बिलासपुर के गौठान में 2 दिन में 30 मवेशियों की मौत, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
Harrison Masih | Sept 28, 2026, 11:57 IST
बिलासपुर के गौठान में मवेशियों की मौत
बिलासपुर के गौठान में दो दिनों में करीब 30 मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने चारा-पानी और शेड की कमी का आरोप लगाया है, जबकि सरपंच ने बारिश, ठंड और बीमारी को मौत आरोप लगाया।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक अस्थाई गौठान में दो दिनों के अंदर करीब 30 मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने गौठान में चारा-पानी और बारिश से बचने के लिए शेड की व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया है। कुछ शवों को जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफनाने का आरोप भी लगाया गया है।
मामला सीपत क्षेत्र के ग्राम पंचायत झलमला का है। यहां फसलों को मवेशियों से बचाने के लिए करीब दो महीने पहले खुले मैदान में फेंसिंग तार लगाकर अस्थाई गौठान बनाया गया था। ग्रामीणों के मुताबिक, इस गौठान में करीब 300 मवेशियों को रखा गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गौठान में मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। बारिश से बचने के लिए शेड भी नहीं बनाया गया है। बारिश के बाद गौठान में कीचड़ होने से मवेशियों को काफी परेशानी हो रही है।
बताया जा रहा है कि मनरेगा के तहत पैरा एकत्र कराया गया था, लेकिन मवेशियों को नियमित रूप से चारा नहीं मिलने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि अव्यवस्था के कारण कई मवेशियों की हालत खराब हुई और पिछले दो दिनों में करीब 30 की मौत हो गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मवेशियों की मौत की जानकारी बाहर न आए, इसके लिए जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर कुछ शवों को दफना दिया गया। कुछ शवों को नाले के पानी में बहाने या दूसरी जगह फेंकने की बात भी कही जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मवेशियों की मौत की वास्तविक संख्या और कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
ग्राम पंचायत झलमला के सरपंच धनलाल साहू ने ग्रामीणों के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि फसलों को मवेशियों से बचाने के लिए ग्रामीणों की सहमति से अस्थाई गौठान बनाया गया था।
सरपंच के मुताबिक, पिछले दिनों हुई भारी बारिश और ठंड की वजह से कुछ मवेशियों की मौत हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ मवेशी पहले से बीमार थे। कुछ दिन पहले सीपत से आए पशु चिकित्सकों ने बीमार मवेशियों का इलाज भी किया था।
फिलहाल मवेशियों की मौत को लेकर ग्रामीणों और सरपंच के दावे अलग-अलग हैं। चारा-पानी की व्यवस्था, शवों को दफनाने और मवेशियों की मौत के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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मामला सीपत क्षेत्र के ग्राम पंचायत झलमला का है। यहां फसलों को मवेशियों से बचाने के लिए करीब दो महीने पहले खुले मैदान में फेंसिंग तार लगाकर अस्थाई गौठान बनाया गया था। ग्रामीणों के मुताबिक, इस गौठान में करीब 300 मवेशियों को रखा गया है।
खुले आसमान के नीचे रखे गए मवेशी
बताया जा रहा है कि मनरेगा के तहत पैरा एकत्र कराया गया था, लेकिन मवेशियों को नियमित रूप से चारा नहीं मिलने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि अव्यवस्था के कारण कई मवेशियों की हालत खराब हुई और पिछले दो दिनों में करीब 30 की मौत हो गई।
शवों को दफनाने का आरोप
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मवेशियों की मौत की वास्तविक संख्या और कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
सरपंच ने बारिश और बीमारी को बताया वजह
सरपंच के मुताबिक, पिछले दिनों हुई भारी बारिश और ठंड की वजह से कुछ मवेशियों की मौत हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ मवेशी पहले से बीमार थे। कुछ दिन पहले सीपत से आए पशु चिकित्सकों ने बीमार मवेशियों का इलाज भी किया था।
जांच के बाद साफ होगी मौत की वजह
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