चाय की एक चुस्की से रिश्तों में घुलेगी मिठास
The Sootr | Jul 12, 2026, 11:55 IST
husband wife relationship communication
पति-पत्नी के बीच तालमेल की कमी रिश्तों में दरार ला देती है। सुनंदा और राकेश की यह कहानी सिखाती है कि कैसे काम के दबाव और संवाद की कमी से मध्यमवर्गीय परिवारों में तनाव बढ़ता है।
सुनंदा (काल्पनिक नाम) एक गृहिणी थी। वह घर के सभी काम संभालती थी, बच्चों की देखभाल करती थी और साथ ही अपना छोटा-सा ऑनलाइन काम भी करती थी। दूसरी ओर उसके पति राकेश (बदला हुआ नाम) एक प्राइवेट नौकरी में थे।
राकेश को सुबह 10 बजे ऑफिस पहुंचना होता था। इसके लिए वे सुबह 8 बजे घर से निकल जाते और शाम 6 बजे ऑफिस से छुट्टी होने के बाद रात लगभग 8 बजे घर पहुंचते। यानी कुल मिलाकर वे लगभग 12 घंटे घर से बाहर रहते थे।
दिनभर की भागदौड़ और थकान के बाद राकेश यह उम्मीद लेकर घर लौटते कि अब उन्हें थोड़ा सुकून मिलेगा। लेकिन घर पहुंचते ही सुनंदा के पास शिकायतों और अधूरे कामों की एक लंबी सूची उनका इंतजार कर रही होती। कई बार घर में कदम रखते ही राकेश का मन खिन्न हो जाता और तनाव बढ़ जाता।
जब यह दंपति काउंसलिंग के लिए मेरे पास आया, तब मैंने पाया कि इनके बीच कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं थी। समस्या केवल यह थी कि दोनों एक-दूसरे की परिस्थितियों और ज़रूरतों को समझ नहीं पा रहे थे।
राकेश के लिए रोज़ घर पहुंचते ही कामों और शिकायतों की लंबी सूची सुनना तनाव का कारण बन रहा था। वहीं सुनंदा भी अपनी जगह पूरी तरह थक चुकी थी। पूरे दिन बच्चों की ज़िम्मेदारी, घर के काम और साथ में अपना ऑनलाइन काम-इन सबका दबाव उसके लिए भी कम नहीं था।
राकेश की एक आदत थी कि घर आते ही वे खाना खाते, थोड़ी देर मोबाइल पर वीडियो देखते और फिर सो जाते, क्योंकि अगली सुबह फिर जल्दी उठकर ऑफिस जाना होता था। यदि देखा जाए तो उनके पास परिवार के लिए वही कुछ घंटे होते थे, जिनमें उन्हें आराम भी करना था, सोना भी था और परिवार के साथ समय भी बिताना था।
मैंने सबसे पहले सुनंदा से अकेले में बात की और उससे पूछा, "तुम अपने पति से क्या उम्मीद करती हो?" मैंने उससे एक सूची बनवाई।
उसकी सूची में कुछ बहुत साधारण बातें थीं-
उनकी अपेक्षाएं भी बहुत सामान्य थीं-
यह केवल सुनंदा और राकेश की कहानी नहीं है। भारत के अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों में किसी न किसी रूप में यही कहानी रोज़ घटती है।
हमने बहुत बड़े बदलाव नहीं किए।
राकेश ने केवल दो छोटे काम अपने हिस्से में ले लिए-
तनाव हमारे भीतर मौजूद प्रेम और सुरक्षा की भावना को दबा देता है।
जब सुनंदा को यह महसूस हुआ कि उसका पति उसके साथ खड़ा है, तब उसने भी घर लौटते ही शिकायतों की लंबी सूची सुनाना लगभग बंद कर दिया। उसने बहुत लंबी सूची बनाई थी, लेकिन केवल दो-तीन छोटे बदलावों ने ही रिश्ते की दिशा बदल दी।
कुछ समय बाद दोनों दोबारा मिले। इस बार दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी। सुनंदा ने धन्यवाद कहा। राकेश ने भी धन्यवाद कहा। दोनों के बीच पहले से कहीं अधिक अपनापन और प्रेम था।
हम अक्सर इसे "घर के काम में हाथ बंटाना" कहते हैं, लेकिन कई बार यही काम हमारे जीवनसाथी के लिए सेवा बन जाता है।
महिलाओं को सुरक्षा और साथ का अनुभव चाहिए। पुरुषों को भी ऐसा साथी चाहिए जो उनके सुख-दुःख में मानसिक सहारा बन सके।
यदि पति-पत्नी केवल इतनी-सी बात समझ जाएं, तो बहुत-सी समस्याएं अपने आप हल होने लगती हैं।
जब हमारे नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है, तब हमारे भीतर दूसरों के प्रति प्रेम स्वतः पैदा होने लगता है। लेकिन जब दोनों ही तनाव में हों, तब प्रेम व्यक्त करना भी कठिन हो जाता है।
ऐसी स्थिति में केवल एक-दूसरे के लिए दस-दस मिनट निकालकर दो-दो छोटे काम अपने जिम्मे लेना भी रिश्तों में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
मैंने अपनी काउंसलिंग में ऐसे अनेक परिवारों को केवल इन छोटे-छोटे बदलावों से बदलते हुए देखा है। इसका सबसे सकारात्मक प्रभाव बच्चों पर भी पड़ता है।
हमारा व्यवहार भी एक प्रकार की कम्युनिकेशन लैंग्वेज है। हम अपने व्यवहार से सामने वाले के नर्वस सिस्टम को यह संदेश देते हैं-
जो व्यक्ति दर्द की दवा बन जाता है, वही सम्मान पाता है।
अपने जीवनसाथी के दर्द को बढ़ाने वाले नहीं, बल्कि उसकी दवा बनने की कोशिश कीजिए।
यदि आपके रिश्ते में बार-बार छोटी-छोटी नोकझोंक होती है, तो आज ही अपने पार्टनर से बातचीत कीजिए।
एक सूची बनाइए
"बताइए, ऐसे कौन-से दो काम हैं जिन्हें मैं आज से शुरू कर सकता हूं?"
फिर उन दो कामों को नियमित रूप से कीजिए।
शुरुआत में थोड़ा असहज लगेगा, लेकिन विश्वास रखिए, यही छोटी-सी असुविधा आगे चलकर आपके रिश्ते में बहुत बड़ा सुकून लेकर आएगी।
मान लीजिए दिनभर तनाव रहा। रात में बहस भी हो गई। लेकिन यदि आप दोनों ने यह तय किया है कि सुबह की चाय पति बनाएगा या पत्नी बनाएगी, और अगले दिन बिना किसी बहस के वही चाय समय पर मिल जाती है, तो यह केवल चाय नहीं होती।
नर्वस सिस्टम इसे एक अलग संदेश के रूप में पढ़ता है-
"He/She cares for me."
"वह मेरी परवाह करता/करती है।"
लेकिन यदि केवल गुस्से के कारण वह चाय नहीं बनाई गई, जबकि पहले से ऐसा तय था, तो नर्वस सिस्टम एक अलग संदेश ग्रहण करता है-
"मेरी परवाह नहीं की गई।"
यहीं से दूरी बढ़ने लगती है।
नर्वस सिस्टम हमारे मस्तिष्क और शरीर के बीच संचार का माध्यम है। जितना सुरक्षित हमारा नर्वस सिस्टम महसूस करता है, उतना ही बेहतर हमारे विचार, भावनाएं और व्यवहार एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाते हैं।
लेकिन यदि नर्वस सिस्टम असुरक्षित महसूस कर रहा हो, तो मस्तिष्क सही संदेश देना चाहता है, शरीर सही काम करना चाहता है, फिर भी व्यवहार वैसा नहीं हो पाता।
कई बार हम सोचते हैं-
"आज चाय बना देता हूं..."
लेकिन भीतर से आवाज़ आती है- "इतना किया, फिर भी लड़ाई ही होती है।"
और हम वह छोटा-सा काम भी नहीं कर पाते।
इसलिए रिश्तों का सबसे बड़ा विज्ञान केवल व्यवहार नहीं, बल्कि नर्वस सिस्टम तक सुरक्षा का संदेश पहुंचाना है।
तो साथियों, इसे करके देखिए।
विश्वास मानिए, चाय की एक छोटी-सी चुस्की आपके रिश्तों में ऐसी मिठास घोल सकती है, जिसकी शुरुआत केवल दस मिनट की एक छोटी-सी सेवा से होती है।
ये भी पढ़ें...
मैं इतना करती हूं फिर भी वो नोटिस नहीं करते… कैसे बचाएं अपनी लव लाइफ
Relationship Tips: महिलाओं में बढ़ा वेडिंग बर्थडे का क्रेज, दुल्हन बनकर मना रही हैं अपना बर्थडे
Relationship Tips: गलतफहमियों से बचने के लिए शादी से पहले जरूर पूछें ये सवाल
Gen Z Relationships: क्या कहती है नई पीढ़ी के लिए प्यार और कमिटमेंट की नई रिलेशनशिप डिक्शनरी
राकेश को सुबह 10 बजे ऑफिस पहुंचना होता था। इसके लिए वे सुबह 8 बजे घर से निकल जाते और शाम 6 बजे ऑफिस से छुट्टी होने के बाद रात लगभग 8 बजे घर पहुंचते। यानी कुल मिलाकर वे लगभग 12 घंटे घर से बाहर रहते थे।
दिनभर की भागदौड़ और थकान के बाद राकेश यह उम्मीद लेकर घर लौटते कि अब उन्हें थोड़ा सुकून मिलेगा। लेकिन घर पहुंचते ही सुनंदा के पास शिकायतों और अधूरे कामों की एक लंबी सूची उनका इंतजार कर रही होती। कई बार घर में कदम रखते ही राकेश का मन खिन्न हो जाता और तनाव बढ़ जाता।
जब यह दंपति काउंसलिंग के लिए मेरे पास आया, तब मैंने पाया कि इनके बीच कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं थी। समस्या केवल यह थी कि दोनों एक-दूसरे की परिस्थितियों और ज़रूरतों को समझ नहीं पा रहे थे।
राकेश के लिए रोज़ घर पहुंचते ही कामों और शिकायतों की लंबी सूची सुनना तनाव का कारण बन रहा था। वहीं सुनंदा भी अपनी जगह पूरी तरह थक चुकी थी। पूरे दिन बच्चों की ज़िम्मेदारी, घर के काम और साथ में अपना ऑनलाइन काम-इन सबका दबाव उसके लिए भी कम नहीं था।
राकेश की एक आदत थी कि घर आते ही वे खाना खाते, थोड़ी देर मोबाइल पर वीडियो देखते और फिर सो जाते, क्योंकि अगली सुबह फिर जल्दी उठकर ऑफिस जाना होता था। यदि देखा जाए तो उनके पास परिवार के लिए वही कुछ घंटे होते थे, जिनमें उन्हें आराम भी करना था, सोना भी था और परिवार के साथ समय भी बिताना था।
समय बीतने के साथ दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया
उसकी सूची में कुछ बहुत साधारण बातें थीं-
- सुबह पति उसके लिए चाय बना दें।
- शाम को घर लौटने के बाद घर के काम में थोड़ा हाथ बंटा दें।
- बच्चों के होमवर्क में थोड़ा सहयोग कर दें।
उनकी अपेक्षाएं भी बहुत सामान्य थीं-
- सुबह समय पर टिफिन, खाना और कपड़े मिल जाएं।
- शाम को घर लौटने पर शिकायतों की जगह थोड़ा सुकून मिले, क्योंकि वे पहले से ही दिनभर की थकान लेकर लौटते हैं।
यह केवल सुनंदा और राकेश की कहानी नहीं है। भारत के अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों में किसी न किसी रूप में यही कहानी रोज़ घटती है।
फिर ऐसा क्या हुआ कि केवल दो महीने में उनका रिश्ता बदल गया?
राकेश ने केवल दो छोटे काम अपने हिस्से में ले लिए-
- सुबह चाय बनाना।
- शाम को बच्चों का होमवर्क देखना और स्कूल से जुड़े कामों में सहयोग करना।
- साथ ही अपने उपयोग के कुछ छोटे-छोटे काम स्वयं करना।
तनाव हमारे भीतर मौजूद प्रेम और सुरक्षा की भावना को दबा देता है।
जब सुनंदा को यह महसूस हुआ कि उसका पति उसके साथ खड़ा है, तब उसने भी घर लौटते ही शिकायतों की लंबी सूची सुनाना लगभग बंद कर दिया। उसने बहुत लंबी सूची बनाई थी, लेकिन केवल दो-तीन छोटे बदलावों ने ही रिश्ते की दिशा बदल दी।
कुछ समय बाद दोनों दोबारा मिले। इस बार दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी। सुनंदा ने धन्यवाद कहा। राकेश ने भी धन्यवाद कहा। दोनों के बीच पहले से कहीं अधिक अपनापन और प्रेम था।
घर का काम नहीं, कई बार यह सेवा होती है
महिलाओं को सुरक्षा और साथ का अनुभव चाहिए। पुरुषों को भी ऐसा साथी चाहिए जो उनके सुख-दुःख में मानसिक सहारा बन सके।
यदि पति-पत्नी केवल इतनी-सी बात समझ जाएं, तो बहुत-सी समस्याएं अपने आप हल होने लगती हैं।
नर्वस सिस्टम को सुरक्षा चाहिए
ऐसी स्थिति में केवल एक-दूसरे के लिए दस-दस मिनट निकालकर दो-दो छोटे काम अपने जिम्मे लेना भी रिश्तों में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
मैंने अपनी काउंसलिंग में ऐसे अनेक परिवारों को केवल इन छोटे-छोटे बदलावों से बदलते हुए देखा है। इसका सबसे सकारात्मक प्रभाव बच्चों पर भी पड़ता है।
हमारा व्यवहार भी एक प्रकार की कम्युनिकेशन लैंग्वेज है। हम अपने व्यवहार से सामने वाले के नर्वस सिस्टम को यह संदेश देते हैं-
- "मैं तुम्हारे साथ हूं।"
- "मैं तुम्हारी परवाह करता हूं।"
- "मैं तुम्हारा तनाव कम करना चाहता हूं।"
याद रखिए
अपने जीवनसाथी के दर्द को बढ़ाने वाले नहीं, बल्कि उसकी दवा बनने की कोशिश कीजिए।
आप आज से क्या कर सकते हैं?
एक सूची बनाइए
- "ऐसे कौन-से काम हैं, जिन्हें करने से तुम्हें थोड़ी राहत मिलेगी?"
- हो सकता है किसी की सूची लंबी हो और किसी की छोटी।
- शुरुआत केवल दो सरल कामों से कीजिए।
अपने पार्टनर से पूछिए
फिर उन दो कामों को नियमित रूप से कीजिए।
शुरुआत में थोड़ा असहज लगेगा, लेकिन विश्वास रखिए, यही छोटी-सी असुविधा आगे चलकर आपके रिश्ते में बहुत बड़ा सुकून लेकर आएगी।
एक कप चाय भी रिश्ते बदल सकती है
नर्वस सिस्टम इसे एक अलग संदेश के रूप में पढ़ता है-
"He/She cares for me."
"वह मेरी परवाह करता/करती है।"
लेकिन यदि केवल गुस्से के कारण वह चाय नहीं बनाई गई, जबकि पहले से ऐसा तय था, तो नर्वस सिस्टम एक अलग संदेश ग्रहण करता है-
"मेरी परवाह नहीं की गई।"
यहीं से दूरी बढ़ने लगती है।
पूरा खेल नर्वस सिस्टम का है-
लेकिन यदि नर्वस सिस्टम असुरक्षित महसूस कर रहा हो, तो मस्तिष्क सही संदेश देना चाहता है, शरीर सही काम करना चाहता है, फिर भी व्यवहार वैसा नहीं हो पाता।
कई बार हम सोचते हैं-
"आज चाय बना देता हूं..."
लेकिन भीतर से आवाज़ आती है- "इतना किया, फिर भी लड़ाई ही होती है।"
और हम वह छोटा-सा काम भी नहीं कर पाते।
इसलिए रिश्तों का सबसे बड़ा विज्ञान केवल व्यवहार नहीं, बल्कि नर्वस सिस्टम तक सुरक्षा का संदेश पहुंचाना है।
तो साथियों, इसे करके देखिए।
विश्वास मानिए, चाय की एक छोटी-सी चुस्की आपके रिश्तों में ऐसी मिठास घोल सकती है, जिसकी शुरुआत केवल दस मिनट की एक छोटी-सी सेवा से होती है।
लेखक- अमित कुमार निरंजन: सेल्फ एवं रिलेशनशिप ट्रांसफॉर्मेशन कोच (काउंसलिंग साइकॉलोजिस्ट और हिप्नोथेरेपिस्ट) लेखक और पूर्व वरिष्ठ पत्रकार है। इन्होंने आनंद पथ - आंतरिक सुख की सार्थक तलाश नाम की किताब लिखी जो व्यक्तिगत Transformation के विषयों पर आधारित है।
मैं इतना करती हूं फिर भी वो नोटिस नहीं करते… कैसे बचाएं अपनी लव लाइफ
Relationship Tips: महिलाओं में बढ़ा वेडिंग बर्थडे का क्रेज, दुल्हन बनकर मना रही हैं अपना बर्थडे
Relationship Tips: गलतफहमियों से बचने के लिए शादी से पहले जरूर पूछें ये सवाल
Gen Z Relationships: क्या कहती है नई पीढ़ी के लिए प्यार और कमिटमेंट की नई रिलेशनशिप डिक्शनरी
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari