दुर्ग अफीम कांड में सस्पेंड हुई कृषि विस्तार अधिकारी को क्लीन चिट, सरकार ने खत्म किया एकता साहू का निलंबन

Arun Tiwari | Apr 03, 2026, 16:15 IST
Agricultural Extension Officer Suspended cg Durg Opium Scandal Receives Clean Chit
दुर्ग के बहुचर्चित अफीम खेती कांड में निलंबित कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को सरकार ने बहाल कर दिया। समोदा गांव में 5 एकड़ में अवैध अफीम मिली थी। मामले में भाजपा नेता सहित 7 आरोपी जेल में, जांच जारी।

Raipur : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सामने आए बहुचर्चित अफीम खेती कांड में एक अहम प्रशासनिक फैसला सामने आया है। शासन ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू का निलंबन रद्द कर उन्हें फिर से सेवा में बहाल कर दिया है। यह मामला पहले ही अवैध अफीम उत्पादन, प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक कनेक्शन को लेकर सुर्खियों में रहा है। ऐसे में यह फैसला चर्चा का विषय बन गया है।



यह है पूरा मामला:

दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में मक्के की फसल की आड़ में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती किए जाने का मामला उजागर हुआ था। इस पूरे घटनाक्रम में कृषि विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई थी। एकता साहू पर आरोप था कि उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र के खेतों का सही तरीके से भौतिक सत्यापन नहीं किया। कागजों में जिन खेतों में मक्का दर्शाया गया था, वहां वास्तविकता में अवैध अफीम की खेती चल रही थी। इसी लापरवाही के चलते प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था।



एकता साहू की बहाली:

अब सरकार ने इस मामले की समीक्षा के बाद उनका निलंबन समाप्त कर दिया है। बहाली के साथ ही उन्हें विकासखंड धमधा स्थित वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी कार्यालय में पदस्थ किया गया है। इस फैसले के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जांच में उन्हें क्लीन चिट मिली है या फिर यह केवल प्रशासनिक निर्णय है।



छापेमारी पर आया था मामला सामने:

इस मामले का खुलासा उस वक्त हुआ था जब दुर्ग पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने ग्राम समोदा में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया। करीब 5 एकड़ जमीन पर मक्के की आड़ में अफीम की फसल तैयार की जा रही थी। मौके से करीब 8 करोड़ रुपए कीमत की अफीम और उससे जुड़े पौधे बरामद किए गए थे।



प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे खेत पर ट्रैक्टर चलवाकर अवैध फसल को नष्ट कर दिया था। यह कार्रवाई राज्य में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता मानी गई थी।



बीजेपी नेता गिरफ्तार:

इस पूरे मामले में पुलिस ने अब तक भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को मुख्य आरोपी मानते हुए गिरफ्तार किया है। उनके साथ ही उनके सहयोगियों समेत कुल 7 लोगों को हिरासत में लेकर जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियां अब इस सिंडिकेट के अन्य संभावित कनेक्शन और नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।



प्रशासनिक लापरवाही उजागर:

इस केस ने न केवल छत्तीसगढ़ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। खासतौर पर कृषि विभाग की भूमिका और खेतों के सर्वेक्षण प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। फिलहाल, एकता साहू की बहाली के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है। जहां एक ओर आरोपी जेल में हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारी की वापसी ने जांच की दिशा और निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को किस निष्कर्ष तक पहुंचाती हैं और क्या इस मामले में और भी बड़े खुलासे होते हैं।



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