जयस की राजनीति में एंट्री: MP उपचुनाव में उतारेगा प्रत्याशी, इन चेहरों पर खेलेगा दांव

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जयस की राजनीति में एंट्री: MP उपचुनाव में उतारेगा प्रत्याशी, इन चेहरों पर खेलेगा दांव

भोपाल. मध्यप्रदेश की सियासत में खलबली मचाने वाली खबर है कि जयस यानि जय युवा आदिवासी संगठन (JAYS) राजनीति में आधिकारिक तौर पर एंट्री कर रहा है। प्रदेश में एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (By Election) है, जिनमें से खंडवा लोकसभा सीट और अलीराजपुर (Alirajpur) जिले की जोबट (Jobat) विधानसभा सीट पर जयस अपने उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी कर चुका है। जयस का आदिवासी (Adivasi) बाहुल्य सीटों पर वर्चस्व है। इस कारण उपचुनाव में जयस प्रत्याशी उतारकर बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों का खेल बिगाड़ सकता है। इस सामाजिक संगठन का यह पहला चुनाव है। हालांकि, जयस के फाउंडर मेंबर हीरालाल अलावा (Hiralal Alawa) मनावर सीट से विधायक है लेकिन उन्होंने 2018 विधानसभा में कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ा था।

जोबट से नीतेश अलावा को उतारने की तैयारी

अलीराजपुर जिले की जोबट विधानसभा सीट पर जयस के उम्मीदवार के तौर पर पहला नाम नीतेश अलावा (Nitish Alawa) का है। उन्हें चुनावी मैदान में उतारने के लिए कैंपेन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शुरू हो चुका है। नीतेश अलावा एक निलंबित पटवारी है, दरअसल पिछले दिनों नेमावर में हुए हत्याकांड के बाद जयस ने यहां मोर्चा संभाला था और धरना दिया था, जिसमें नीतेश अलावा भी शामिल हुए थे। सरकार विरोधी गतिविधियों के आरोप में नीतेश को सस्पेंड कर दिया गया। अब नीतेश अलावा को चुनाव लड़ना है तो पटवारी की नौकरी से इस्तीफा देना पड़ेगा। द सूत्र से बातचीत में नीतेश अलावा ने साफ कर दिया है कि सोमवार को वो अपना इस्तीफा देंगे और जहां तक चुनाव लड़ने का सवाल है तो ये आदिवासी समुदाय की तरफ से मांग उठी है इसलिए वो चुनावी मैदान में उतरेंगे।

इस्तीफा मंजूर न होने पर प्लेन बी

अगर नीतेश अलावा का इस्तीफा मंजूर नहीं होता या फिर उसमें कोई दिक्कत आती है। इसके लिए जयस ने प्लान बी भी तैयार किया हुआ है। मुकेश रावत जयस की तरफ से दूसरा चेहरा है जो नीतेश अलावा के मैदान में ना उतरने पर जोबट से चुनाव लड़ सकते हैं। इसकी पूरी प्लानिंग कर ली गई है।

जयस ने आंदोलनों से मौजूदगी दर्ज कराई

जयस जोबट में दांव क्यों लगा रहा है और जोबट में चुनाव लड़ने की जयस की तैयारियां क्या है। इस पर बात की जाए तो जोबट एक आदिवासी बाहुल्य सीट है और पिछले दिनों जोबट सीट के हर ब्लॉक में जयस ने आंदोलन कर सियासी माहौल गरमाया है। जोबट विधानसभा सीट में  उदयगढ़, कट्ठीवाड़, जोबट, भाबरा और आमुआ ये पांच ब्लॉक आते हैं। उदयगढ़ को छोड़कर जयस ने हर ब्लॉक में आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन किया है और अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई है। 

जयस बिगाड़ सकता है कांग्रेस का खेल

जोबट में जयस के चुनाव में मैदान में उतरने से कांग्रेस के समीकरण बदलेंगे क्योंकि जोबट सीट परंपरागत तौर पर कांग्रेस की सीट रही है। पिछले 20 सालों के चुनावी इतिहास की बात करें तो 2013 के इलेक्शन को छोड़ दिया जाए तो इस सीट से कांग्रेस का ही उम्मीदवार जीतता रहा है। 2018 में कलावती भूरिया यहां से चुनाव जीतीं थी। हालांकि, गौर करने वाली बात ये भी है कि 2018 के चुनाव में विशाल पटेल कांग्रेस से बागी होकर चुनावी मैदान में थे। इसके बावजूद कलावती भूरिया जीतने में कामयाब हुई, ऐसे में अब जयस मैदान में होगा तो जाहिर है कि त्रिकोणीय मुकाबला होगा। इस कारण कांग्रेस को दमदार चेहरे को मैदान में उतारना पड़ेगा। पिछले दिनों पीसीसी चीफ कमलनाथ (Kamal Nath) का बयान आया था कि कांग्रेस के जिस उम्मीदवार को जयस का समर्थन हासिल होगा उसे टिकट मिलेगा तो इसे लेकर जयस का साफ कहना है कि जयस अपने दम पर चुनाव लड़ने जा रही है कांग्रेस के समर्थन की जरूरत नहीं है।

जयस गेमचेंजर साबित हो सकता है

दूसरी तरफ बीजेपी की बात की जाए तो बीजेपी अलीराजपुर के पूर्व विधायक नागर सिंह चौहान की पत्नी को टिकट दे सकती है। खंडवा लोकसभा सीट (Khandwa Loksabha) को लेकर भी जयस की तरफ से दारा सिंह का नाम करीब करीब फाइनल माना जा रहा है। खंडवा लोकसभा की चार विधानसभा सीटें (पंधाना, भीकनगांव, बागली और नेपानगर) यहां जयस का अच्छा खासा प्रभाव है और ये आदिवासी बाहुल्य सीटें है। ऐसे में जानकारों की माने तो जयस इन उपचुनावों में गेमचेंजर की भूमिका निभा सकता है। बहरहाल, इन उपचुनाव के नतीजों से तय होगा कि 2023 तक मप्र (MP Assembly Election 2013) की सियासत किस रूप में नजर आएगी।

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