भोपाल में 500 करोड़ की सरकारी जमीन पर संकट: राजस्व विभाग की कार्रवाई सुस्त, वन विभाग भी पैरवी से दूर

Ramanand Tiwari | Nov 03, 2026, 23:00 IST
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भोपाल के केरवा डैम के पास करोड़ों की सरकारी जमीन को लेकर विवाद गहराया है
भोपाल के केरवा डैम के पास करोड़ों की सरकारी जमीन को लेकर विवाद गहराया है

राजधानी भोपाल के केरवा डैम के पास चंदनपुरा में करीब 104.63 एकड़ जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। इस जमीन की अनुमानित कीमत 500 करोड़ रुपए बताई जा रही है। मामला अदालत तक पहुंच चुका है, लेकिन सरकारी जमीन के पक्ष में कानूनी कार्रवाई को लेकर राजस्व और वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

राजस्व विभाग के पत्रों से पता चला है कि जमीन से जुड़े मामले में सरकारी पैरवी के लिए समय पर प्रभारी अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है। वहीं, वन विभाग के नाम जमीन दर्ज होने के बावजूद अदालत में उसकी भूमिका स्पष्ट नहीं रही है। अब राजस्व विभाग ने संबंधित अधिकारियों को सरकारी हित बचाने के लिए जरूरी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

104.63 एकड़ जमीन वन विभाग के नाम दर्ज

चंदनपुरा की विवादित जमीन केरवा डैम के पास स्थित है। राजस्व विभाग के पत्र में इसके सर्वे नंबर 73, 82, 84 और 92 दर्ज हैं। यह जमीन पहले सीलिंग के तहत अतिरिक्त घोषित की गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने इसे वन विभाग को आवंटित कर दिया था। राजस्व रिकॉर्ड में भी वन विभाग का नाम दर्ज होने की बात कही गई है। जमीन के सरकारी आवंटन की जानकारी पहले राजपत्र में भी प्रकाशित की गई थी।

इस जमीन की कीमत करीब 500 करोड़ रुपए बताई जा रही है। हालांकि, इसका आधिकारिक मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है।

2012 से चल रहा विवाद, 2024 में हाईकोर्ट ने दिया फैसला

सूत्रों के मुताबिक, जमीन पर दावा करने वाले पक्ष को साल 2012 में राजस्व मंडल से राहत मिली थी। उस समय संबंधित अधिकारियों को नाम दर्ज करने और कब्जा दिलाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने को कहा गया था। हालांकि, वर्ष 2012 के मूल आदेश की प्रति उपलब्ध दस्तावेजों में नहीं है। राजस्व आयुक्त के पत्र के अनुसार, यह मामला 2010 से राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है।

इसके बाद विवाद हाईकोर्ट पहुंचा। प्रकरण क्रमांक 29888/2023 में हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2024 को फैसला दिया था। सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के आधार पर दावेदारों ने जमीन का नामांतरण और कब्जा मांगा। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश का वास्तविक प्रभाव मूल फैसले को देखने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, 2012 के आदेश के खिलाफ करीब 12 साल तक अपील नहीं की गई।

सागर के पूर्व SP अनुराग सुजानिया का इस्तीफा: IAS-IPS अफसर क्यों छोड़ रहे सरकारी नौकरी? जानिए वजहें | Former Sagar SP Anurag Sujania's Resignation: Why are IAS-IPS Officers Leaving Government Jobs? Know the Reasons
सागर के पूर्व SP अनुराग सुजानिया का इस्तीफा, आखिर समय से पहले सरकारी नौकरी क्यों छोड़ रहे IAS-IPS अफसर?
03 Nov 2026 ,
By Ram Krishna Gautam
देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवाओं में शामिल IAS और IPS बनने के लिए लाखों युवा सालों तक मेहनत करते हैं। लेकिन कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं, जो रिटायरमेंट से पहले ही नौकरी छोड़ रहे हैं। मध्य प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया के इस्तीफे के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि आखिर बड़े पदों पर पहुंचने के बाद अधिकारी सरकारी सेवा क्यों छोड़ रहे हैं?
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दो साल तक प्रभारी अधिकारी नियुक्त नहीं होने पर सवाल

इस मामले में सरकारी पैरवी को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि हाईकोर्ट में वर्ष 2023 में दर्ज मामले के लिए सरकार की ओर से प्रभारी अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया था। इससे अदालत में सरकारी पक्ष रखने और विभागों के बीच तालमेल बनाने में परेशानी हुई।

राजस्व विभाग ने 30 अक्टूबर 2026 को भोपाल कलेक्टर को पत्र भेजकर तत्काल प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए। इससे पहले 14 अक्टूबर को संभागायुक्त कार्यालय की ओर से कानूनी कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी जमीन के मामले में समय रहते सरकारी पैरवी की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई थी।

वन विभाग के नाम जमीन, लेकिन अदालत में पक्षकार नहीं

राजस्व विभाग के 30 अक्टूबर के पत्रों के मुताबिक, जमीन वन विभाग के नाम दर्ज होने के बावजूद हाईकोर्ट में चले मामले में विभाग औपचारिक पक्षकार नहीं था। इसी को लेकर राजस्व विभाग ने कलेक्टर और वन अधिकारियों को आपसी तालमेल से जरूरी कानूनी कार्रवाई करने को कहा है।

विभाग को प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने और अदालत में अपना पक्ष रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। सूत्रों का दावा है कि दो बार बुलाए जाने के बावजूद वन विभाग का प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों में अदालत में उपस्थिति और विभाग की ओर से दिए गए जवाब का पूरा रिकॉर्ड नहीं है।

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चपरासी कराएंगे 1500 करोड़ के ग्लोबल स्किल पार्क में एडमिशन! क्यों खाली पड़ी संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क की सीटें?
03 Nov 2026 ,
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14 अक्टूबर के पत्र में चार मुद्दों पर मांगा जवाब

राजस्व आयुक्त कार्यालय ने 14 अक्टूबर 2026 को राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा था। इसमें हाईकोर्ट के अप्रैल 2024 के फैसले के खिलाफ अपील करने में हुई देरी का कारण पूछा गया था।

साथ ही सरकारी वकील की राय, अब तक की कानूनी कार्रवाई और पुराने राजस्व आदेशों की समीक्षा के बारे में जानकारी मांगी गई थी। पत्र में भोपाल और रायसेन की संबंधित जमीन पर सरकारी हितों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी चाही गई थी।

मई 2026 में फिर सामने आया जमीन का मामला

राजस्व विभाग के पत्र के अनुसार, एक आवेदक ने 13 मई 2026 को मामले की जल्दी सुनवाई के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद जून में सुनवाई तय की गई, लेकिन पुराने न्यायिक आदेशों से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी।

23 जून को होने वाली सुनवाई आगे बढ़ गई और संबंधित विभागों से जरूरी दस्तावेज मांगे गए थे। इस घटनाक्रम से विभागों के बीच दस्तावेज जुटाने और कानूनी कार्रवाई तय करने में हुई देरी का मुद्दा सामने आया।

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मध्य प्रदेश के आईपीएस अनुराग सुजानिया ने दिया इस्तीफा, 4 दिन पहले सागर SP पद से हटाए गए थे
03 Nov 2026 ,
By Amresh Kushwaha
मध्य प्रदेश के 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। वे सागर जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थे। चार दिन पहले ही राज्य सरकार ने उन्हें सागर एसपी के पद से हटाया था। इसके बाद सोमवार, 02 नवंबर को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे में उन्होंने नौकरी छोड़ने की वजह व्यक्तिगत कारण बताया है।
मध्य प्रदेश के 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। वे सागर जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थे। चार दिन पहले ही राज्य सरकार ने उन्हें सागर एसपी के पद से हटाया था। इसके बाद सोमवार, 02 नवंबर को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे में उन्होंने नौकरी छोड़ने की वजह व्यक्तिगत कारण बताया है।

30 अक्टूबर को कलेक्टर और वन विभाग को भेजे पत्र

राजस्व विभाग के अवर सचिव राजेश कुमार कोल ने 30 अक्टूबर 2026 को भोपाल कलेक्टर और वन मंडलाधिकारी को अलग-अलग पत्र भेजे थे। इनमें सरकारी जमीन से जुड़े हितों की रक्षा के लिए प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने और जरूरत के अनुसार रिट याचिका या अपील करने के निर्देश दिए गए थे।

वन विभाग को भी राजस्व अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर अदालत में जरूरी कदम उठाने को कहा गया था। हालांकि, इन निर्देशों के बाद क्या कार्रवाई हुई, इसका लिखित विवरण उपलब्ध दस्तावेजों में नहीं मिला है।

वन बल प्रमुख ने जांच का भरोसा दिया, DFO का जवाब नहीं मिला

मामले में वन विभाग का पक्ष जानने के लिए प्रदेश के वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन से संपर्क किया गया था। सेन ने संबंधित दस्तावेज भेजने को कहा है। साथ ही अधिकारियों से चर्चा करके मामले की जांच कराने का भरोसा दिया है।

वहीं, भोपाल के वन मंडलाधिकारी लोकप्रिय भारती को तीन बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया था। उन्हें व्हाट्सऐप पर संदेश भी भेजा गया, जिसका खबर तैयार होने तक कोई जवाब नहीं मिला। राजस्व आयुक्त से भी फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।

रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल हत्याकांड का आरोपी एनकाउंटर में घायल: आगरा से गिरफ्तार, भागने की कोशिश में लगी गोली | Retired IAS Rakesh Agrawal Murder Case Accused Injured in Encounter: Arrested from Agra, Shot While Trying to Escape
रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल हत्याकांड का आरोपी शॉर्ट एनकाउंटर में घायल, आगरा से गिरफ्तार कर भोपाल ला रही थी पुलिस
03 Nov 2026 ,
By Sourabh Bhatnagar
भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में करीब एक महीने से फरार आरोपी वरुण कुमार को पुलिस ने आगरा से गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार सुबह भोपाल लाते समय उसकी पुलिस से झूमाझटकी हो गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने भागने की कोशिश की। उसे रोकने के लिए की गई फायरिंग में उसके पैर में गोली लग गई।
भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में करीब एक महीने से फरार आरोपी वरुण कुमार को पुलिस ने आगरा से गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार सुबह भोपाल लाते समय उसकी पुलिस से झूमाझटकी हो गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने भागने की कोशिश की। उसे रोकने के लिए की गई फायरिंग में उसके पैर में गोली लग गई।

सरकारी जमीन बचाने की जिम्मेदारी किसकी?

चंदनपुरा का यह Land Dispute अब विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। राजस्व रिकॉर्ड में वन विभाग का नाम होने के बावजूद अदालत में समय पर पक्ष नहीं रखे जाने के आरोप हैं। वहीं, Legal Appeal में देरी और प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

हालांकि, जमीन पर अंतिम मालिकाना अधिकार का फैसला अदालत की प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल है कि 104.63 एकड़ जमीन के मामले में समय पर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई और सरकारी हितों की रक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी या विभाग की थी। राजस्व, कलेक्टर कार्यालय और वन विभाग की आगे की कार्रवाई से ही इन सवालों के जवाब स्पष्ट होंगे।
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