निजी स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई; भारी बस्ते और किताबों के बोझ तले दब रहा बचपन, प्रशासन सख्त, नोटिस जारी
NEWS IN SHORT
- पांच स्कूलों पर कार्रवाई शुरू की गई है।
- न्यू डीपीएस में बच्चों का बस्ता सीबीएसई के मानक से अधिक भारी पाया गया हैं ।
- निजी किताबों का दबाव बढ़ने से शिक्षा खर्च में अनावश्यक वृद्धि हुई है।
- बच्चों को सीढ़ियाँ चढ़ते वक्त भारी बैग की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
- शिक्षा विभाग ने स्कूलों को सुधार के लिए नोटिस जारी किया है।
NEWS IN DETAIL
सरगुजा। सरगुजा जिले के अंबिकापुर में स्थित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़े कई निजी स्कूलों में नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। जांच में पता चला है कि कई स्कूल बच्चों के स्वास्थ्य से लेकर शैक्षणिक दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं। एक ताजा मामले में न्यू पब्लिक स्कूल में कई खामियां पाई गई हैं।
18 किलो के बच्चे का 6 किलो का बस्ता
जांच में सामने आया कि कक्षा पहली के छात्र का वजन 18 किलोग्राम था, जबकि उसके बैग का वजन 6 किलोग्राम था। सीबीएसई के अनुसार, बच्चे के बस्ते का वजन उसके कुल वजन का 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
इस हिसाब से छात्र का बैग केवल 1.8 किलोग्राम का होना चाहिए था, लेकिन यह दोगुना वजन पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भारी बैग बच्चों के शारीरिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
निजी प्रकाशकों की किताबें, NCERT की अनदेखी
जांच में यह भी पाया गया कि न्यू डीपीएस में नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को एनसीईआरटी की किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ाई जा रही थीं।
सीबीएसई के निर्देश के अनुसार, स्कूलों को सरकारी पाठ्यक्रम की किताबों को प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन यहां इसका उल्लंघन किया जा रहा था। अभिभावकों का आरोप है कि निजी किताबों की वजह से शिक्षा खर्च बढ़ रहा है।
एक ही दुकान से किताबों की खरीदारी का दबाव
जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को किताबें और कॉपियां एक ही दुकान, मेसर्स एमपी डिपार्टमेंटल स्टोर, अंबिकापुर से खरीदने के लिए मजबूर किया। इससे अभिभावकों को विकल्प नहीं मिलते और उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
पालकों की चिंता बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर
पालक-शिक्षक समिति की बैठक के दौरान अभिभावकों ने बच्चों के बढ़ते शैक्षणिक बोझ और भारी बस्ते के कारण उनकी मानसिक सेहत पर हो रहे नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंता जताई हैं। बच्चों पर बढ़ते दबाव को लेकर उन्होंने स्कूल प्रशासन से सुधार की मांग की हैं।
सीढ़ियों पर चढ़ते छोटे बच्चे, सुरक्षा पर सवाल
अंबिकापुर के कई स्कूलों में नर्सरी और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को भारी बैग के साथ पहली और दूसरी मंजिल पर चढ़ना पड़ता है। यह व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं मानी जा रही है। कुछ स्कूलों में स्थिति इसके उल्टा है, जहां बड़ी कक्षाएं निचे और छोटी कक्षाएं ऊपरी मंजिलों पर संचालित की जा रही हैं।
शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई, नोटिस जारी
अभिभावकों की शिकायतों के आधार पर शिक्षा विभाग ने न्यू डीपीएस और अन्य स्कूलों की जांच शुरू की है। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने स्कूल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नोटिस में यह भी पूछा गया है कि क्यों न स्कूल में पढ़ाई कर रहे 638 छात्रों से वसूली गई फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाए।
अब तक पांच स्कूलों को नोटिस जारी
अब तक अंबिकापुर शहर के पांच निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है, जिसमें न्यू पब्लिक स्कूल भी शामिल है। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से जवाब मांगा है और सुधार की दिशा में जल्द कार्रवाई करने की बात कही है।
निष्कर्ष
यह मामला केवल न्यू पब्लिक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य निजी स्कूलों में भी इसी तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। शिक्षा विभाग की कार्रवाई से उम्मीद है कि बच्चों के स्वास्थ्य और उनके भविष्य से जुड़ी इन गंभीर मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा और सुधार की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
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