सचिन-निर्मला सीतारमण के नाम पर साइबर ठगी, भिलाई के पूर्व सैनिक से 45 लाख ऐंठे

Umeshwari Baghel | Aug 16, 2026, 15:14 IST
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BSP रिटायर्ड से 45 लाख की ठगी
BSP रिटायर्ड से 45 लाख की ठगी

भिलाई में रिटायर्ड BSP कर्मचारी से ऑनलाइन निवेश के नाम पर 45.18 लाख रुपए की ठगी हुई। ठगों ने सचिन तेंदुलकर और निर्मला सीतारमण के नाम से फर्जी विज्ञापन दिखाकर भरोसा जीता और अलग-अलग बहानों से रकम जमा करा ली। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • फर्जी निवेश लिंक से 45 लाख की ठगी
  • सचिन-निर्मला सीतारमण के नाम पर साइबर जाल
  • मुनाफे के लालच में रिटायर्ड कर्मचारी फंसा
  • फेसबुक विज्ञापन बना ठगी का रास्ता
  • ट्रेडिंग के नाम पर लाखों की लूट
Bhilai। भिलाई में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। ऑनलाइन निवेश से मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर एक रिटायर्ड भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) कर्मचारी से 45 लाख रुपए से ज्यादा की रकम ठग ली गई। ठगों ने भरोसा जीतने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और समाजसेवी सुधा मूर्ति जैसे चर्चित लोगों के नाम और तस्वीरों का सहारा लिया।

मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने मध्य प्रदेश के बैतूल से 24 साल के विशाल नागले को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक विशाल 9वीं तक पढ़ा है और मजदूरी करता है। हालांकि, पुलिस का मानना है कि इस ठगी के पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है, जिसके मुख्य आरोपी अभी पकड़े नहीं गए हैं।

फेसबुक पर विज्ञापन देखकर किया था रजिस्ट्रेशन

भिलाई नगर थाना क्षेत्र के हुडको में रहने वाले 61 वर्षीय जयंत बागची इस ठगी का शिकार हुए हैं। वे BSP से रिटायर हैं और पहले भारतीय सेना में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने बताया कि 10 मार्च 2026 को वे फेसबुक चला रहे थे। इसी दौरान उन्हें ऑनलाइन निवेश से जुड़ा एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में देश की जानी-मानी हस्तियों के नाम और फोटो दिखाए गए थे। इससे उन्हें लगा कि निवेश योजना भरोसेमंद हो सकती है।

विज्ञापन में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्होंने अपनी जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन कर दिया। यहीं से ठगों ने उन्हें अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया।

पहले 18 हजार की फीस, फिर शुरू हुआ निवेश

रजिस्ट्रेशन के बाद कृतिका नाम की एक महिला ने जयंत से संपर्क किया। उसने वरिष्ठ नागरिक होने के नाम पर उनसे 18 हजार 998 रुपए की रजिस्ट्रेशन फीस मांगी।

रकम जमा करने के बाद सिद्धार्थ विपुल नाम का व्यक्ति सामने आया। उसने खुद को अकाउंट मैनेजर बताया और ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए अच्छा मुनाफा दिलाने की बात कही। आरोपी ने दावा किया कि उनकी कंपनी अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कारोबार करती है। धीरे-धीरे पीड़ित को भरोसे में लेकर अलग-अलग खातों में पैसे जमा कराए जाने लगे।

गोल्ड और ऑयल ट्रेडिंग के नाम पर गए लाखों रुपए

17 मार्च को जयंत ने एक लाख रुपए जमा किए। इसके बाद 24 और 25 मार्च को पांच-पांच लाख रुपए अलग-अलग खातों में भेजे गए। 26 मार्च को करण तनेजा नाम के व्यक्ति से उनकी बातचीत कराई गई। उसने अंतरराष्ट्रीय तनाव का हवाला देकर कहा कि आने वाले समय में सोने की कीमत बढ़ सकती है। इसी बहाने गोल्ड ट्रेडिंग में ज्यादा निवेश करने के लिए कहा गया।

उसकी बातों में आकर पीड़ित ने 27 मार्च को 25 लाख रुपए और ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 9 अप्रैल को ऑयल ट्रेडिंग के नाम पर पांच लाख और 16 अप्रैल को चार लाख रुपए जमा कराए गए। इस तरह पीड़ित से कुल 45 लाख 18 हजार 998 रुपए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।

स्क्रीन पर दिखाया करोड़ों का मुनाफा

जब जयंत ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू किया, तो ठगों ने उनके कथित ट्रेडिंग अकाउंट में भारी मुनाफा दिखा दिया। अकाउंट में करीब 2.71 लाख अमेरिकी डॉलर की रकम नजर आ रही थी।

पीड़ित ने करीब 2.70 लाख डॉलर निकालने के लिए बैंक डिटेल दी। आरोपियों ने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन है और पैसा दो से तीन दिन में खाते में आ जाएगा। लेकिन रकम मिलने के बजाय उनसे फिर पैसे मांगे जाने लगे।

टैक्स के नाम पर मांगे 34 लाख रुपए

20 अप्रैल को आरोपियों ने कहा कि डॉलर में मिली रकम निकालने के लिए 15 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसके लिए 34 लाख रुपए से ज्यादा की मांग की गई।

पीड़ित ने कहा कि टैक्स की रकम उनके मुनाफे से काट ली जाए और बाकी पैसा दे दिया जाए। इसके बाद ठगों ने मांग घटाकर 12 लाख रुपए कर दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह रकम जमा करते ही पैसा जारी कर दिया जाएगा।

22 अप्रैल को आरोपियों ने अरुणाचल प्रदेश के एक बैंक खाते में RTGS करने को कहा। लगातार नई रकम मांगे जाने पर जयंत को शक हुआ और उन्होंने पैसे भेजना बंद कर दिया।

1930 पर शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

ठगी का अंदेशा होते ही पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की और अपने बैंक को भी सूचना दी।इसके बाद भिलाई नगर थाने में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन की जानकारी खंगाली। जांच के दौरान बैतूल निवासी विशाल नागले का नाम सामने आया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसके पास से बैंक चेकबुक, आधार कार्ड और एक मोबाइल फोन जब्त किया है।

अब पुलिस यह पता लगा रही है कि ठगी के 45 लाख रुपए किन-किन खातों में पहुंचे और पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। साथ ही उन लोगों की तलाश भी की जा रही है, जिन्होंने फर्जी विज्ञापन और निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए इस ठगी की पूरी योजना तैयार की।

FAQ

  1. भिलाई में रिटायर्ड BSP कर्मचारी से कितने रुपए की ठगी हुई?
    भिलाई के रिटायर्ड BSP कर्मचारी से ऑनलाइन निवेश के नाम पर 45 लाख 18 हजार 998 रुपए की साइबर ठगी की गई।
  2. ठगों ने पीड़ित को अपने जाल में कैसे फंसाया?
    ठगों ने फेसबुक पर सचिन तेंदुलकर, निर्मला सीतारमण और सुधा मूर्ति के नाम से फर्जी विज्ञापन दिखाया। इसके बाद ऑनलाइन ट्रेडिंग में बड़ा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर पैसे जमा कराए।
  3. पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
    पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद बैतूल से 24 वर्षीय आरोपी विशाल नागले को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी और पूरे नेटवर्क की तलाश जारी है।

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