भारत-पाक युद्ध के कारण सबसे बड़ा नक्सल ऑपरेशन बीच में रुका

thesootr Desk | May 10, 2025, 14:56 IST
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छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबलों द्वारा चलाया जा रहा बड़ा नक्सल विरोधी ऑपरेशन अब अस्थाई रूप से रोक दिया गया है। इस ऑपरेशन में दो दर्जन से अधिक नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबलों द्वारा पिछले पखवाड़े से चलाया जा रहा बड़ा नक्सल विरोधी ऑपरेशन अब अस्थाई रूप से रोक दिया गया है। इस ऑपरेशन में दो दर्जन से अधिक नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, वहीं दर्जनों नक्सली गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लेकिन हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच बने तनावपूर्ण हालातों के कारण सुरक्षा रणनीतियों में बदलाव करते हुए इस ऑपरेशन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।



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दो सप्ताह चला भारी अभियान

सीआरपीएफ, डीआरजी और तेलंगाना ग्रेहाउंड्स की संयुक्त टीम ने कर्रेगुट्टा के जंगलों को पूरी तरह से घेर कर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच कई मुठभेड़ें हुईं। मारे गए नक्सलियों में कई वांछित और वर्दीधारी कमांडर शामिल बताए जा रहे हैं।



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सीमा पार तनाव बना कारण

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच एलओसी (नियंत्रण रेखा) पर बढ़ते तनाव और सैन्य सतर्कता को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को संसाधनों और फोर्स की प्राथमिकता बदलनी पड़ी है। इसी कारण कर्रेगुट्टा जैसे स्थानीय स्तर पर चल रहे अभियानों को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।



नक्सल नेटवर्क को लगा बड़ा झटका

अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के कई शस्त्र, विस्फोटक और दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। कर्रेगुट्टा क्षेत्र को नक्सलियों का गोपनीय ठिकाना और प्रशिक्षण स्थल माना जाता था। यह ऑपरेशन नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।



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आगे की रणनीति पर विचार

हालांकि ऑपरेशन को अस्थाई रूप से रोका गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य होंगे, तब इस अभियान को फिर से शुरू किया जा सकता है। साथ ही, स्थानीय खुफिया नेटवर्क को भी सतर्क रखा गया है ताकि बचे हुए नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।



यह ऑपरेशन जहां एक तरफ नक्सलियों की कमर तोड़ने वाला साबित हुआ, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने स्थानीय सुरक्षा रणनीतियों को बदलने पर मजबूर कर दिया है।



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