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शेख रेहान, KHANWA. खंडवा मंडी में प्रदेश का पहला सौदा राष्ट्रीय कृषि बाजार E-NAM पोर्टल के माध्यम से कराया। यह सौदा कपास की खरीदी को लेकर था। कपास खरीदी का E-NAM के माध्यम से ख़िरीदी बिक्री देश मे अबतक का पहला। जहां खंडवा के एक व्यापारी ने जलगांव मंडी में एक किसान से 40 क्विंटल कपास खरीदा और लगभग पौने चार लाख रुपए का भुगतान ई नाम पोर्टल के जरिए किया गया।
E-NAM पोर्टल से किसानों को मिलता है बेहतर मूल्य
भारत सरकार ने किसानों की फसल की खरीदी बिक्री में बिचौलियों को खत्म करने और उपज का बेहतर भाव मिलने के लिए ऑनलाइन राष्ट्रीय कृषि बाजार तैयार किया है, जिसे म्.छ।ड नाम दिया गया है। इससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिलता है और व्यापारियों को माल की उत्तम क्वालिटी। लेकिन तकनीकी जानकारी की कमी और असुरक्षा की भावना के चलते किसान इससे दूरी बनाए हुए थे। केंद्र सरकार की कोशिश यही है कि किसान अपना माल ऑनलाइन तरीके से देश में कहीं भी बेच सकता है और देश का कोई भी व्यापारी इस माल को खरीद सकता है।
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खंडवा के व्यापारी ने जलगांव के किसान से खरीदा कपास
कृषि उपज मंडी के सचिव ओम प्रकाश खेडे ने बताया कि खंडवा मंडी में प्रदेश का पहला सौदा इसी राष्ट्रीय कृषि बाजार पोर्टल के जरिए कराया गया। जिसमें खंडवा के एक व्यापारी ने यही बैठे-बैठे जलगांव के एक किसान से लगभग 40 क्विंटल कपास खरीदा। कपास का बेस मूल्य 6 हजार रुपए क्विंटल रखा गया था। अलग-अलग बीट के चलते खंडवा के व्यापारी ने 9300 रुपए क्विंटल के भाव से यह माल खरीदा।
मंडी प्रशासन की जानकारी के बाद हमने E-NAM पोर्टल पर पंजीयन कराया था
खंडवा के व्यापारी अंकुर जैन ने बताया कि खंडवा मंडी प्रशासन ने हमें जानकारी दी। उसके बाद राष्ट्रीय कृषि बाजार पोर्टल पर अपना हमने पंजीयन करवाया था। महाराष्ट्र के जलगांव क्षेत्र में अच्छी क्वालिटी का कपास पैदा होता है। इसी के चलते उन्होंने वहां का कपास खरीदा। इन्होंने पहले एक प्रतिनिधि को क्वालिटी देखने के लिए जलगांव मंडी में भेजा और स्वयं उन्होंने खंडवा में बैठे हुए E-NAM पोर्टल के माध्यम से कपास खरीदने बोली लगाई खरीदी की। इस तरह महाराष्ट्र जलगांव के किसान को उनके कपास का बहुत ही अच्छा भाव मिला और व्यापारी को अच्छी क्वालिटी का कपास। अंकुर जैन का कहना है कि इस पोर्टल के माध्यम से किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य मिल सकता है और भविष्य में इस बाजार की संभावनाएं किसानों के हित में होगी।
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