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BHOPAL. भोपाल में सागर पब्लिक स्कूल की मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। नया विवाद कारोना काल में स्कूल टीचर को वेतन नहीं देने और उसे जॉब से निकाल देने से जुड़ा है। सागर पब्लिक स्कूल रोहित नगर भोपाल की पूर्व म्यूजिक टीचर अनिता पठोदिया के मामले में कोर्ट की अवमानना को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने सागर ग्रुप के चेयरमेन सुधीर अग्रवाल और सागर पब्लिक स्कूल रोहित नगर भोपाल की प्रिंसिपल मधुबाला चौहान को नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब 31 जनवरी से पहले देना है।
आदेश था कि वेतन में 20 प्रतिशत से ज्यादा कटौती ना हो
म्यूजिक टीचर अनिता पठोदिया सागर पब्लिक स्कूल की रोहित नगर ब्रांच में पदस्थ थी जिन्हें अचानक 25 अगस्त 2022 को निकाल दिया। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वकील हितेंद्र गोलहानी ने बताया कि हाईकोर्ट ने याचिका क्रमांक 8463/2020 के अंतर्गत 4 नवंबर 2020 को ये आदेश दिया था कि किसी भी प्राइवेट स्कूल टीचर्स की सैलरी में 20 प्रतिशत से अधिक की कटौती न हो और यदि इससे ज्यादा की कटौती की जा रही है तो लॉकडाउन खत्म होने के बाद ये राशि 6 किश्तों के माध्यम से टीचर्स को लौटा दी जाएगी।
म्यूजिक टीचर का 50 प्रतिशत वेतन काटा
अनिता पठोदिया की सैलरी में सागर पब्लिक स्कूल ने 50 प्रतिशत तक कटौती की। जब पठोदिया ने जनवरी 2022 से ये सैलरी मांगी तो प्रबंधन उनके साथ वाद-विवाद करने लगा और 25 अगस्त 2022 को उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया जिसके बाद कोर्ट में अवमानना याचिका प्रस्तुत की। याचिका को स्वीकारते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी किए हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक ले चुका है संज्ञान
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सैलरी में की गई अधिक कटौती को लेकर अनिता पठोदिया ने जैसे ही सवाल उठाने शुरू किए स्कूल मैनेजमेंट उन्हें प्रताड़ित करने लगा। मैनेजमेंट स्कूल कैंपस में मौजूद स्टाफ क्वार्टर को खाली करने का दबाव बना रहा था। कोविड की दूसरी लहर से हुई परेशानियों को लेकर जब अनिता पठोदिया ने इस तरह के रवैये का विरोध किया तो उसे बार-बार जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया जाने लगा। इसके बाद अनिता ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) से की। आयोग ने मामले में 3 अक्टूबर को संज्ञान लेकर भोपाल कलेक्टर, एसपी समेत स्कूल शिक्षा विभाग को नाटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की। 14 अक्टूबर को रिपोर्ट सबमिट भी हो गई पर ये सार्वजनिक नहीं हो सकी।
सागर पब्लिक स्कूल के मामले में बौने हो जाते हैं अधिकारी
आम व्यक्ति कोई छोटा-सा भी नियम तोड़े तो उस पर कार्रवाई करने के लिए अधिकारी हमेशा तैयार हो जाते हैं लेकिन सागर पब्लिक स्कूल के मामले में ये अधिकारी हमेशा बौने साबित होते हैं। अनिता पठोदिया ने अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार की शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी की। अनिता को 27 सितंबर को डीपीआई ने सुनवाई के लिए बुलाया गया। सुनवाई के दौरान अधिकारियों का रवैया इकतरफा स्कूल के पक्ष में था। अनिता ने ग्रेच्यूटी, पीएफ समेत अन्य बिंदुओं पर जो जानकारी मांगी थी, वो भी उपलब्ध नहीं कराई। याचिकाकर्ता की ओर से मामले में लोक शिक्षण संचालनालय कमिश्नर अभय वर्मा, ज्वाइंट डायरेक्टर राजीव सिंह तोमर, कलेक्टर अविनाश लवानिया, जिला शिक्षा अधिकारी भोपाल नितिन सक्सेना और सीबीएसई की रीजनल आफीसर मीनू जोशी को रिस्पोंडेंट बनाया गया था। हाईकोर्ट ने इन्हें रिमूव करने के आदेश दिए हैं।
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कोरोना काल में फीस वसूली मामले में माफी मांग चुका है SPS
कोर्ट की अवमानना को ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले कोरोना काल में फीस वसूली मामले में सागर पब्लिक स्कूल को हाईकोर्ट लताड़ चुका है। मामले में अपनी गलती मानते हुए SPS को कोर्ट में माफी तक मांगना पड़ी और 118 बच्चों की 20 लाख 62 हजार 430 रुपए की अतिरिक्त फीस तक लौटाई। इसके बाद 22 सितंबर 2022 को मामले का पटाक्षेप हुआ था।