ये आदेश जो जारी हुआ
चपरासी कराएंगे 1500 करोड़ के ग्लोबल स्किल पार्क में एडमिशन! क्यों खाली पड़ी संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क की सीटें?
Atul Dwivedi | Nov 03, 2026, 20:09 IST
भोपाल के संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में 1800 में से 1070 सीटें खाली हैं।
मध्यप्रदेश में 1500 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुए संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में अब चपरासी छात्रों के एडमिशन कराएंगे। सुनकर आपको अजीब जरूर लग रहा होगा, लेकिन मामला कुछ ऐसा ही है। भोपाल में मौजूद जिस ग्लोबल स्किल पार्क को युवाओं को विश्वस्तरीय ट्रेनिंग देने के लिए बनाया गया था, वहां अब छात्रों का एडमिशन कराना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
हालात यह हैं कि पार्क प्रबंधन ने अधिकारियों से लेकर चपरासियों तक को एडमिशन के टारगेट दे दिए हैं।
हैरानी की बात यह है कि ग्लोबल स्किल पार्क में कुल 1800 सीटें हैं, लेकिन इनमें से अब तक सिर्फ 730 सीटों पर ही एडमिशन हुए हैं। यानी 1070 सीटें अब भी खाली पड़ी हैं। सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद छात्रों का रुझान इन कोर्सेज की तरफ क्यों नहीं है? और ऐसी क्या नौबत आ गई कि प्रबंधन को चपरासियों तक को एडमिशन का जिम्मा सौंपना पड़ा? चपरासी अब इस उलझन में हैं कि वे अपना रोजमर्रा का काम संभालें या छात्रों को ढूंढकर उनका एडमिशन कराएं।
दरअसल, पार्क में चल रहे 9 एडवांस्ड कोर्सेज में 1070 सीटें खाली हैं। इन्हीं सीटों को भरने के लिए प्रबंधन ने अधिकारियों से लेकर ऑफिस बॉयज तक की जिम्मेदारी तय कर दी है। प्रबंधन ने बाकायदा एक आदेश जारी किया है। इसमें सहायक संचालक से लेकर लाइफ स्किल्स ट्रेनर्स तक के नाम दर्ज हैं। इतना ही नहीं, हर नाम के आगे एडमिशन का टारगेट भी लिखा गया है। किसी को 10 एडमिशन कराने हैं, किसी को 20 तो किसी को 8 छात्रों का एडमिशन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। यानी अब ग्लोबल स्किल पार्क के कर्मचारियों को अपने नियमित काम के साथ छात्रों के एडमिशन कराने की जिम्मेदारी भी निभानी है।
दरअसल, इस पूरे मामले का खुलासा 30 अक्टूबर 2026 को जारी हुए एक आदेश से हुआ है। यह आदेश संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क की निदेशक रोमा बाजपेयी ने जारी किया था।
ग्लोबल स्किल पार्क में साल में दो बार एडमिशन होते हैं। यहां हर कोर्स में 200 सीटें हैं। दावा किया जा रहा है कि नवंबर में शुरू होने वाले नए सत्र के लिए प्रबंधन को पर्याप्त छात्र नहीं मिल रहे हैं। हालात यह हैं कि कई कोर्सेज में तो 100 सीटें भी नहीं भर पाई हैं। यही वजह बताई जा रही है कि प्रबंधन को एडमिशन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को टारगेट देने वाला आदेश जारी करना पड़ा।
अब जरा उन कोर्सेज का हाल भी जान लीजिए, जिनमें छात्रों को विश्वस्तरीय ट्रेनिंग देने की बात कही गई थी।
ये आंकड़े इसलिए भी चौंकाने वाले हैं, क्योंकि जिन कोर्सेज में युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरत के मुताबिक ट्रेनिंग देने की बात कही गई थी, उन्हीं में एडमिशन के लिए छात्रों की कमी सामने आ रही है।
मामला सामने आने के बाद संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क प्रबंधन ने भी इस पर अपना पक्ष रखा है। ग्लोबल स्किल पार्क की सीईओ अदिति गर्ग ने कर्मचारियों को एडमिशन का टारगेट देने के मामले को एडमिशन प्रक्रिया के दौरान की जाने वाली मदद बताया है। उनका कहना है कि यह एक इंटरनल आदेश है। अधिकारियों और कर्मचारियों से एडमिशन के लिए केवल सहयोग करने को कहा गया है। हालांकि, आदेश में कर्मचारियों के नाम के आगे एडमिशन की संख्या दर्ज होने से सवाल उठ रहे हैं कि जब यह सिर्फ सहयोग की बात है, तो फिर अलग-अलग कर्मचारियों के लिए एडमिशन की संख्या क्यों तय की गई?
मध्यप्रदेश में इस पार्क की स्थापना युवाओं को विश्वस्तरीय ट्रेनिंग देने के उद्देश्य से की गई थी। इसके निर्माण पर करीब 1500 करोड़ रुपए खर्च किए गए। सरकार का दावा था कि ग्लोबल स्किल पार्क में युवाओं को ऐसी ट्रेनिंग मिलेगी, जिससे उनके लिए रोजगार के बेहतर अवसर पैदा होंगे। यहां उद्योगों की जरूरत के मुताबिक युवाओं को तैयार करने की बात कही गई थी। इसके लिए सिंगापुर के ITEES (आईटीईईएस) की मदद लेने की भी बात हुई थी। मकसद था कि मध्यप्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड कोर्सेज की ट्रेनिंग मिले, ताकि वे रोजगार के क्षेत्र में बेहतर अवसर हासिल कर सकें। लेकिन अब इसी ग्लोबल स्किल पार्क में बड़ी संख्या में खाली सीटें कई सवाल खड़े कर रही हैं।
हैरानी की बात यह है कि ग्लोबल स्किल पार्क में कुल 1800 सीटें हैं, लेकिन इनमें से अब तक सिर्फ 730 सीटों पर ही एडमिशन हुए हैं। यानी 1070 सीटें अब भी खाली पड़ी हैं। सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद छात्रों का रुझान इन कोर्सेज की तरफ क्यों नहीं है? और ऐसी क्या नौबत आ गई कि प्रबंधन को चपरासियों तक को एडमिशन का जिम्मा सौंपना पड़ा? चपरासी अब इस उलझन में हैं कि वे अपना रोजमर्रा का काम संभालें या छात्रों को ढूंढकर उनका एडमिशन कराएं।
दरअसल, पार्क में चल रहे 9 एडवांस्ड कोर्सेज में 1070 सीटें खाली हैं। इन्हीं सीटों को भरने के लिए प्रबंधन ने अधिकारियों से लेकर ऑफिस बॉयज तक की जिम्मेदारी तय कर दी है। प्रबंधन ने बाकायदा एक आदेश जारी किया है। इसमें सहायक संचालक से लेकर लाइफ स्किल्स ट्रेनर्स तक के नाम दर्ज हैं। इतना ही नहीं, हर नाम के आगे एडमिशन का टारगेट भी लिखा गया है। किसी को 10 एडमिशन कराने हैं, किसी को 20 तो किसी को 8 छात्रों का एडमिशन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। यानी अब ग्लोबल स्किल पार्क के कर्मचारियों को अपने नियमित काम के साथ छात्रों के एडमिशन कराने की जिम्मेदारी भी निभानी है।
30 अक्टूबर के आदेश से खुला पूरा मामला:
ग्लोबल स्किल पार्क में साल में दो बार एडमिशन होते हैं। यहां हर कोर्स में 200 सीटें हैं। दावा किया जा रहा है कि नवंबर में शुरू होने वाले नए सत्र के लिए प्रबंधन को पर्याप्त छात्र नहीं मिल रहे हैं। हालात यह हैं कि कई कोर्सेज में तो 100 सीटें भी नहीं भर पाई हैं। यही वजह बताई जा रही है कि प्रबंधन को एडमिशन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को टारगेट देने वाला आदेश जारी करना पड़ा।
जानिए कहां कितनी सीटें खाली:
- एडवांस्ड एयर कंडीशनिंग एंड रेफ्रिजरेशन - 139 सीटें खाली
- एडवांस्ड मैकेनिकल टेक्नोलॉजी - 138 सीटें खाली
- एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स - 134 सीटें खाली
- एडवांस्ड मेकाट्रॉनिक्स एंड इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स - 134 सीटें खाली
ये आंकड़े इसलिए भी चौंकाने वाले हैं, क्योंकि जिन कोर्सेज में युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरत के मुताबिक ट्रेनिंग देने की बात कही गई थी, उन्हीं में एडमिशन के लिए छात्रों की कमी सामने आ रही है।
प्रबंधन ने दी सफाई:
1500 करोड़ खर्च करके बना ग्लोबल स्किल पार्क:
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