हिरण मौत कांड में बड़ी कार्रवाई, हटाई गईं सरगुजा वन संरक्षक, सरकार ने दिखाई सख्ती
Raipur. छत्तीसगढ़ के हिरणों की मौत मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मामले में सरकार ने सख्ती दिखाते हुए सरगुजा की प्रभारी वन संरक्षक प्रभाकर खलको को हटा दिया है। मंत्रालय से जारी इस आदेश ने न सिर्फ अफसरशाही में हलचल मचा दी। इसके जरिए यह साफ संकेत भी दे दिया कि वन्यजीवों की सुरक्षा में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आईएफएस अधिकारी के तबादले को भले ही सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा हो, लेकिन इसके पीछे अंबिकापुर के संजय वन पार्क में हुई हिरणों की मौत को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
संजय वन पार्क की घटना बनी वजह
दरअसल, 20 मार्च को अंबिकापुर स्थित संजय वन पार्क में हिरणों की मौत का मामला सामने आया था। यह घटना सामने आते ही वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। इसके साथ ही पार्क में संचालित रेस्क्यू सेंटर की व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर खामियों की बात सामने आई। सूत्रों के अनुसार, मौके पर अव्यवस्था, निगरानी की कमी और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही ने सरकार को नाराज कर दिया।
सरकार का त्वरित एक्शन
इसी नाराजगी का असर सोमवार को जारी तबादला आदेश में साफ दिखाई दिया। प्रभाकर खलखो, जो सरगुजा में प्रभारी वन संरक्षक, कार्य योजना मंडल के पद पर तैनात थीं, उन्हें हटाकर अब कोरिया जिले में वन उप संरक्षक (प्रादेशिक) के पद पर भेज दिया गया है। यह बदलाव सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
नए अफसर को मिली जिम्मेदारी
वहीं, 2020 बैच के आईएफएस अधिकारी चन्द्रशेखर शंकर सिंह परदेशी, जो अब तक कोरिया में वन उप संरक्षक (प्रादेशिक) के पद पर कार्यरत थे, उन्हें सरगुजा में प्रभारी वन संरक्षक, कार्य योजना मंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने उन्हें ऐसे समय में यह जिम्मेदारी दी है जब विभाग पर भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
संदेश देने की कोशिश
इस पूरे घटनाक्रम को महज ट्रांसफर (IFS Transfer) नहीं, बल्कि सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वन्यजीवों की मौत और संरक्षण में लापरवाही को लेकर सरकार का रुख अब पहले से ज्यादा कठोर नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कार्रवाई होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सवाल अब भी कायम
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल बाकी हैं। क्या सिर्फ तबादले से व्यवस्था सुधरेगी? क्या जिम्मेदारों पर सीधे दंडात्मक कार्रवाई होगी? और सबसे बड़ा सवाल- क्या भविष्य में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी?
फिलहाल, इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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