भिलाई स्टील प्लांट के लोहे से मिजोरम में बना देश का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे ब्रिज

Harrison Masih | Sept 08, 2025, 12:51 IST
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छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट का स्टील मिजोरम की राजधानी आइजोल को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने वाले बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हुआ। इस प्रोजेक्ट के तहत देश का दूसरा सबसे बड़ा पियर ब्रिज बनाया गया।

छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट (BSP) का स्टील देशभर के मेगा प्रोजेक्ट्स में नई पहचान बना रहा है। चिनाब रेलवे ब्रिज, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और INS विक्रांत जैसे ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स के बाद अब मिजोरम की राजधानी आइजोल में बने देश के दूसरे सबसे बड़े पियर ब्रिज में भी छत्तीसगढ़ का लोहा इस्तेमाल हुआ है।



यह ब्रिज बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिससे आजादी के बाद पहली बार मिजोरम की राजधानी आइजोल रेल नेटवर्क से जुड़ गई है। इस पुल का निर्माण 10 साल से अधिक समय में पूरा हुआ है। इसके बनने से अब 7 घंटे का सफर सिर्फ 3 घंटे में तय किया जा सकेगा।



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बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट: 8,071 करोड़ की लागत

रेल मंत्रालय के मुताबिक, बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट की शुरुआत 2014 में हुई थी। तब इसकी लागत 5,020 करोड़ रुपए थी, लेकिन ब्रिज, टनल और 51.38 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के निर्माण में कुल 8,071 करोड़ रुपए खर्च हुए। यह रेल नेटवर्क भविष्य में म्यांमार बॉर्डर तक भी बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने इसका लोकार्पण कर सकते हैं।



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भिलाई स्टील प्लांट की अहम भूमिका

छत्तीसगढ़ स्टील की पहचान: एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट

भिलाई स्टील प्लांट (BSP) एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है। इसकी स्थापना 1955 में सोवियत संघ की मदद से हुई थी।



  • आयरन ओर: राजहरा माइंस (100 किमी दूर)
  • लाइम स्टोन: नंदिनी माइंस (25 किमी दूर)
  • डोलोमाइट: हिर्री (140 किमी दूर) से लाया जाता है।

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मिजोरम रेलवे ब्रिज निर्माण की 5 मुख्य बातें:


  1. भिलाई स्टील प्लांट का योगदान – बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के लिए BSP से 30-35 हजार टन लोहा भेजा गया, जबकि SAIL की अन्य इकाइयों से कुल 17 हजार टन स्टील सप्लाई हुआ।
  2. देश का दूसरा सबसे बड़ा पियर ब्रिज – मिजोरम की राजधानी आइजोल को जोड़ने वाला यह ब्रिज भारत का दूसरा सबसे बड़ा पियर ब्रिज है।
  3. 8,071 करोड़ की लागत और 10 साल का समय – इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2014 में 5,020 करोड़ की लागत से हुई थी, लेकिन इसे पूरा करने में 8,071 करोड़ रुपए और 10 साल लगे।
  4. 51.38 किमी लंबी रेल लाइन – इस प्रोजेक्ट के तहत टनल, ट्रैक और ब्रिज सहित 51.38 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण हुआ।
  5. सफर होगा आसान – इस ब्रिज और रेल लाइन के शुरू होने से 7 घंटे का सफर अब केवल 3 घंटे में पूरा होगा और भविष्य में यह लाइन म्यांमार बॉर्डर तक जाएगी।

BSP का स्टील पहले भी कई मेगा प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल हो चुका है, जैसे:

  • चिनाब ब्रिज: दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज।
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति।
  • INS विक्रांत: भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर।

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बइरबी-सायरंग ब्रिज की अहमियत

मिजोरम की राजधानी आइजोल पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ी। प्रोजेक्ट से नॉर्थ ईस्ट में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और मिजोरम के विकास को नई दिशा मिलेगी। म्यांमार बॉर्डर तक रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से भारत की सामरिक स्थिति मजबूत होगी।



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