एक जादू की झप्पी रिश्तों को बचा सकती है

The Sootr | Jul 05, 2026, 08:00 IST
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married couples loneliness relationship
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काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट अमित निरंजन बता रहे हैं कि शादीशुदा रिश्तों में कभी-कभी साथ रहकर भी अकेलापन महसूस होता है। समुद्र किनारे पार्टनर का हाथ बढ़ाने पर पीछे खींच लेना, उनके बीच की मानसिक दूरी को दर्शाता है।

क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप अपने जीवनसाथी के साथ समुद्र किनारे टहल रहे हों? मन हो कि उसका हाथ थाम लें, बाहों में बाहें डालकर चलें। खासकर शादीशुदा जोड़ों की बात कर रहा हूं।

लेकिन जैसे ही आप हाथ बढ़ाते हैं, सामने वाला धीरे से हाथ हटा लेता है। वह आपके साथ चलते हुए भी कहीं और खोया हुआ लगता है। लहरों को देख रहा है, लोगों को देख रहा है, हवा को महसूस कर रहा है-लेकिन आपको महसूस नहीं कर पा रहा।

उस पल मन में एक ही सवाल उठता है

"क्या यह मुझसे दूर हो चुका है? क्या यह अब मुझसे प्यार नहीं करता?"

आइए, आज इस पहेली को थोड़ा समझने की कोशिश करते हैं।
मेरे सेशन्स में ऐसे कई दंपति आते हैं जिनकी कुछ लोगों की शिकायत यही होती है-

"मैं रोज़ 'I Love You' कहती हूं, फिर भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।"
या
"मैं उसे अपना प्यार दिखाना चाहता हूं, लेकिन वह महसूस ही नहीं करता।"

तो आखिर इसकी वजह क्या हो सकती है?

प्रधान इंद्रिय और Kinesthetic Preference

हमारे मस्तिष्क में बाहर की दुनिया का सभी डाटा इन्द्रियों के माध्यम से जाता है. मष्तिक अपनी conditioning से इस Data को प्रोसेस करता है, इसी आधार पर हम दुनिया को अनुभव करते हैं।

देखने (Visual), सुनने (Auditory) और महसूस करने (Kinesthetic) के तरीके हर व्यक्ति में मौजूद होते हैं। लेकिन कई लोगों में इनमें से कोई एक माध्यम अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी दिखाई देता है। मनोविज्ञान की विधा NLP (Neuro linguistic program) की भाषा में इसे Sensory Preference कहा जाता है।

कुछ लोग शब्दों की तुलना में स्पर्श, निकटता और साझा अनुभवों के माध्यम से भावनाओं को अधिक गहराई से महसूस करते हैं। ऐसे लोगों के लिए प्रेम केवल सुना नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है। हालांकि ये यूनिवर्सल सत्य नहीं है.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं कि सामने वाला किस श्रेणी में आता है, बल्कि यह समझना है कि वह प्रेम को किस तरह सबसे सहजता से ग्रहण करता है।

मान लीजिए पति की भावनात्मक प्राथमिकता स्पर्श और अनुभव (Kinesthetic) से अधिक जुड़ी है और पत्नी को इसकी जानकारी नहीं। पत्नी बारबार "I Love You" कहकर अपना प्रेम व्यक्त करती है। पति मुस्कुरा देता है, लेकिन वैसी प्रतिक्रिया नहीं देता जैसी पत्नी उम्मीद करती है।

इसका अर्थ यह नहीं कि वह प्रेम नहीं करता। संभव है कि उसके लिए भावनाओं का अनुभव शब्दों से अधिक व्यवहार, निकटता और स्पर्श के माध्यम से होता हो।

अब कल्पना कीजिए कि वही पत्नी बिना कुछ कहे उसका हाथ पकड़ ले या उसे आत्मीयता से गले लगा ले।
कई लोगों के लिए ऐसी एक सच्ची झप्पी जादू की तरह काम करेगा, लंबे शब्दों की तुलना में कहीं अधिक गहरा भावनात्मक प्रभाव छोड़ सकती है।

पुराने अनुभव भी असर डालते हैं

मनोविज्ञान के शोध से पता चलता है कि हम हर अनुभव को केवल वर्तमान में नहीं जीते। कई बार हम सामने वाले के आज के व्यवहार को भी अपने पुराने अनुभवों की नज़र से देखने लगते हैं

यदि किसी व्यक्ति ने बचपन में स्नेह कम पाया हो, रिश्तों में बारबार चोट खाई हो या भावनात्मक दूरी का अनुभव किया हो, तो कई बार उसे प्रेम स्वीकार करने में समय लग सकता है। इसलिए सामने वाला प्यार नहीं करता, यह निष्कर्ष हमेशा सही नहीं होता।

कामकाजी जीवन और भावनात्मक थकान

खासकर कामकाजी दंपतियों में यह दूरी अक्सर दिखाई देती है। ति पूरे दिन की थकान लेकर घर आता है। पत्नी पानी देती है, खाना परोसती है, हर छोटीबड़ी जरूरत का ध्यान रखती है। फिर भी उसे लगता है कि उसके सारे प्रयास अनदेखे रह गए।

ऐसे में यदि वह यह समझ पाए कि उसके साथी के लिए भावनात्मक निकटता यानी जादू की झप्पी किस रूप में सबसे अधिक अर्थ रखती है, तो रिश्ता बदलना शुरू हो सकता है।

कई लोगों के लिए एक जादू की झप्पी केवल स्नेह का संकेत नहीं होता, बल्कि वह भीतर सुरक्षा और अपनत्व का एहसास भी जगा सकता है। जब मन को सुरक्षा का एहसास होता है, तो बातें अपनेआप आसान होने लगती हैं।

Kinesthetic Preference वाले लोगों में अक्सर दिखाई देने वाली बातें

हालांकि हर व्यक्ति अलग होता है, फिर भी ऐसे लोगों में कुछ समान प्रवृत्तियां देखी जा सकती हैं-

  • वे जीवन को केवल समझना नहीं, जीना चाहते हैं।
  • अनुभव करके सीखना उन्हें अधिक सहज लगता है।
  • शारीरिक भागीदारी उनकी अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
  • खुशी, उत्साह और अपनापन उनके पूरे व्यक्तित्व में दिखाई देता है।
  • खेल, फिटनेस, नृत्य या अन्य सक्रिय गतिविधियों की ओर उनका झुकाव हो सकता है।
  • ये लोग श्वास पेट से लेते है यानी deep श्वास होती है।

जमशेदपुर की वह दंपति

मुझे आज भी जमशेदपुर की एक दंपति याद है।

दोनों एकदूसरे से गहरा प्रेम करते थे। दोनों रिश्ता बचाना चाहते थे। लेकिन रोज़ एक ही शिकायत होती थी-
"सामने वाला प्यार व्यक्त ही नहीं करता।"

जब हमने उनकी भावनात्मक अभिव्यक्ति के तरीकों को समझना शुरू किया, तो धीरेधीरे तस्वीर साफ होने लगी।
समस्या प्यार की कमी नहीं थी।

समस्या यह थी कि दोनों प्रेम की भाषा अलगअलग बोल रहे थे।

पत्नी शब्दों में प्रेम व्यक्त कर रही थी। पति अनुभव में उसे खोज रहा था।

जब पत्नी ने शिकायतों की जगह थोड़ा अधिक आत्मीय स्पर्श, हाथ पकड़ना और सहज आलिंगन अपनाया, तो कुछ ही समय में उनके संवाद का स्वर बदलने लगा।

जादू की झप्पी का छोटा अभ्यास

मैंने उनसे एक छोटा अभ्यास करने के लिए कहा। सुबह घर से निकलने से पहले और रात को सोने से पहले बिना किसी औपचारिकता के एक जादू की झप्पी दें।

शुरुआत में थोड़ा संकोच हुआ।

लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने महसूस किया कि बिना ज्यादा शब्दों के भी भावनात्मक दूरी कम होने लगी।

अगर झप्पी देना संभव न हो तो?

हर रिश्ते में आलिंगन सहज हो, यह जरूरी नहीं। ऐसी स्थिति में शांत होकर उनके पास बैठिए।

उनका हाथ अपने हाथ में लेकर धीरेधीरे अपनी बात कहिए।

कई लोगों के लिए प्रेम पहले महसूस होता है, उसके बाद शब्द अर्थ देने लगते हैं।

एक जरूरी बात

यह भी याद रखना चाहिए कि हर व्यक्ति स्पर्श के साथ सहज नहीं होता। कुछ लोगों के जीवन के अनुभव अलग रहे होते हैं। इसलिए किसी भी रिश्ते में स्नेह का सबसे सुंदर रूप वही है जिसमें दोनों की सहजता, सम्मान और सहमति शामिल हो।

बच्चों पर इसका प्रभाव

यह बात केवल पतिपत्नी तक सीमित नहीं है। बच्चे अपने मातापिता को देखकर रिश्तों की भाषा सीखते हैं। जब वे सम्मान, अपनत्व और स्नेह से भरा व्यवहार देखते हैं, तो उनके भीतर भावनात्मक सुरक्षा की भावना विकसित होती है। बच्चे सीखते हैं कि अपनेपन में डर नहीं, भरोसा होता है.

रिश्तों और दैनिक जीवन पर असर

जब भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है, तो अक्सर-

  • अनावश्यक बहसें कम होने लगती हैं।
  • गलतफहमियां जल्दी सुलझती हैं।
  • सुनने और समझने की क्षमता बढ़ती है।
  • घर फिर से भावनात्मक सुरक्षा का स्थान बनने लगता है।
रिश्तों को बदलने के लिए हमेशा बड़े चमत्कार की जरूरत नहीं होती। कई बार सही समय पर थामा गया एक हाथ, एक आत्मीय स्पर्श या एक सच्ची जादू की झप्पी ही वह बात कह देती है, जिसे शब्द कभीकभी नहीं कह पाते।

लेखक- अमित कुमार निरंजन: सेल्फ एवं रिलेशनशिप ट्रांसफॉर्मेशन कोच (काउंसलिंग साइकॉलोजिस्ट और हिप्नोथेरेपिस्ट) लेखक और पूर्व वरिष्ठ पत्रकार है। इन्होंने आनंद पथ - आंतरिक सुख की सार्थक तलाश नाम की किताब लिखी जो व्यक्तिगत Transformation के विषयों पर आधारित है।
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