ट्रांसफार्मर ब्लास्ट में पिता और दो बेटों की मौत, एक घर से उठी तीन अर्थियां

Harrison Masih | Sept 26, 2026, 10:13 IST
ट्रांसफार्मर ब्लास्ट में पिता और दो बेटों की मौत
बेमेतरा के मोहतरा गांव में ट्रांसफार्मर फटने से तीन किसान बुरी तरह झुलस गए थे। करीब पांच दिन इलाज के बाद तीनों की मौत हो गई। मृतकों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

बेमेतरा जिले के मोहतरा गांव में खेत में काम करने के दौरान ट्रांसफार्मर फटने से झुलसे तीन किसानों की इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसा 20 सितंबर को हेमबंद खार में हुआ था। ट्रांसफार्मर में जोरदार धमाका होने के बाद गर्म तेल और आग की लपटें आसपास फैल गईं, जिसकी चपेट में तीनों किसान आ गए।



हादसे में ईश्वर पटेल (62), राधेश्याम चंद्राकर (50) और उनके बेटे छन्नू चंद्राकर (32) गंभीर रूप से झुलस गए थे। तीनों को पहले बेमेतरा जिला अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर रेफर किया गया, जहां करीब पांच दिनों तक उनका इलाज चला।



इलाज के दौरान तीनों की मौत

शुक्रवार को इलाज के दौरान तीनों किसानों ने दम तोड़ दिया। राधेश्याम चंद्राकर और उनके बेटे छन्नू चंद्राकर का शुक्रवार को ही अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, ईश्वर पटेल का अंतिम संस्कार शनिवार को मोहतरा गांव में किया जाएगा।



खेत में काम करते समय हुआ हादसा

ग्रामीणों के अनुसार, तीनों किसान खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान ट्रांसफार्मर में अचानक तेज धमाका हुआ। ट्रांसफार्मर से निकला गर्म तेल दूर तक फैल गया, जिससे तीनों किसान बुरी तरह झुलस गए।



हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। रायपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान राधेश्याम और उनके बेटे छन्नू की एक साथ मौत हो गई। छन्नू की उम्र सिर्फ 32 साल थी और उनके छोटे बच्चे हैं।



ईश्वर पटेल के बेटे प्रकाश पटेल ने बताया कि उनके पिता का पोस्टमार्टम हो चुका है। शनिवार को मोहतरा में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।



एक ही हादसे में तीन किसानों की मौत के बाद गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों में घटना को लेकर नाराजगी भी है।



प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

हादसे के पांच दिन बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि के गांव नहीं पहुंचने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि पीड़ित परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और बिजली विभाग की ओर से उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच और पीड़ित परिवारों को उचित सहायता देने की मांग की है।



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