गणेश विसर्जन में हिंसा की रिपोर्टिंग पर पत्रकार के खिलाफ दर्ज FIR रद्द, हाईकोर्ट बोला- सच्ची घटना दिखाना अपराध नहीं

Neel Tiwari | Nov 03, 2026, 21:04 IST
Share
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के यूट्यूबर पत्रकार उवेश खान के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के यूट्यूबर पत्रकार उवेश खान के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के यूट्यूबर पत्रकार उवेश खान उर्फ उवेश रिपोर्टर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई पत्रकार किसी वास्तविक हिंसक घटना की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करता है, तो उसे अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट को उवेश की रिपोर्ट में भी ऐसी कोई बात नहीं मिली, जिससे दो समुदायों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलती हो।

जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने सिलवानी थाने में दर्ज FIR और उससे जुड़ी आगे की सभी कानूनी कार्रवाइयों को रद्द करने का आदेश दिया है।

दरअसल, 6 सितंबर 2025 को रायसेन जिले में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हिंसा हुई थी। उवेश खान ने अपने यूट्यूब न्यूज चैनल पर इस घटना की खबर दिखाई थी। इसके बाद एक व्यक्ति ने शिकायत की थी कि उवेश की रिपोर्टिंग से हिंदू समुदाय के लोगों में डर और भ्रम फैल रहा है और इससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने 8 सितंबर 2025 को उवेश खान के खिलाफ सिलवानी थाने में FIR दर्ज की थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) लगाई गई थी। अब हाईकोर्ट ने इस FIR को रद्द कर दिया है।

पत्रकार ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

उवेश खान ने अपने वकील संकल्प कोचर के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाकर FIR रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे पत्रकार हैं और अपना यूट्यूब न्यूज चैनल चलाते हैं। इसके सबूत के तौर पर उन्होंने पत्रकारिता से जुड़े दस्तावेज और DNN न्यूज चैनल का नियुक्ति पत्र भी पेश किया।

उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि उवेश ने अपनी खबर में सिर्फ गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई हिंसा की जानकारी दी थी। इस घटना में दो लोग घायल हुए थे। खबर में किसी भी समुदाय के खिलाफ कुछ नहीं कहा गया था और न ही इसका मकसद सांप्रदायिक तनाव फैलाना था।

वकील ने यह भी बताया कि इसी घटना में रामाशंकर दीक्षित पर कथित हमले को लेकर सिलवानी थाने में पहले से ही FIR दर्ज थी। इसका अपराध क्रमांक 324/2025 है। ऐसे में जो घटना वास्तव में हुई थी, उसकी खबर दिखाने पर पत्रकार के खिलाफ अलग से FIR दर्ज करना गलत है।

मध्य प्रदेश के IPS अनुराग सुजानिया का इस्तीफा: सागर SP पद से हटाए जाने के 4 दिन बाद लिया फैसला, CM की वरिष्ठ अधिकारियों संग बैठक | Madhya Pradesh IPS Anurag Sujania Resigns: Decision taken 4 days after being removed from Sagar SP post, CM to hold meeting with senior officials
मध्य प्रदेश के आईपीएस अनुराग सुजानिया ने दिया इस्तीफा, 4 दिन पहले सागर SP पद से हटाए गए थे
03 Nov 2026 ,
By Amresh Kushwaha
मध्य प्रदेश के 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। वे सागर जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थे। चार दिन पहले ही राज्य सरकार ने उन्हें सागर एसपी के पद से हटाया था। इसके बाद सोमवार, 02 नवंबर को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे में उन्होंने नौकरी छोड़ने की वजह व्यक्तिगत कारण बताया है।
मध्य प्रदेश के 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग सुजानिया ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। वे सागर जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात थे। चार दिन पहले ही राज्य सरकार ने उन्हें सागर एसपी के पद से हटाया था। इसके बाद सोमवार, 02 नवंबर को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे में उन्होंने नौकरी छोड़ने की वजह व्यक्तिगत कारण बताया है।

सरकार ने FIR रद्द करने का किया विरोध, कहा- संवेदनशील मामला है

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील प्रमोद पांडे ने उवेश खान की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट में कहा कि मामला सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माहौल में हुई घटना की रिपोर्टिंग से जुड़ा है। इसलिए यह जांच करना जरूरी है कि खबर किस तरह दिखाई गई, उसमें किस भाषा का इस्तेमाल हुआ और उसका लोगों पर क्या असर पड़ा। सरकार की ओर से कहा गया कि जांच के शुरुआती दौर में ही FIR रद्द करना ठीक नहीं होगा।

वहीं, शिकायतकर्ता के वकील रमन चौबे ने भी FIR को सही बताते हुए इसे रद्द करने का विरोध किया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद कोर्ट ने कानूनी पहलुओं पर विचार किया।

BNS की धारा 196(1) में क्या है प्रावधान, कोर्ट ने समझाया

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) काफी हद तक पुराने कानून IPC की धारा 153A जैसी ही है। यह धारा धर्म, जाति, भाषा या दूसरे आधारों पर अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत और दुश्मनी फैलाने वालों पर लगाई जाती है।

कोर्ट ने साफ किया कि किसी खबर में हिंसा की घटना का जिक्र कर देना ही अपराध नहीं है। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि खबर में क्या कहा गया है, उसे किस संदर्भ में दिखाया गया है और क्या उससे दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश की गई है।

यानी किसी संवेदनशील घटना की खबर दिखाने भर से पत्रकार पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का अपराध नहीं बन जाता।

मध्य प्रदेश में शराब ठेकेदारों का गुजरात कनेक्शन: आबकारी ड्यूटी से डिफॉल्टर, अवैध शराब बेच कर रहे भरपाई | Madhya Pradesh Liquor Contractors' Gujarat Connection: Defaulting Due to Excise Duty, Compensating by Selling Illicit Liquor
मध्य प्रदेश में शराब के महंगे ठेके ले रहे ठेकेदार, कमाई करने के लिए भेज रहे गुजरात
03 Nov 2026 ,
By Sanjay Gupta
एमपी में सागर और देवास में जहरीली शराब कांड का मातम खत्म भी नहीं हुआ था कि अब टीआई शहीद हो गए। गुजरात शराब तस्करी करने वाले ट्रक ने टीआई दिलीप पुरी को रौंद दिया और वे शहीद हो गए। इंदौर में भी एक माह में 4 करोड़ की शराब पकड़ी गई जो गुजरात जा रही थी। इसकी सबसे बड़ी वजह मध्य प्रदेश की आबकारी नीति है।
एमपी में सागर और देवास में जहरीली शराब कांड का मातम खत्म भी नहीं हुआ था कि अब टीआई शहीद हो गए। गुजरात शराब तस्करी करने वाले ट्रक ने टीआई दिलीप पुरी को रौंद दिया और वे शहीद हो गए। इंदौर में भी एक माह में 4 करोड़ की शराब पकड़ी गई जो गुजरात जा रही थी। इसकी सबसे बड़ी वजह मध्य प्रदेश की आबकारी नीति है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पैट्रीसिया मुखिम बनाम मेघालय राज्य (AIR 2021 SC 1632) मामले का भी जिक्र किया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ‘बिलाल अहमद कालू बनाम आंध्र प्रदेश राज्य’ मामले में तय किए गए कानूनी सिद्धांतों को दोहराया था।

कोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 153A के तहत अपराध तभी बनता है, जब दो या दो से ज्यादा समुदायों के बीच नफरत या दुश्मनी फैलाने की मंशा हो। कानून में इसे मेंस रिया (Mens Rea) यानी अपराध करने की मंशा कहा जाता है।

सिर्फ यह कह देना कि किसी खबर या बयान से एक समुदाय की भावनाएं भड़क गईं, इस धारा के तहत अपराध मानने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी बयान या खबर के कुछ शब्दों को अलग से देखकर फैसला नहीं किया जा सकता। पूरी बात किस संदर्भ में कही गई है और उसका मकसद क्या था, यह देखना भी जरूरी है।

FIR में नहीं बताया गया, खबर की कौन-सी बात सांप्रदायिक शत्रुता फैलाने वाली थी

जस्टिस हिमांशु जोशी ने मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखने के बाद कहा कि उवेश खान के खिलाफ दर्ज FIR में ऐसा कोई शब्द, बयान या सामग्री नहीं बताई गई है, जिससे दो समुदायों के बीच नफरत या दुश्मनी फैलने की बात साबित होती हो।

शिकायत में सिर्फ इतना कहा गया था कि खबर से एक समुदाय के लोगों में डर और भ्रम पैदा हुआ और सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता था। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस तरह के आरोपों के आधार पर किसी के खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता। किसी खबर से लोगों में गुस्सा या तनाव फैलने की आशंका होना ही BNS की धारा 196(1) लगाने के लिए काफी नहीं है।

कोर्ट ने यह भी माना कि गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई घटना को लेकर पहले से दर्ज FIR और खबर का स्क्रीनशॉट उवेश खान की इस दलील का समर्थन करते हैं कि उन्होंने एक वास्तविक घटना की रिपोर्टिंग की थी। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि किसी घटना को लेकर पहले से FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि उस घटना पर दिखाई गई खबर अपने आप सही या गलत साबित हो जाती है।

बेटे की शराब की लत से परेशान पिता ने दी 3 लाख की सुपारी, खुद कराई हत्या | Father, troubled by son's alcoholism, gave a 3 lakh supari, got him murdered himself
जिस पिता पर था भरोसा, उसी ने दी मौत की सुपारी! बेटे की हत्या के लिए दिए थे 3 लाख
02 Nov 2026 ,
By Amresh Kushwaha
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में बोरे में बंद मिले युवक के शव की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। जांच में सामने आया कि युवक की हत्या की साजिश कथित तौर पर उसके पिता ने ही रची थी। पुलिस के मुताबिक, बेटे की शराब पीने की आदत से परेशान पिता ने तीन लोगों को हत्या के लिए तीन लाख रुपए देने का वादा किया था।
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में बोरे में बंद मिले युवक के शव की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। जांच में सामने आया कि युवक की हत्या की साजिश कथित तौर पर उसके पिता ने ही रची थी। पुलिस के मुताबिक, बेटे की शराब पीने की आदत से परेशान पिता ने तीन लोगों को हत्या के लिए तीन लाख रुपए देने का वादा किया था।

पत्रकार होने से छूट नहीं, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी छीनी नहीं जा सकती

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि सिर्फ पत्रकार होने से किसी को कानून से छूट नहीं मिल जाती। अगर किसी पत्रकार की खबर या रिपोर्ट में अपराध से जुड़ी बातें पाई जाती हैं, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत हर नागरिक को अपनी बात रखने की आजादी मिली है। सिर्फ इसलिए इस आजादी पर रोक नहीं लगाई जा सकती कि खबर किसी संवेदनशील घटना से जुड़ी है। इसके लिए कानून में ठोस आधार होना जरूरी है।

कोर्ट ने पाया कि उवेश खान के खिलाफ उपलब्ध सबूतों से पहली नजर में BNS की धारा 196(1) के तहत कोई अपराध नहीं बनता। ऐसे में उनके खिलाफ आपराधिक मामला आगे चलाना कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा।

MP में अफसरों का हत्यारा माफिया: ड्यूटी पर निकले, मौत मिली! कितने मामलों में हुई सजा? | MP's Officer Killer Mafia: Went on Duty, Met Death! How Many Cases Resulted in Conviction?
ड्यूटी पर निकले, मौत मिली! MP में अफसरों का हत्यारा माफिया! कितने मामलों में हुई सजा?
02 Nov 2026 ,
By Atul Dwivedi
देवास के खातेगांव में शराब माफिया ने एक पुलिस अफसर की जान ले ली। टीआई दिलीप पुरी को शराब माफिया ने गाड़ी से कुचल दिया। वे करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ते रहे, लेकिन आखिरकार उनकी मौत हो गई। बता दें कि दिलीप पुरी माफिया के हाथों जान गंवाने वाले मध्य प्रदेश के पहले अफसर नहीं हैं।
देवास के खातेगांव में शराब माफिया ने एक पुलिस अफसर की जान ले ली। टीआई दिलीप पुरी को शराब माफिया ने गाड़ी से कुचल दिया। वे करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ते रहे, लेकिन आखिरकार उनकी मौत हो गई। बता दें कि दिलीप पुरी माफिया के हाथों जान गंवाने वाले मध्य प्रदेश के पहले अफसर नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने FIR और पूरी कार्रवाई की निरस्त, पत्रकार को मिली राहत

सभी पक्षों की दलीलें सुनने और मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने उवेश खान की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने सिलवानी थाने में 8 सितंबर 2025 को दर्ज FIR (अपराध क्रमांक 328/2025) रद्द करने का आदेश दिया। इसके साथ ही इस FIR के आधार पर पत्रकार के खिलाफ चल रही सभी कानूनी कार्रवाइयां भी रद्द कर दी गईं।

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई पत्रकार किसी वास्तविक घटना की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करता है, तो सिर्फ इस आशंका के आधार पर उसे अपराधी नहीं माना जा सकता कि खबर से सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्रकारिता के नाम पर जानबूझकर दो समुदायों के बीच नफरत या दुश्मनी फैलाने वाली खबरें दिखाने की छूट नहीं है। ऐसे मामलों में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है।
Tags:
  • पैट्रीसिया मुखिम केस
  • Patricia Mukhim Case
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
  • यूट्यूबर पत्रकार उवेश खान
  • यूट्यूबर पत्रकार
  • रायसेन
  • जस्टिस हिमांशु जोशी
  • गणेश विसर्जन जुलूस
  • DNN न्यूज
अमीर धरती के साथ यहां के लोग भी होंगे अमीर, अमित शाह बोले, नवा रायपुर बनेगा पीपल सिटी

By Arun Tiwari

अमीर धरती के साथ यहां के लोग भी होंगे अमीर, अमित शाह बोले, नवा रायपुर बनेगा पीपल सिटी
छत्तीसगढ़ में छुट्टी को लेकर बड़ा आदेश, अब 9 नवंबर की जगह 20 नवंबर को रहेगा स्थानीय अवकाश, जानिए किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

By Umeshwari Baghel

छत्तीसगढ़ में छुट्टी को लेकर बड़ा आदेश, अब 9 नवंबर की जगह 20 नवंबर को रहेगा स्थानीय अवकाश, जानिए किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
चपरासी कराएंगे 1500 करोड़ के ग्लोबल स्किल पार्क में एडमिशन! क्यों खाली पड़ी संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क की सीटें?

By Atul Dwivedi

चपरासी कराएंगे 1500 करोड़ के ग्लोबल स्किल पार्क में एडमिशन! क्यों खाली पड़ी संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क की सीटें?
बच्चों का पेट भरने वाले रसोइयों की जेब खाली, जयपुर में 13 महीने, उदयपुर में 7 महीने से मानदेय अटकने का दावा

By Raghvendra Singh Rathore

बच्चों का पेट भरने वाले रसोइयों की जेब खाली, जयपुर में 13 महीने, उदयपुर में 7 महीने से मानदेय अटकने का दावा
MP में क्यों सीएम हाउस घेरने निकले थे ओबीसी वाले? जिस योजना पर फूटा गुस्सा वो क्या है? दूसरी योजनाओं का क्या हाल?

By Atul Dwivedi

MP में क्यों सीएम हाउस घेरने निकले थे ओबीसी वाले? जिस योजना पर फूटा गुस्सा वो क्या है? दूसरी योजनाओं का क्या हाल?
27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की सुप्रीम लड़ाई में OBC महासभा भी मैदान में, 3 SLP और 10 कैविएट से बढ़ी कानूनी हलचल

By Neel Tiwari

27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की सुप्रीम लड़ाई में OBC महासभा भी मैदान में, 3 SLP और 10 कैविएट से बढ़ी कानूनी हलचल
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में छाया अनोखा रोबोट: बिना इंटरनेट के करता है काम, घर से लेकर होटल तक आ सकता है काम

By Umeshwari Baghel

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में छाया अनोखा रोबोट: बिना इंटरनेट के करता है काम, घर से लेकर होटल तक आ सकता है काम