सवाल पूछो तो ED घर आती है: बिलासपुर में बरसे बघेल, सरकार पर लगाए तानाशाही के आरोप
छत्तीसगढ़ की राजनीति में गुरुवार को 'संवेदना' और 'संघर्ष' का एक अनूठा संगम देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के भाई के निधन पर शोक व्यक्त करने उनके निवास बिलासपुर पहुंचे। लेकिन इस निजी यात्रा के बाद जब बघेल मीडिया से मुखातिब हुए, तो उन्होंने प्रदेश की वर्तमान साय सरकार पर भ्रष्टाचार, तानाशाही और विपक्षी दमन को लेकर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला।
शिष्टाचार के बीच सियासत
बघेल ने सबसे पहले धरमलाल कौशिक के परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर शोक सभा में शामिल होना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की उस रवायत को दर्शाता है, जहां दुख के समय पक्ष-विपक्ष एक साथ खड़ा होता है। हालांकि, संवेदना जताने के तुरंत बाद बघेल ने प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया।
भ्रष्टाचार पर प्रहार
पूर्व मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि आज प्रदेश में ऐसा कोई विभाग नहीं बचा है जहां बिना कमीशन काम हो रहा हो। उन्होंने दो विभागों पर गंभीर सवाल उठाए।
- PWD विभाग: बघेल ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग में बिना टेंडर निकाले ही 'वर्क ऑर्डर' जारी किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर नियमों की धज्जियां उड़ाना है।
- कृषि विभाग: उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग अब अफीम और गांजे की खेती को बढ़ावा दे रहा है, जो राज्य के भविष्य के लिए खतरनाक है।
- पेयजल और शराब : बघेल ने तंज कसा कि भीषण गर्मी में जनता पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता गली-गली शराब की नदियां बहाने में है।
लोकतंत्र और तानाशाही
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर बात करते हुए भूपेश बघेल ने केंद्र और राज्य सरकार पर 'दमनकारी' होने का आरोप लगाया। उन्होंने कवासी लखमा का उदाहरण देते हुए कहा:
"आज के दौर में सवाल पूछना सबसे बड़ा अपराध हो गया है। जब कवासी लखमा ने विधानसभा में जनता की आवाज उठाई, तो सरकार ने उनके घर ED भेज दी। यह विपक्ष की आवाज दबाने और डराने की राजनीति है।"
उन्होंने आगे कहा कि चाहे धर्मांतरण कानून (धर्म स्वातंत्र्य विधेयक) हो या असम चुनाव के रुझान, सरकार केवल असली मुद्दों से ध्यान भटकाने और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
निष्कर्ष
बघेल का यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति और अधिक गरमाने वाली है। एक ओर जहां उन्होंने व्यक्तिगत रिश्तों की गरिमा बनाए रखी। वहीं दूसरी ओर सरकार के खिलाफ 'भ्रष्टाचार' और 'लोकतंत्र के दमन' को मुख्य चुनावी हथियार बनाने का इरादा भी साफ कर दिया।
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