छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी ; पैदल आंध्र जा रहे मवेशी, बड़ा तस्करी सिंडिकेट सक्रिय
Aishwarya Dwivedi | May 10, 2026, 10:01 IST
cattle-smuggling-andhra-syndicate-network
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद से ओडिशा होकर आंध्र प्रदेश तक सक्रिय गौ-तस्करी सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। दलाल और मजदूर जंगलों के रास्ते मवेशियों को पैदल हांककर कसाईखानों तक पहुंचा रहे हैं, जिसमें स्थानीय तंत्र की मिलीभगत संदिग्ध है।
NEWS IN SHORT
- गरियाबंद से ओडिशा होकर आंध्र प्रदेश तक फैला तस्करी का नेटवर्क।
- धरमगढ़ साप्ताहिक बाजार में हर शुक्रवार होता है मवेशियों का सौदा।
- जंगल के रास्तों से 150 किमी पैदल हांककर ले जाते हैं।
- दलाल, मजदूर और स्थानीय तंत्र की मिलीभगत से चलता है खेल।
- 6 साल में महज 21 मामले दर्ज, प्रशासन की निगरानी पर सवाल।
NEWS IN DETAIL
तीन चरणों में चलता है तस्करी का खेल
Cattle Smuggling in Chhattisgarh
यह पूरा रैकेट किसी संगठित कॉर्पोरेट सिस्टम की तरह संचालित होता है, जिसमें स्थानीय दलाल, मजदूर, कथित किसान और क्षेत्रीय तंत्र की सांठगांठ साफ दिखाई देती है। तस्करों का प्रमुख रूट बीजू फोरलेन माना जाता है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की निगरानी से बचने के लिए वे जंगलों, पहाड़ी पगडंडियों और सुनसान कच्चे रास्तों का सहारा लेते हैं।
1. पहला पड़ाव (छत्तीसगढ़ से ओडिशा): तस्करी की शुरुआत देवभोग क्षेत्र से होती है। स्थानीय दलाल कम कीमत पर मवेशियों को इकट्ठा करते हैं और आधी रात को गरियाबंद जिले की सीमा पार कर ओडिशा में प्रवेश कर जाते हैं।
2. दूसरा पड़ाव (धरमगढ़ मंडी): ओडिशा के कालाहांडी जिले में स्थित धरमगढ़ का साप्ताहिक बाजार इस अवैध कारोबार का मुख्य जंक्शन है। हर शुक्रवार को लगने वाली इस मंडी में 5000 से ज्यादा गाय-बैल बिकते हैं। यहां तस्करों के एजेंट किसान बनकर मवेशियों का सौदा करते हैं।
3. तीसरा पड़ाव (आंध्र प्रदेश की सीमा): मंडी से खरीदे गए मवेशियों को वाहनों के बजाय पैदल हांककर ले जाया जाता है। प्रशिक्षित मजदूरों की टोलियां 40-50 मवेशियों के झुंड को लेकर करीब 150 किमी का सफर तय करती हैं। यह सफर कालाहांडी, नवरंगपुर और कोरापुट होते हुए आंध्र प्रदेश के जयपुर और आमपानी घाटी तक पहुंचता है।
मजदूरों और दलालों का सिस्टम
आंकड़ों में तस्करी और प्रशासनिक रुख
इस मामले पर गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके का कहना है कि उन्हें फिलहाल ऐसी कोई विशेष जानकारी नहीं है, लेकिन वे इसकी जांच करवाएंगे। वहीं, एसपी नीरज चंद्राकर ने दावा किया है कि सरहदी इलाकों में चौकसी बढ़ाई गई है और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
FAQ
यह सिंडिकेट छत्तीसगढ़ के गरियाबंद (देवभोग) से शुरू होकर ओडिशा के धरमगढ़ (कालाहांडी) मंडी पहुंचता है। वहां से मवेशियों को पैदल हांकते हुए आंध्र प्रदेश की सीमा तक ले जाया जाता है।
2 . पुलिस रिकॉर्ड में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
साल 2020 से अप्रैल 2026 तक गरियाबंद जिले में कुल 21 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 52 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
3. मवेशियों को ले जाने का क्या तरीका अपनाया जाता है?
स्वस्थ मवेशियों को मजदूरों के जरिए 150 किमी तक पैदल चलाकर जंगलों और घाटियों के रास्ते ले जाया जाता है, जबकि बीमार या बूढ़े मवेशियों को छोटे मालवाहक वाहनों (मेटाडोर) से भेजा जाता है।
निष्कर्ष
यह खबरें भी पढ़ें...
बिलासपुर में गौमांस तस्करी, सूटकेस में गौमांस लेकर जा रही दो महिलाएं गिरफ्तार, इलाके में तनाव
शादी के नाम पर सौदा: जबलपुर से गुना तक फैले मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश
इंदौर के ब्यूटी पार्लर से चला बच्चा तस्करी नेटवर्क: एमपी के चार जिलों में फैला, 6 दिन की बच्ची 1 लाख में बिकी
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman