भारतमाला: जमीनों के खेल में बेल पर छूटे आरोपी फिर जाएंगे जेल, नेता-अफसरों के गिरेबान तक पहुंचा जांच एजेंसी का हाथ

छत्तीसगढ़ में कॅरप्शन का कॉरीडोर बना भारतमाला प्रोजेक्ट की जांच मनी लांड्रिंग तक पहुंच गई है। रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर में भूमि अधिग्रहण के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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Arun Tiwari
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NEWS IN SHORT

    . छत्तीसगढ़ में भारत माला प्रोजेक्ट में फर्जीवाड़ा
    . नेता-अफसरों के गिरेबान तक पहुंचा जांच एजेंसी का हाथ
    . चार आईएएस आए जांच के दायरे में
    . बेल पर छूटे आरोपी फिर जाएंगे जेल

    NEWS IN DETAIL

    कॅरप्शन का कॉरीडोर : 

    छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरीडोर में बड़े पैमाने पर जमीनों का खेल खेला गया है। इसमें नेतओं,अफसरों और जमीन के दलालों ने करोड़ों रुपए का घोटाला किया है। इसकी जांच ईओडब्ल्यू कर रही है। इसके अलावा ईडी भी मनीलांड्रिंग का एंगल देख रही है।

    जांच में तेजी आने से जमानत पर छूटे आधा दर्जन आरोपी दोबारा जेल की सलाखों के पीछे जा सकते हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड जमीनों का दलाल हरमीत खनूजा था। उसने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया था।

     जांच में सामने आया है कि जमीनें भ्रष्टाचार से अर्जित रकम से तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे की पत्नी के साथ मिलकर एक फर्म बनाकर खरीदी गई थीं। इसी फर्म के नाम पर 1.37 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी।

    इसके अलावा आदिवासियों की करीब आठ एकड़ जमीन भी फर्म के नाम पर कराई गई थी। कई किसानों की जमीन अपने नाम पर करवा ली गई, लेकिन उन्हें पूरा भुगतान नहीं किया गया। खनूजा ने तहसीलदार की पत्नी के नाम रजिस्ट्री कर ली थी।

    तहसीलदार की पत्नी के नाम मुआवजा : 

    ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि खनूजा ने तहसीलदार की पत्नी के नाम पर छह एकड़ जमीन खरीदी थी। इस जमीन को 20 टुकड़ों में बांटकर करीब 20 करोड़ का मुआवजा तय कराया गया। बाद में कार्रवाई के डर से नए एसडीएम ने इन बीस टुकड़ों को एक रकबा मानते हुए 20 लाख रुपए ही मुआवजा स्वीकृत किया।

    अब जांच एजेंसी उन सभी जिलों में जांच की तैयारी में है जहां पर जमीन का अधिग्रहण हुआ है। सूत्रों के मुताबिक कुछ आईएएस अधिकारी और कुछ नेतओं से भी इस बारे में पूछताछ हो सकती है। करीब महीने भर पहले रायपुर संभागायुक्त ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके बाद अब कार्यवाही का दायरा और बढ़ाया जा रहा है।   

    78 करोड़ का भुगतान : 

    ईडी की जांच में स्पष्ट हुआ कि भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण में करीब 43 करोड़ रुपये का वास्तविक भुगतान किया गया, जबकि जमीनों को कृत्रिम रूप से छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर एनएचएआई को करीब 78 करोड़ रुपये का भुगतान दिखाया गया। एसडीएम, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस घोटाले को अंजाम दिया।

    अभनपुर क्षेत्र के ग्राम नायकबांधा और उरला में जमीनों को 159 खसरों में विभाजित कर दिखाया गया। मुआवजा पाने की इस प्रक्रिया से 80 ग्राम पंचायतों में शामिल 559.69 एकड़ भूमि की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई, जबकि राजस्व विभाग के मुताबिक वास्तविक मुआवजा करीब 29.5 करोड़ रुपये ही बनता था।

    राज्य सरकार के निर्देश पर ईओडब्ल्यू की जांच शुरू की गई। पहले जगदलपुर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त निर्भय साहू को निलंबित किया गया। फिर कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को भी निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

    ये हैं मुख्य आरोपी :

    हरमीत खनूजा - प्रॉपर्टी डीलर
    निर्भय कुमार साहू - तत्कालीन एसडीएम
    शशिकांत कुर्रे - तत्कालीन तहसीलदार
    रोशन लाल वर्मा - तत्कालीन राजस्व निरीक्षक (आरआई)
    लखेश्वर प्रसाद किरण - नायब तहसीलदार
    दिनेश पटेल - पटवारी
    लेखराम देवांगन - पटवारी
    बसंती धृतलहरे - पटवारी
    जितेंद्र साहू - पटवारी
    विजय जैन - कारोबारी
    खेमराज कोसले - कारोबारी
    केदार तिवारी - बिचौलिया
    दीपक देव - अधिकारी, जल संसाधन
    गोपाल राम वर्मा - रिटायर्ड अधिकारी
    नरेंद्र कुमार नायक - ग्रामीण
    पुनुराम देशलहरे - ग्रामीण
    भोजराम साहू - ग्रामीण
    कुंदन बघेल - ग्रामीण

     Important Points :

    . छत्तीसगढ़ में भारत माला प्रोजेक्ट में फर्जीवाड़ा
    . नेता-अफसरों के गिरेबान तक पहुंचा जांच एजेंसी का हाथ
    . चार आईएएस आए जांच के दायरे में
    . बेल पर छूटे आरोपी फिर जाएंगे जेल

    Sootr Knowledge :

    पूरे देश में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत अलग-अलग कॉरीडोर बनाए जा रहे हैं। यातायत को सरल और सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। छत्तीसगढ़ में इसी प्रोजेक्ट के तहत रायपुर से विशाखापट्टनम कॉरीडोर बनाया जा रहा है। इसके लिए जमीनों अधिग्रहण किया गया। लेकिन इसमें बड़ा घोटाला हुआ। जमीनों को छोटे छोटे टुकड़ों में बांटकर मुआवजा बनाया गया। बड़े रकबे में कम मुआवजा राशि मिलती है जबकि छोटे टुकड़ों में उससे कहीं ज्यादा मुआवजा मिलता है। इसी आधार पर नेता,अफसर,कारोबारी और दलालों ने मिलकर बड़े घोटाले को अंजाम दे दिया।

    अब आगे क्या : 

    जांच एजेंसियां अब सभी जिलों में भूमिअधिग्रहण की जांच करेंगी। सभी जिलों से जांच रिपोर्ट इकट्ठी की जा रही है। वहीं इस पूरे मामले में मनी लांड्रिंग का एंगल भी आ गया है। इसकी जांच ईडी करेगी। जांच का दायरा बढ़ने से इतना तो तय है कि कई रसूखदारों के सामने अब मुश्किल के दिन आने वाले हैं। 

    निष्कर्ष : 

    भारतमाला प्रोजेक्ट का घोटाला यह दिखाता है कि किस तरह अधिकारी,कारोबारी,दलाल और नेताओं का सिंडीकेट मिलकर करप्शन का खेल खेलता है। इसमें इन सभी की भागीदारी होती है तभी इतना बड़ा खेल मुमकिन हो पाता है। यही सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ में शराब,कोयला,कस्टम मिलिंग घोटालों को अंजाम दिया है। आम आदमी की कमाई की किस तरह बंदरबांट होती है इसको समझने के लिए यह सारे उदाहरण पर्याप्त हैं। 

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