जूनियर इंजीनियरों के NFU लाभ पर केंद्र सरकार को हाईकोर्ट से झटका, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर याचिकाएं खारिज
Neel Tiwari | Nov 03, 2026, 22:07 IST
जूनियर इंजीनियरों के NFU लाभ से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की चारों याचिकाएं खारिज कर दी।
जूनियर इंजीनियरों को नॉन-फंक्शनल अपग्रेडेशन (NFU) का लाभ देने के मामले में केंद्र सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार की चारों याचिकाएं खारिज कर दी हैं। ये याचिकाएं ऑर्डिनेंस और व्हीकल फैक्ट्री के कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए CAT के आदेशों के खिलाफ दायर की गई थीं।
अब पात्र कर्मचारियों को उच्च वेतन स्तर का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
केंद्र सरकार ने
जबलपुर में जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने 3 नवंबर 2026 को फैसला सुनाया। मामला केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), जबलपुर के चार अलग-अलग मूल आवेदनों से जुड़ा था। इनमें न्यायाधिकरण ने जूनियर इंजीनियरों के पक्ष में आदेश पारित किए थे। केंद्र सरकार ने इन आदेशों को संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
CAT ने संबंधित मामलों में 27 नवंबर 2025, 12 दिसंबर 2025 और 13 मई 2026 को आदेश दिए थे। केंद्र सरकार इन आदेशों से सहमत नहीं थी। उसका कहना था कि कर्मचारियों को NFU का लाभ देने के लिए शुरुआती नियुक्ति का वेतन स्तर भी देखना जरूरी है। इसी विवाद को लेकर सरकार ने हाईकोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं।
NFU का पूरा नाम नॉन-फंक्शनल अपग्रेडेशन है। यह ऐसी व्यवस्था है, जिसमें पात्र कर्मचारियों को नियमित पदोन्नति के बिना उच्च वेतन स्तर का लाभ दिया जा सकता है। इसके लिए निर्धारित सेवा अवधि और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है। इस मामले में विवाद सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत मिलने वाले इसी लाभ को लेकर था।
जूनियर इंजीनियरों का कहना था कि वे निर्धारित सेवा अवधि और पात्रता की शर्तें पूरी कर चुके हैं। इसके बावजूद शुरुआती नियुक्ति के ग्रेड पे को आधार बनाकर उन्हें लाभ से वंचित किया जा रहा है। कर्मचारियों ने तर्क दिया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में ऐसी अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई गई है। इसलिए निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारियों को NFU का लाभ मिलना चाहिए।
इस विवाद में सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के पैरा 7.4.13 (iv)(b) की अहम भूमिका है। इसमें जूनियर इंजीनियरों को NFU देने से जुड़ी शर्तों का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, लेवल-8 में चार साल की सेवा पूरी करने पर लेवल-9 का लाभ देने का प्रावधान है। इसके लिए वरिष्ठता सह उपयुक्तता (Seniority-cum-Suitability) की शर्त पूरी करना भी जरूरी है।
केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के शुरुआती ग्रेड पे को लेकर आपत्ति जताई थी। सरकार का तर्क था कि संबंधित जूनियर इंजीनियरों की नियुक्ति 4,200 रुपए ग्रेड पे पर हुई थी। जबकि NFU के लिए 4,800 रुपए ग्रेड पे वाले प्रवेश स्तर का संदर्भ महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को लाभ देने का विरोध किया था।
वहीं, कर्मचारियों ने कहा कि वे लेवल-8 में चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं। ऐसे में केवल शुरुआती ग्रेड पे के आधार पर उन्हें उच्च वेतन स्तर से वंचित नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि निर्धारित सेवा अवधि और वरिष्ठता सह उपयुक्तता की शर्तें ही लागू होनी चाहिए।
हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से अपर सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन ने पक्ष रखा। उनके साथ उप सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु और अधिवक्ता सैमसन जे. कुरियन भी उपस्थित रहे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए फैसले का मुद्दा सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट ने भारत संघ एवं अन्य बनाम सुनील कुमार राय एवं अन्य मामले में 1 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया था। यह मामला विशेष अनुमति याचिका (सिविल) क्रमांक 11595/2023 से जुड़ा था। इस फैसले का संदर्भ 2026 INSC 311 है। इसमें भी जूनियर इंजीनियरों को NFU का लाभ देने को लेकर विवाद था।
सुप्रीम कोर्ट ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के पैरा 7.4.13 (iv)(b) की व्याख्या की थी। अदालत ने माना था कि लेवल-8 में चार साल की सेवा और वरिष्ठता सह उपयुक्तता की शर्त महत्वपूर्ण है। इन शर्तों को पूरा करने वाले कर्मचारियों की NFU पात्रता पर विचार किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कर्मचारियों को केवल शुरुआती ग्रेड पे के आधार पर लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने 4,800 रुपए ग्रेड पे वाले प्रवेश स्तर को NFU के लिए जरूरी बताया था। जबकि संबंधित कर्मचारियों की शुरुआती नियुक्ति 4,200 रुपए ग्रेड पे पर हुई थी।
अदालत ने माना था कि सातवें वेतन आयोग की निर्धारित शर्तों में अतिरिक्त शर्त जोड़ना उचित नहीं है। इससे पात्र कर्मचारियों को मिलने वाला लाभ प्रभावित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी थी। इस फैसले से जूनियर इंजीनियरों के NFU विवाद में महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई थी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने चारों याचिकाओं में उठाए गए कानूनी सवालों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि मौजूदा विवाद सुप्रीम कोर्ट के सुनील कुमार राय मामले में दिए गए फैसले से पूरी तरह जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही 1 अप्रैल 2026 को इस मुद्दे पर अपना निर्णय दे चुका है।
हाईकोर्ट ने माना कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला वर्तमान मामलों पर भी लागू होता है। ऐसे में केंद्र सरकार की याचिकाओं में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने चारों याचिकाएं खारिज कर दीं। इस तरह CAT जबलपुर के संबंधित आदेशों में बदलाव करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया।
इस फैसले से ऑर्डिनेंस और व्हीकल फैक्ट्री से जुड़े जूनियर इंजीनियरों के NFU लाभ का रास्ता साफ हुआ है। खासकर शुरुआती नियुक्ति के ग्रेड पे को लेकर केंद्र सरकार की आपत्ति को कानूनी समर्थन नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मुद्दे पर कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दे चुका था। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी उसी कानूनी स्थिति को बरकरार रखा है।
हालांकि, सभी कर्मचारियों को अपने आप लेवल-9 का लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए लेवल-8 में चार साल की सेवा और निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी होगा। संबंधित कर्मचारियों की वरिष्ठता और उपयुक्तता का भी आकलन किया जाएगा। यह फैसला उन जूनियर इंजीनियरों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से उच्च वेतन स्तर के लाभ की मांग कर रहे थे।
केंद्र सरकार ने CAT के आदेशों को दी थी चुनौती
CAT ने संबंधित मामलों में 27 नवंबर 2025, 12 दिसंबर 2025 और 13 मई 2026 को आदेश दिए थे। केंद्र सरकार इन आदेशों से सहमत नहीं थी। उसका कहना था कि कर्मचारियों को NFU का लाभ देने के लिए शुरुआती नियुक्ति का वेतन स्तर भी देखना जरूरी है। इसी विवाद को लेकर सरकार ने हाईकोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं।
क्या है NFU, जिसे लेकर चल रही थी कानूनी लड़ाई?
जूनियर इंजीनियरों का कहना था कि वे निर्धारित सेवा अवधि और पात्रता की शर्तें पूरी कर चुके हैं। इसके बावजूद शुरुआती नियुक्ति के ग्रेड पे को आधार बनाकर उन्हें लाभ से वंचित किया जा रहा है। कर्मचारियों ने तर्क दिया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में ऐसी अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई गई है। इसलिए निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारियों को NFU का लाभ मिलना चाहिए।
चार साल की सेवा के बाद लेवल-9 का लाभ मिलने का मामला
केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के शुरुआती ग्रेड पे को लेकर आपत्ति जताई थी। सरकार का तर्क था कि संबंधित जूनियर इंजीनियरों की नियुक्ति 4,200 रुपए ग्रेड पे पर हुई थी। जबकि NFU के लिए 4,800 रुपए ग्रेड पे वाले प्रवेश स्तर का संदर्भ महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को लाभ देने का विरोध किया था।
वहीं, कर्मचारियों ने कहा कि वे लेवल-8 में चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं। ऐसे में केवल शुरुआती ग्रेड पे के आधार पर उन्हें उच्च वेतन स्तर से वंचित नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि निर्धारित सेवा अवधि और वरिष्ठता सह उपयुक्तता की शर्तें ही लागू होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका था केंद्र सरकार की दलील
सुप्रीम कोर्ट ने भारत संघ एवं अन्य बनाम सुनील कुमार राय एवं अन्य मामले में 1 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया था। यह मामला विशेष अनुमति याचिका (सिविल) क्रमांक 11595/2023 से जुड़ा था। इस फैसले का संदर्भ 2026 INSC 311 है। इसमें भी जूनियर इंजीनियरों को NFU का लाभ देने को लेकर विवाद था।
सुप्रीम कोर्ट ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के पैरा 7.4.13 (iv)(b) की व्याख्या की थी। अदालत ने माना था कि लेवल-8 में चार साल की सेवा और वरिष्ठता सह उपयुक्तता की शर्त महत्वपूर्ण है। इन शर्तों को पूरा करने वाले कर्मचारियों की NFU पात्रता पर विचार किया जाना चाहिए।
शुरुआती ग्रेड पे की अतिरिक्त शर्त को सुप्रीम कोर्ट ने माना गलत
अदालत ने माना था कि सातवें वेतन आयोग की निर्धारित शर्तों में अतिरिक्त शर्त जोड़ना उचित नहीं है। इससे पात्र कर्मचारियों को मिलने वाला लाभ प्रभावित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी थी। इस फैसले से जूनियर इंजीनियरों के NFU विवाद में महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई थी।
हाईकोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का फैसला इन मामलों पर भी लागू
हाईकोर्ट ने माना कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला वर्तमान मामलों पर भी लागू होता है। ऐसे में केंद्र सरकार की याचिकाओं में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने चारों याचिकाएं खारिज कर दीं। इस तरह CAT जबलपुर के संबंधित आदेशों में बदलाव करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया।
जूनियर इंजीनियरों को फैसले से क्या फायदा होगा?
हालांकि, सभी कर्मचारियों को अपने आप लेवल-9 का लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए लेवल-8 में चार साल की सेवा और निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी होगा। संबंधित कर्मचारियों की वरिष्ठता और उपयुक्तता का भी आकलन किया जाएगा। यह फैसला उन जूनियर इंजीनियरों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से उच्च वेतन स्तर के लाभ की मांग कर रहे थे।
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