छत्तीसगढ़ में अमृत फॉर्मेसी खुलने से उठे सवाल, लैब के बाद दवा में भी HLL कंपनी
VINAY VERMA | Jun 25, 2026, 12:31 IST
अमृत फ़ार्मेसी और HLL लैब्स ने सेक्टर में एंट्री की
सरकारी अस्पतालों में अमृत फॉर्मेसी खोलने के आदेश ने स्वास्थ्य विभाग में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार मुफ्त दवा व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म कर मरीजों को बाजार से दवा खरीदने की ओर धकेल रही है।
समझें क्या है पूरा मामला
- अस्पतालों में खुलेंगी अमृत फॉर्मेसी
- मुफ्त जगह देने का आदेश जारी
- जन औषधि और धनवंतरी योजना पर सवाल
- ओपीडी मरीजों की मुफ्त दवा पर संशय
- कांग्रेस ने निजीकरण का आरोप लगाया
अमृत फॉर्मेसी पर विवाद
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
एम्स मॉडल से जुड़ी आशंका
ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि सरकारी अस्पतालों में भी इसी तर्ज पर अमृत फॉर्मेसी का विस्तार किया गया तो भविष्य में ओपीडी मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि अमृत फॉर्मेसी को लेकर जारी आदेश के बाद मरीजों, स्वास्थ्यकर्मियों और राजनीतिक दलों के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
अब दवा व्यवस्था में भी एचएलएल
अमृत फार्मेसी खोलने पर सवाल उठ रहे हैं
क्या जन औषधि योजना फेल हो गई?
धनवंतरी योजना को किनारे लगाया जा रहा?
सीजीएमएससी दवा सप्लाई में नाकाम?
OPD मरीजों की मुफ्त दवा बंद होगी ?
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
सरकार को देना होगा जवाब
FAQ
- अमृत फॉर्मेसी क्या है और यह कैसे काम करती है?
उ. अमृत फॉर्मेसी केंद्र सरकार की पहल पर HLL हेल्थकेयर लिमिटेड द्वारा संचालित दवा दुकान है। यह मुख्यतः एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में होती है जहाँ ब्रांडेड और जेनेरिक दवाएं बाजार दर से 20 से 50 प्रतिशत तक सस्ती मिलती हैं। अब इसे छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में भी खोला जाने वाला है। - OPD मरीजों को अभी मुफ्त दवा मिलती है — क्या यह बंद होगी?
उ. अभी तक सरकार ने OPD मरीजों की मुफ्त दवा बंद करने की घोषणा नहीं की है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की आशंका है कि एम्स जैसे मॉडल में OPD मरीजों को कई दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। अगर यही मॉडल यहाँ भी लागू हुआ तो मुफ्त दवा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। - HLL हेल्थकेयर लिमिटेड को पहले क्या काम सौंपा गया था?
उ. HLL हेल्थकेयर लिमिटेड केरल की एक सरकारी कंपनी है। छत्तीसगढ़ में पहले ही सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब सेवाएं इसे सौंपी जा चुकी हैं। इस फैसले के बाद करीब 6 हजार कर्मचारियों को लैब से हटाया जा रहा है। अब दवा वितरण में भी इसी कंपनी की भूमिका की बात हो रही है।
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