किसान एक बिल का सिर्फ 1875 रुपए बिजली कंपनी को हर 6 महीने में देता है। मतलब कुल बिल राशि का किसान सिर्फ 5.55% राशि ही चुकाता है।



कैपेसिटर सरचार्ज के नाम पर करोड़ों की बर्बादी



किसान के बिजली बिल में अकेले कैपेसिटर सरचार्ज के नाम पर सरकार हर साल करोड़ों की बर्बादी कर रही है। भारतीय किसान संघ के महामंत्री चंद्रकांत गौर ने कहा कि जिस कैपेसिटर सरचार्ज का सरकार एक बिल पर हर 6 महीने में 2850 रुपए और हर साल 5700 रुपए बिजली कंपनी को दे रही है, आपको जानकर यह हैरानी होगी कि वह कैपेसिटर (5 एचपी के पंप के लिए 1 केवीआर के कैपेसिटर का इस्तेमाल होता है) मार्केट में अच्छे से अच्छे कंपनी का 250 से 300 रुपए में आता है। मतलब ये कि यदि हर किसान के बिजली बिल में कैपेसिटर सरचार्ज देने की जगह सरकार किसानों को कैपेसिटर ही खरीदकर दे दे तो सिर्फ एक बिल में ही सरकार को एक साल में 5400 रुपए तक बच जाएं। 



ऐसे समझें सरकारी खजाने को हो रहे नुकसान का गणित



प्रदेश में 5 एचपी कनेक्शन में पंप पर कैपेसिटर नहीं होने से बिजली कंपनी किसान पर हर 6 महीने में 2850 रुपए का सरचार्ज लगाती है। हालांकि, यह सरचार्ज किसान नहीं देता बल्कि, यह राशि सरकार बिजली कंपनी को चुकाती है। मतलब एक साल में सरकार किसान के एक कनेक्शन पर 5700 रुपए जुर्माने के तौर पर बिजली कंपनी को देती है। प्रदेश में करीब 25 लाख किसानों का औसतन 5 एचपी का ही कनेक्शन मान लिए जाए तो इसका मतलब यह हुआ कि सरकार हर साल 1425 करोड़ रुपए बिजली कंपनी को दे रही है। जबकि यही सरकार यदि हर किसान को कैपेसिटर लगा दे तो सिर्फ एक बार ही 62.5 करोड़ का खर्चा आएगा। यह पूरा आंकड़ा 25 लाख किसानों पर निकाला गया है, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि 34 लाख किसानों का यह आंकड़ा कितना अधिक होगा।  



किस कंपनी के कितने कृषि के स्थाई कनेक्शन



वर्ष 2021-22 की बात करें तो मध्यप्रदेश में 34 लाख से अधिक कृषि के स्थाई कनेक्शन है। इसमें सबसे ज्यादा पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 13 लाख 66 हजार कनेक्शन है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी दूसरे नंबर पर है, यहां 11 लाख 36 हजार कृषि के स्थाई कनेक्शन है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 9 लाख कृषि के स्थाई कनेक्शन है।


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