बच्चा एडॉप्ट करने पर भी मिलेगी 180 दिन की छुट्टी, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Kanak Durga Jha | May 07, 2025, 20:33 IST
180 days leave available even after adopting child High Court decision the sootr
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि मां बनना किसी भी महिला के जीवन की खूबसूरत घटना होती है, ऐसे में मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) छूट नहीं। बल्कि यह मौलिक अधिकार है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि मां बनना किसी भी महिला के जीवन की खूबसूरत घटना होती है, ऐसे में मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) छूट नहीं। बल्कि यह मौलिक अधिकार है। लीव अप्रूव करते समय जैविक, सरोगेसी और गोद लेने वाली मां में भेदभाव नहीं किया जा सकता। अवकाश से वंचित करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
जस्टिस विभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने अपने फैसले में 2 दिन की नवजात बच्ची को गोद लेने वाली महिला अधिकारी को 180 दिन की चाइल्ड एडॉप्शन लीव देने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सिर्फ 84 दिन की छुट्टी दी गई थी।
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रायपुर के IIM में कार्यरत महिला अधिकारी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, इसमें बताया कि उनकी नियुक्ति IIM में साल 2013 में हुई थी। वे वर्तमान में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी शादी 2006 में हुई थी, लेकिन बच्चे नहीं हुए।
20 नवंबर 2023 को उन्होंने 2 दिन की नवजात बच्ची को गोद लिया। इसके बाद 180 दिन की छुट्टी के लिए आवेदन किया, लेकिन संस्थान ने 18 दिसंबर 2023 को यह कहते हुए मना कर दिया कि मानव संसाधन नीति में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सिर्फ 60 दिन की परिवर्तित छुट्टी दी गई।
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महिला अधिकारी की तरफ से पैरवी करते एडवोकेट ने बताया कि संस्थान की नीति में स्पष्ट है कि जहां नियम मौन हो, वहां केंद्र सरकार के नियम लागू होंगे। केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियम 1972 के नियम 43-बी और 43-सी के तहत वह 180 दिन की छुट्टी की हकदार हैं। उन्होंने कई बार उच्च अधिकारियों से अनुरोध किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
इसके बाद राज्य महिला आयोग से संपर्क किया। आयोग की सिफारिश के बावजूद संस्थान ने सिर्फ 84 दिन की छुट्टी दी। हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए कहा कि महिला अधिकारी को पहले ही 84 दिन की छुट्टी दी जा चुकी है। अब बाकी 96 दिन की छुट्टी भी दी जाए।
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हाईकोर्ट ने कहा है कि मातृत्व अवकाश सिर्फ लाभ नहीं, बल्कि अधिकार है। जैविक, सरोगेट या गोद लेने वाली मां में कोई फर्क नहीं किया जा सकता। नवजात को मां की देखभाल की जरूरत होती है। उसे पालन-पोषण की जरूरत होती है और यही वह सबसे महत्वपूर्ण अवधि होती है, जिसमें बच्चे को मां की जरूरत होती है।
बच्चे के जीवन के पहले वर्ष में बहुत कुछ सीखने को मिलता है, बच्चा भी बहुत कुछ सीखता है। स्नेह का बंधन भी विकसित होता है, ऐसे में उसे दूसरों की दया पर नहीं छोड़ा जा सकता। मातृत्व अवकाश से वंचित करना जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
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जस्टिस विभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने अपने फैसले में 2 दिन की नवजात बच्ची को गोद लेने वाली महिला अधिकारी को 180 दिन की चाइल्ड एडॉप्शन लीव देने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सिर्फ 84 दिन की छुट्टी दी गई थी।
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महिला अधिकारी ने नवजात बच्ची को गोद लिया
20 नवंबर 2023 को उन्होंने 2 दिन की नवजात बच्ची को गोद लिया। इसके बाद 180 दिन की छुट्टी के लिए आवेदन किया, लेकिन संस्थान ने 18 दिसंबर 2023 को यह कहते हुए मना कर दिया कि मानव संसाधन नीति में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सिर्फ 60 दिन की परिवर्तित छुट्टी दी गई।
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वकील ने कहा- केंद्र सरकार का नियम लागू हो
इसके बाद राज्य महिला आयोग से संपर्क किया। आयोग की सिफारिश के बावजूद संस्थान ने सिर्फ 84 दिन की छुट्टी दी। हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए कहा कि महिला अधिकारी को पहले ही 84 दिन की छुट्टी दी जा चुकी है। अब बाकी 96 दिन की छुट्टी भी दी जाए।
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हाईकोर्ट ने कहा- ये मौलिक अधिकार का हनन
बच्चे के जीवन के पहले वर्ष में बहुत कुछ सीखने को मिलता है, बच्चा भी बहुत कुछ सीखता है। स्नेह का बंधन भी विकसित होता है, ऐसे में उसे दूसरों की दया पर नहीं छोड़ा जा सकता। मातृत्व अवकाश से वंचित करना जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
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